भोपाल के 90° ब्रिज विवाद में बड़ा यू-टर्न: NHAI रिपोर्ट और जांच के बीच सभी 7 इंजीनियर बहाल, PWD मंत्री ने नोटशीट पर लिखा- जून 2025 से सस्पेंड हैं, बहाल कर दो

भोपाल के जिस 90 डिग्री एंगल वाले रेलवे ओवरब्रिज ने देशभर में मध्य प्रदेश की किरकिरी कराई, उस मामले में सस्पेंड सभी 7 इंजीनियरों को बहाल कर दिया गया है। इनमें दो चीफ इंजीनियर भी शामिल हैं

भोपाल में बना यह ब्रिज 90 डिग्री एंगल वाला ओवरब्रिज देशभर में ट्रोल हुआ था।

हैरानी की बात ये है कि पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने बहाली वाली नोटशीट पर अपनी टीप भी लिखी है। इसमें सिर्फ इतना लिखा कि ‘23 जून 2025 से ये सस्पेंड चल रहे हैं, इन्हें बहाल कर दो।’पूर्व में सस्पेंड होने के बाद दोनों तत्कालीन प्रभारी चीफ इंजीनियर ईएनसी ऑफिस में अटैच किए गए थे। बाकी इंजीनियर भोपाल में मैदानी ऑफिस में अटैच थे। बहाल होने के बाद सभी इंजीनियरों को ईएनसी ऑफिस में पदस्थ किया जाएगा।

7 इंजीनियरों को पहले आरोप पत्र जारी हुए

विभागीय सूत्रों के अनुसार, सस्पेंड 7 इंजीनियरों को पहले आरोप पत्र जारी हुए हैं। सभी ने जवाब पेश कर दिए। इसमें डिजाइन विंग से जुड़े इंजीनियरों ने गलती नहीं मानी है, लिहाजा जवाब का परीक्षण करने के बाद उन्हें बिना किसी कार्यवाही के बहाल किया गया है।

90 डिग्री एंगल वाले ब्रिज का ड्रोन व्यू..

ब्रिज के एक सिरे की ओर यू शेप का टर्न दिया गया।
दूसरे सिरे की ओर लगभग 90 डिग्री के एंगल से मोड़ दिया गया है।
एनएचएआई ने अपनी रिपोर्ट में ब्रिज पर 30-35 प्रति किमी स्पीड को खतरनाक बताया है।

इन्हें किया गया था सस्पेंड

  • प्रभारी ईई शबाना रज्जाक और सहायक यंत्री शानुल सक्सेना। इन्होंने रेलवे से सहमति बिना जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग का अनुमान किया था।
  • चीफ इंजीनियर संजय खांडे। डिजाइन के गलत अनुमोदन के मामले में कार्रवाई की गई।
  • उप यंत्री उमाशंकर मिश्रा। बिना रेलवे की सहमति के ड्राइंग का अनुमोदन काम कराया।
  • प्रभारी एसडीओ रवि शुक्ला। इनके द्वारा भी कार्य कराने में गलती की गई है।
  • चीफ इंजीलियर जीपी वर्मा। आरओबी के निर्माण में त्रुटिपूर्ण कार्यवाही कराई।
  • प्रभारी ईई जावेद शकील। जिस तरह से काम काम को लेकर भूमिका अदा करना थी, नहीं की।
  • सेवानिवृत्त प्रभारी अधीक्षण यंत्री एमपी सिंह। सेवा में रहते इन्होंने डिजाइन का अनुमोदन किया।

4-5 माह चलेगी विभागीय जांच

विभागीय जांच के आदेश के बाद अब अधिकारी की नियु​क्ति होगी। जो बयान, साक्ष्य और जवाब का परीक्षण करेगा। इसमें 4 से 5 माह का वक्त लग सकता है। बहाली के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ‎पीडब्ल्यूडी के ब्रिज डिवीजन में तत्कालीन प्रभारी ‎चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा, तत्कालीन एसडीओ रवि शुक्ला और तत्कालीन उप यंत्री ‎उमाशंकर मिश्रा के बारे में साफ किया गया है कि‎ उनकी पदस्थापना के साथ-साथ विभागीय जांच भी ‎चलेगी। बाकी पर कोई विभागीय जांच नहीं होगी।

रेलवे के साथ मिलकर फिर री-डिजाइन किया

भोपाल के ऐशबाग में बने 90 डिग्री मोड़ वाले रेलवे ओवरब्रिज का टर्निंग वाला हिस्सा फिर से बन रहा है। पीडब्ल्यूडी रेलवे के साथ मिलकर ब्रिज को रीडिजाइन कर रहा है। हालांकि, यह अब तक शुरू नहीं हो सका है। इस कारण हजारों लोग हर रोज परेशान हो रहे हैं।

मंत्री राकेश सिंह ने ही कराई थी जांच

मामला सामने आने के बाद पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) से जांच करवाई थी। एनएचएआई ने ब्रिज को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें 35-40 किमी प्रति घंटा से अधिक गति से गाड़ी नहीं चलाने का सुझाव दिया गया है। इससे अधिक स्पीड में गाड़ी चली तो हादसा होने का खतरा है।

ब्रिज के करीब ही ऐशबाग स्टेडियम है।

सोशल मीडिया पर मीम्स भी बने

भोपाल में बना इस रेलवे ओवरब्रिज को लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर जमकर मीम्स भी बनाए थे। लोगों ने सवाल उठाए थे कि यहां वाहन कैसे टर्न लेंगे? वाहनों के या तो ब्रिज की दीवारों से या फिर आपस में टकराने का खतरा बना रहेगा।

क्रॉसिंग बंद होने से ब्रिज की जरूरत

ब्रिज के निर्माण के समय रेलवे ने भी 90 डिग्री की इस टर्निंग पर आपत्ति की थी, लेकिन पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने यहां जगह कम होने का हवाला देते हुए कहा था कि और कोई विकल्प नहीं है। ऐशबाग रेलवे क्रॉसिंग बंद होने के बाद इस इलाके के लिए आरओबी एक बड़ी जरूरत है। इसलिए कम जगह में भी इसे बनाना होगा।

18 महीने में बनकर तैयार होना था

इस ब्रिज का निर्माण मई 2022 में शुरू हुआ था और इसे 18 महीने में पूरा करना था, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है। इसकी लागत 18 करोड़ रुपए है। 648 मीटर लंबे और 8 मीटर की चौड़ाई वाले ब्रिज का 70 मीटर हिस्सा रेलवे का है।

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