इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी मर्डर केस में बड़ा मोड़: शिलॉन्ग कोर्ट ने 4 आरोपियों की जमानत 4 आधारों पर खारिज की, सोनम जैसी समानता और ट्रायल में देरी के तर्क नहीं माने; सरकार ने सोनम की बेल को हाईकोर्ट में चुनौती दी

इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी के चर्चित हत्याकांड के 4 प्रमुख आरोपियों को लंबे समय तक जेल में ही रहना पड़ सकता है। शिलॉन्ग सेशन कोर्ट ने मामले के मुख्य आरोपी राज कुशवाह समेत 4 आरोपियों की जमानत याचिकाएं गुरुवार (7 मई) को खारिज कर दी थीं। इस फैसले का विस्तृत आदेश अगले दिन शुक्रवार को जारी किया गया।

चारों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज हो गई।

चारों आरोपियों ने अपनी याचिकाओं में सोनम रघुवंशी के समान आधार होने, ट्रायल में देरी और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने के तर्क दिए थे। यह भी दावा किया था कि उन्हें गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी नहीं दी गई। हालांकि, कोर्ट ने उनके सभी तर्क खारिज कर दिए।

कानून के जानकारों का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद अब इन चारों आरोपियों को बेल मिलना मुश्किल है। ऐसे में वे लंबे समय तक जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।

वहीं, मेघालय सरकार ने आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामले में 12 मई को सुनवाई होगी

अब जानिए, वकीलों ने किस आधार पर बेल मांगी थी

  • राज कुशवाह की बेल रिजेक्ट: राज के वकील ने तर्क दिया कि इसी मामले की एक अन्य मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत मिल चुकी है, इसलिए राज को भी जमानत मिलनी चाहिए, क्योंकि दोनों की भूमिका समान है। मामले में कुल 90 गवाह हैं, जिनमें से अभी तक सिर्फ 4 की गवाही हुई है। ऐसे में ट्रायल खत्म होने में काफी समय लगेगा। वकील का कहना था कि राज घटनास्थल पर मौजूद नहीं था, उसके पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ और उसे सिर्फ साजिश के शक में फंसाया गया है। इतनी लंबी कैद अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है।
  • विशाल सिंह चौहान: वकील ने तर्क दिया कि इसी मामले की एक अन्य आरोपी सोनम रघुवंशी को अदालत पहले ही जमानत दे चुकी है। चूंकि विशाल की भूमिका भी वैसी ही है, इसलिए उसे भी जमानत मिलनी चाहिए। वकील का कहना था कि विशाल घटनास्थल पर मौजूद नहीं था और उसे केवल साजिश के आधार पर फंसाया गया है, जिसके लिए कोई ठोस सबूत नहीं है। मामले में 90 गवाह हैं और अभी तक केवल 4 की ही गवाही हुई है, जिससे ट्रायल पूरा होने में काफी समय लगेगा।
  • आकाश सिंह राजपूत: वकील ने तर्क दिया कि आरोपी लंबे समय से जेल में है और इतने लंबे समय तक जेल में रखना उसके मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है। आरोपी के खिलाफ कोई सीधा सबूत नहीं है और न ही उसके पास से कोई हथियार मिला है। वकील ने “समानता” का हवाला देते हुए कहा कि इसी मामले की एक अन्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत मिल चुकी है, इसलिए आकाश को भी जमानत मिलनी चाहिए।
  • आनंद कुर्मी: वकील ने दलील दी कि आरोपी काफी समय से जेल में है, जो उसके अधिकारों का उल्लंघन है। उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। एक अन्य मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर आनंद को भी जमानत मिलनी चाहिए।

दूसरी बार खारिज हुई राज की जमानत याचिका

राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम को जमानत मिलने के बाद राज कुशवाह ने पहली बार बेल के लिए याचिका लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि राज ने पिछली याचिका और मामले से जुड़ी जानकारी नहीं दी थी।अब दूसरी बार भी कोर्ट ने राज की जमानत याचिका खारिज कर दी है। साथ ही आकाश, आनंद और विशाल की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दी गईं।

सोनम की बेल के खिलाफ हाईकोर्ट में सुनवाई

इस मामले में आरोपी सोनम को मिली जमानत पर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मेघालय सरकार ने सोनम को मिली बेल को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।सरकार की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि सोनम की जमानत तत्काल प्रभाव से खारिज की जाए, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच और ट्रायल में कोई बाधा न आए।सरकार की इस अपील पर हाईकोर्ट में 12 मई को महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। यह दिन इस केस के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। यदि हाईकोर्ट सरकार के तर्कों से सहमत होता है, तो सोनम को दोबारा जेल जाना पड़ सकता है।

 

मेघालय के डिप्टी सीएम प्रेस्टन तिनसोंग ने कहा कि पुलिस की ओर से कोई चूक नहीं हुई।

मंत्री बोले- हाईकोर्ट फैसला करेगा

मेघालय के गृह मामलों के प्रभारी उपमुख्यमंत्री प्रेस्टन तिनसोंग ने गुरुवार को कहा कि राज्य सरकार ने इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की हत्या की मुख्य आरोपी और उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी को निचली अदालत से मिली जमानत को मेघालय हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

उन्होंने कहा, “मुझे इस पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि हमने पहले ही हाईकोर्ट में अपील कर दी है। अब उच्च न्यायालय को फैसला करने दें। पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जांच में कोई कमी नहीं थी। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों और विशेष जांच टीम (SIT) ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया है और वे पूरी तरह से सुसज्जित हैं।उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालती प्रक्रियाओं में कभी-कभी एक अदालत जमानत दे देती है तो दूसरी उसे रोक देती है, लेकिन पुलिस की ओर से कोई चूक नहीं हुई है।

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