मध्य प्रदेश बीजेपी का नया फॉर्मूला: मंत्री दर्जा नहीं, हारी सीटों की जिम्मेदारी संभालेंगे निगम-मंडल अध्यक्ष, अब तामझाम नहीं ग्राउंड परफॉर्मेंस से होगी नेताओं की पहचान

मध्य प्रदेश में बीजेपी संगठन और सरकार ने वीआईपी कल्चर को किनारे कर नेताओं के लिए परफॉर्मेंस का नया फॉर्मूला तैयार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील के बाद बीजेपी ने अपना प्लान पूरी तरह बदल दिया है।

अब नवनियुक्त निगम-मंडल अध्यक्षों को लाल बत्ती या मंत्री दर्जे का तामझाम नहीं मिलेगा, बल्कि उन्हें उन विधानसभा सीटों की कमान संभालनी होगी, जहां पिछले चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। सीएम मोहन यादव का भी कहना है कि अब प्रोटोकॉल नहीं, सिर्फ और सिर्फ ग्राउंड परफॉर्मेंस देखी जाएगी।

दरअसल, इजराइल-ईरान युद्ध के चलते उत्पन्न वैश्विक परिस्थितियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन का संयमित उपयोग करने की अपील की थी। इसके बावजूद मध्य प्रदेश में कुछ नेताओं ने बड़े वाहन काफिले और रैलियां निकालीं। इनमें पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर की रैली राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रही। मामले को लेकर भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने भी संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट तलब की थी।

निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग, प्राधिकरण के अध्यक्ष, उपाध्यक्षों और सदस्यों के प्रशिक्षण के बाद

सीएम बोले- तामझाम से नहीं, काम से बनाएं पहचान

18 मई को भोपाल स्थित सुशासन संस्थान में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निगम-मंडल अध्यक्षों और सदस्यों को स्पष्ट संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि वैश्विक हालातों के कारण अनावश्यक वाहनों के उपयोग और पायलट-फॉलो जैसी व्यवस्थाओं से बचने की जरूरत है।

सीएम ने कहा था- आपको दर्जा मिले या न मिले, इसका कोई सिस्टम नहीं है। पहचान काम के आधार पर बनानी है, न कि तामझाम से। उनके इस बयान को मंत्री दर्जा न देने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

संस्थाओं की कार्यक्षमता और आमदनी बढ़ाने पर ध्यान

सरकार और भाजपा संगठन का मानना है कि मंत्री दर्जे के साथ मिलने वाली सुविधाएं जैसे पायलट वाहन, हूटर, वीआईपी प्रोटोकॉल और सरकारी संसाधन कई बार नेताओं का ध्यान मूल काम से भटका देते हैं। संगठन चाहता है कि अध्यक्ष अपनी संस्थाओं की कार्यक्षमता और आमदनी बढ़ाने पर ध्यान दें।

सूत्रों के अनुसार, भाजपा संगठन अध्यक्षों और उपाध्यक्षों को उन विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंप सकता है, जहां पिछले चुनाव में पार्टी को हार मिली थी। रणनीति यह है कि नेताओं को उनके गृह क्षेत्र के बजाय दूसरी सीटों पर लगाया जाए, ताकि वे अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने के बजाय संगठन को मजबूत करने पर फोकस करें।

मंत्री दर्जा मिलने पर ये सुविधाएं मिलती हैं

कैबिनेट मंत्री या राज्य मंत्री का दर्जा मिलने पर अध्यक्षों को सरकारी बंगला, स्टाफ, वाहन, ईंधन, यात्रा भत्ता, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा प्रोटोकॉल जैसी सुविधाएं मिलती हैं। कैबिनेट मंत्री स्तर पर करीब 350 लीटर और राज्य मंत्री स्तर पर लगभग 300 लीटर मासिक ईंधन की सुविधा दी जाती है। इसके अलावा पायलट-फॉलो वाहन, हूटर और जिलों में विशेष प्रोटोकॉल भी मिलता है।

फिलहाल राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया और पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया को छोड़कर अन्य नए नियुक्त अध्यक्षों को मंत्री दर्जा मिलने की संभावना कम मानी जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से इस पर अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

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