अब चुनाव जीतने के ‘थलपति विजय मॉडल’ की अग्नि परीक्षा… कौशल किशोर चतुर्वेदी

अब चुनाव जीतने के ‘थलपति विजय मॉडल’ की अग्नि परीक्षा…
तमिलनाडु में 10 मई 2026 से राजनीति के एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। टीवीके का शासन शुरू हो गया है। एक्टर विजय अब तमिलनाडु के चीफ मिनिस्टर बन चुके हैं। और सीएम बनते ही उन्होंने खटाखट तीन फाइलों पर दस्तखत कर दिए। इसमें हर महीने घरेलू उपभोक्ताओं को 200 यूनिट फ्री बिजली देने का चुनावी वादा भी शामिल है। इसके अलावा उन्होंने हर जिले में एंटी ड्रग यूनिट का गठन करने और महिला सुरक्षाबल के गठन के ऑर्डर पर साइन कर दिए। 200 यूनिट फ्री बिजली देने के लिए राज्य सरकार पर भारी भरकम बोझ पड़ना तय है और तमिलनाडु राज्य भारी कर्ज के तले दबा हुआ है। इसका जिक्र भी सीएम बनने के बाद थलपति विजय ने किया। उन्होंने कहा है कि पिछली सरकार राज्य पर कर्ज का बोझ छोड़ गई है और सरकारी खजाना खाली है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि सीएम विजय अपने सभी वादों को पूरा करने के लिए पैसा कहां से लाएंगे? या फिर ‘राजनीति का विजय मॉडल’ कर्ज के समुद्र में गोते लगाएगा।
विजय ने 10 मई को सुबह 10 बजे के बाद चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में शपथ ली। उनके साथ टीवीके के कुछ वरिष्ठ नेताओं सहित नौ अन्य लोगों ने भी मंत्री पद की शपथ ली। एक्टर से चीफ मिनिस्टर बनने के लिए विजय ने चुनावी वादों की जो झड़ी लगाई है, उसे पूरा करना एक बड़ी चुनौती है। 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा सीएम बनते ही पूरा कर दिया गया है। इसके अलावा 1.57 करोड़ महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की सहायता राशि देने का वादा किया गया है। गरीब परिवारों की महिलाओं की शादी के लिए पार्टी ने 8 ग्राम सोना और अच्छी क्वालिटी की सिल्क साड़ी देने का वादा किया है। बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को हर महीने 3,000 रुपये गुजारा भत्ता देने का वादा किया गया है। बेहतर शिक्षा व्यवस्था देने का वादा है। हर घर तक 100 प्रतिशत पाइप से पीने का पानी पहुंचाने का वादा विजय के दल ने किया है। हर साल 6 मुफ्त एलपीजी सिलिंडर देने का वादा किया गया है। 5 एकड़ से कम जमीन वाले किसानों के कृषि सहकारी फसल ऋण को पूरी तरह माफ करने का वादा विजय के घोषणापत्र में शामिल है। महिला स्वयं सहायता समूह के लिए 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण देने का वादा भी किया गया है। ग्रेजुएट धारकों को 4,000 रुपये भत्ता और डिप्लोमा धारकों को 2,500 रुपये भत्ता देने का वादा भी किया है। ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों को रेगुलर करने का वादा भी किया गया है। इसके अलावा भी बहुत लंबी फेहरिस्त है, जिससे हर गरीब और लाचार खुद को समृद्ध महसूस कर सकेगा।
राज्य के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में से एक, विजय ने टीवीके के चुनावी घोषणापत्र को जारी करने के दौरान कहा था कि यह दस्तावेज तिरुवल्लुवर के तमिल ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ के सिद्धांतों पर आधारित है। विजय ने उस समय अरम (सदाचार), पोरुल (धन) और इनबम (आनंद), इन गुणों को राजनीति और प्रशासन के लिए आवश्यक पहलू बताया था।थलपति विजय ने कहा था, ‘टीवीके ने ईमानदार प्रशासन को अपनी विचारधारा के रूप में अपनाया है। हमारी पार्टी का पहला चुनावी घोषणापत्र भी ईमानदारी का ही एक आश्वासन है।हम एमके स्टालिन (तमिलनाडु के मौजूदा मुख्यमंत्री) की तरह लोगों को गुमराह नहीं करेंगे।
विजय ने तमिलनाडु की जनता को आश्वासन देते हुए कहा था, ‘हम जल्दबाजी में ऐसा कोई घोषणापत्र नहीं बना रहे हैं जो लोगों से किए गए खोखले वादों से भरा हो।’
यह बात सही है कि थलपति विजय
का घोषणापत्र खोखले वादों से भरा नहीं है, लेकिन सवाल फिर वही है कि इन सब बातों को पूरा करने के लिए तमिलनाडु सरकार को एक लाख करोड़ से अधिक भारी भरकम राशि की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में कर्ज से दबा तमिलनाडु, वह कौन सी राह निकालेगा जिससे खजाना भी भरा रहे, कर्ज भी न लेना पड़े और विजय के वादे भी खोखले साबित न हों। व्यावहारिक धरातल पर यह सब इतना आसान नजर नहीं आ रहा है। और एक्टर से चीफ मिनिस्टर बने विजय के लिए
इसका ऐसा समाधान निकालना कि वादे भी पूरे हो जाएं और
खजाना खाली न करने का उनका इरादा भी पूरा हो सके। यह सब कैसे होगा, यह बड़ी चुनौती विजय और उनकी सरकार के सामने है। फिलहाल सभी राज्यों के सामने यही चुनौती है कि विकास के लिए धनराशि का टोटा है और वोट पाने के लिए किए गए वादों को पूरा करने के लिए भारी भरकम धनराशि सरकारों पर बोझ बन गई है। अब वादों को पूरा करने की जद्दोजहद करने वाले मुख्यमंत्रियों की फेहरिस्त में एक्टर से चीफ मिनिस्टर बने विजय का नाम भी शामिल हो गया है। चुनाव जीतने के ‘थलपति विजय मॉडल’ की यही अग्नि परीक्षा है… जो कि आने वाले समय में सभी राज्यों में यह संदेश देगी की चुनाव जीतने का थलपति मॉडल सफल है अथवा असफल…। हालांकि चौथे प्रयास में
शपथ लेने की परीक्षा में सफल होने वाले विजय के सामने अग्नि परीक्षा तो फिलहाल बहुमत साबित करने की भी है, लेकिन डीएमके और एआईडीएमके के फेर में उलझे, तमिलनाडु राज्य में बहुमत साबित करने की अग्नि परीक्षा में सफल होने में विजय के लिए कोई संशय नजर नहीं आ रहा है… और उम्मीद यही है कि वह पूरे पांच साल सरकार चलाने में सफल भी होंगे। और चुनाव जीतने के
‘थलपति विजय मॉडल’ को कसौटी पर खरा उतरने में पांच साल तक और कोई बाधा सामने नहीं आएगी।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं

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