कीमत ही नहीं समझी…: इंदौर के 49 तालाब बचा लेते तो शहर महीनेभर मुफ्त पीता पानी, 25 करोड़ बिजली बचती और नर्मदा पर निर्भरता 12% तक घटती; 1700 करोड़ का कर्ज भी टल सकता था

इंदौर को पानी के लिए आत्मनिर्भर बनाने का रास्ता 49 तालाबों में छिपा है, लेकिन जिम्मेदार इसकी कीमत नहीं जान रहे। 2500 करोड़ के नर्मदा के चौथे चरण के लिए नगर निगम 1700 करोड़ का कर्ज लेगा। यदि शहर अपनी जल-विरासत को सहेज ले, तो साल में एक महीने का पानी मुफ्त मिल सकता है।

नर्मदा को इंदौर लाने में महीनेभर में खर्च होने वाली 25 करोड़ की बिजली बच सकती है। नर्मदा पर हमारी निर्भरता भी 12% तक कम हो सकती है। तालाब पूरी क्षमता से भरें तो शहर का वाटर रिचार्ज इतना हो सकता कि एक माह के पानी की जरूरत पूरी हो जाए।जल प्रबंधन एक्सपर्ट के साथ भास्कर इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि शहर के चारों कोनों धार रोड, रिंग रोड, खंडवा रोड और सुपर कॉरिडोर से सटे 22 तालाबों का सीमांकन ही नहीं किया गया है।

शहर के चारों ओर हैं 22 तालाब… इनका न सीमांकन, न रखरखाव

  • धार रोड: 11.8 एकड़ का सिंहासा-2 तालाब गायब है। मौके पर अब सिर्फ ईंट-भट्‌टे हैं।
  • 35.8 एकड़ का बिसनावदा तालाब 27.32 एकड़ ही बचा है। कैचमेंट में ग्राम पंचायत भवन है।
  • रिंग रोड: 60.9 एकड़ का पिपल्याहाना तालाब अब 16.55 एकड़ बचा है। नायता मुंडला तालाब 22.6 एकड़ से घटकर 2.97 एकड़ रह गया है। लिम्बोदी में भी 17 एकड़ पर कब्जे।
  • सुपर कॉरिडोर: टिगरिया बादशाह, पिपल्या कुमार, भौंरासला सहित 6 तालाब संकट में।
  • खंडवा रोड: बिलावली तालाब का दायरा घटा।

तालाबों की क्षमता का गणित

49 तालाब हैं शहर में जिनका कुल क्षेत्रफल 2496.18 एकड़ है।03 मीटर औसत गहराई है इनकी। जरूरत मूल स्वरूप में लाने की है।15 एमसीएम पानी भर सकता है इनमें। यह शहर की 33 दिन की जरूरत इतना।

जैसा जल प्रबंधन एक्सपर्ट सुधींद्र मोहन शर्मा ने बताया।

तालाबों के फायदे

  • बिजली खर्च: नर्मदा का पानी लाने में ज्यादा बिजली लगती है, तालाब से पानी लाना आसान।
  • भूजल सुधार: तालाबों से बोरवेल का जलस्तर स्थिर रहता है। पाइपलाइन की उम्र सीमित होती है, जबकि तालाब दीर्घकालिक जल स्रोत हैं।

नर्मदा चौथे चरण की चुनौतियां

  • 1700 करोड़ का कर्ज निगम पर भारी वित्तीय दबाव डालेगा।
  • 20% मौजूदा व्यवस्था में करीब 20% पानी लीकेज में बर्बाद।
  • 28 माह में 1500 किमी पाइपलाइन शहर में बिछाना बड़ी चुनौती।

शहर में रोज बिछानी है 1.8 किलोमीटर नई लाइन शहर में नर्मदा के चौथे चरण की परियोजना को 2029 तक पूरा करना है। देरी के कारण अब केवल 28 महीने (840 दिन) बचे हैं। लक्ष्य पूरा करने के लिए निगम को हर दिन 1.8 किलोमीटर वितरण पाइपलाइन बिछानी होगी।

एक टैंक बनने में लगते हैं 18 महीने, 40 बनाना हैं जब तक 550 किलोमीटर की पुरानी पाइपलाइनें नहीं बदली जातीं, तब तक अतिरिक्त 450 एमएलडी पानी भी कम पड़ सकता है। चौथे चरण के लिए 40 नए टैंक भी बनाने हैं। एक टैंक बनने में ही 18 महीने लगते हैं।

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