
महाराणा प्रताप की तरह कठिन डगर से गुजरेंगे सुवेंदु अधिकारी…
महाराणा प्रताप ( 9 मई 1540 – 19 जनवरी 1597) मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे। उनका नाम इतिहास में वीरता, शौर्य, त्याग, पराक्रम और दृढ प्रण के लिये अमर है। उन्होंने मुगल बादशाह अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की और कई सालों तक संघर्ष किया। अंततः अकबर महाराणा प्रताप को अधीन करने मैं असफल रहा। महाराणा प्रताप की नीतियां शिवाजी महाराज से लेकर ब्रिटिश के खिलाफ बंगाल के स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनीं। और अब आजाद भारत में महाराणा प्रताप की नीतियां पश्चिम बंगाल के नए छत्रप सुवेंदु अधिकारी के लिए प्रेरणा बनने जा रही हैं। छह साल पहले टीएमसी छोड़ भाजपा में आए सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में 9 मई को शपथ लेंगे। कभी ममता बनर्जी के बेहद क़रीबी रहे सुवेंदु अधिकारी अब बंगाल में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री होंगे। भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद पार्टी ने मुख्यमंत्री के तौर पर अधिकारी के नाम की घोषणा कर दी है। यह फैसला पार्टी के विधायक दल की बैठक में लिया गया, जिसकी घोषणा केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने की है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस जीत का बीजेपी के लिए सिर्फ वैचारिक महत्व नहीं है, ऐसा नहीं है कि हमारी एक और राज्य में सरकार बन गई बल्कि इस जीत ने राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे बड़ा छेद भरने का काम किया है।शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा, घुसपैठ और गोतस्करी के मुद्दे पर नई सरकार का एजेंडा पेश किया। अमित शाह ने नए-नए जीते विधायकों को संबोधित करते हुए कहा कि घुसपैठिया मुक्त बंगाल इस सरकार का वादा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ बंगाल ही नहीं पूरे देश से घुसपैठियों को चुन चुनकर निकालेंगे। अमित शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जीत ने राष्ट्रीय सुरक्षा में जो सबसे बड़ा छिद्र था उसको भरने का काम किया है।
महाराणा प्रताप का जिक्र आज इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि 9 मई उनका जन्मदिन है। और उन्होंने संघर्षों की पराकाष्ठा के बाद भी अपनी वैचारिक लड़ाई को नहीं छोड़ा था। पश्चिम बंगाल में संघर्षों की ऐसी ही वैचारिक लड़ाई सुवेंदु अधिकारी ने लड़ी है। और अब जो उनके सामने चुनौतियां हैं, जिनमें यूसीसी, कानून व्यवस्था मजबूत करना सहित तमाम मुद्दे शामिल हैं, जो कि सभी चुनौतीपूर्ण और
पश्चिम बंगाल के पूर्ण बदलाव पर केन्द्रित हैं। ऐसे में सुवेंदु अधिकारी की आगे की यात्रा बहुत संघर्षों से भरी रहने वाली है। इसमें राहत भरी बात यह है कि सुवेंदु जो चाहेंगे वह करने में सक्षम हैं क्योंकि राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को 207 सीटें मिली हैं, जो कि दो तिहाई बहुमत से अधिक है।
अब सुवेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल के ‘योगी’ के रूप में भी देखा जा रहा है। बुलडोजर सीएम और एनकाउंटर राज्य के रूप में भी अगर पश्चिम बंगाल को जाना जाएगा तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। सुवेंदु अधिकारी भी अविवाहित हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश में योगी की तरह अब भाजपा को पश्चिम बंगाल में सुवेंदु के रूप में एक सशक्त सीएम मिलने की पूरी उम्मीद है। अगर उनके राजनीतिक करियर की बात करें तो उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस से हुई थी। इसके बाद वह लंबे समय तक साल 1998 से 2020 तक टीएमसी के साथ रहे। ममता बनर्जी की सरकार में वह परिवहन और सिंचाई मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। दिसंबर 2020 में वे भाजपा में शामिल हो गए। वह 2009 से 2014 तक तमलुक निर्वाचन क्षेत्र से सांसद भी रह चुके हैं। सुवेंदु अधिकारी एक ताकतवर राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद रह चुके हैं। उनके भाई दिव्येंदु अधिकारी और सैमेंदु अधिकारी भी पश्चिम बंगाल के सक्रिय राजनेता और बीजेपी नेता रहे हैं। सुवेंदु अधिकारी ने शादी नहीं की है।
तो अब पश्चिम बंगाल में एक नया युग सुवेंदु अधिकारी के साथ शुरू हो रहा है। इसमें पश्चिम बंगाल के पूर्ण बदलाव की पूरी संभावना है। महाराणा प्रताप ने जिस तरह वैचारिक लड़ाई लड़ी थी, अब, उसी तरह की वैचारिक यात्रा सुवेंदु के साथ पश्चिम बंगाल करने जा रहा है। तो भाजपा निश्चित तौर से पश्चिम बंगाल में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी की तर्ज पर नया इतिहास बनने की अपेक्षा रखेगी। तो सुवेंदु ने साबित भी किया है कि वह हर तरह की चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं और वह अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर अपनी अलग पहचान बनाने में समर्थ हैं… कठिन डगर पर चलकर ही वह अपने मुकाम तक पहुंचे हैं और कठिन डगर पर चलकर वह पश्चिम बंगाल में भगवा सरकार की सार्थकता को साबित करेंगे।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं