एमपी में नर्मदा की धार मोड़कर रेत की लूट: 24 घंटे मशीनों से खनन, रोज 100–150 डंपरों से अवैध परिवहन; एक डंपर की रेत 50 हजार तक में बिक रही

मध्य प्रदेश में नर्मदा और उसकी सहायक नदियों में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन जारी है। जबलपुर, नरसिंहपुर और कटनी जैसे जिलों में रेत माफिया खुलेआम नदियों से रेत निकाल रहे हैं।

खनन माफिया ने नदी के बीच रेत का पुल बना दिया। किनारे जेसीबी से रेत का खनन किया जा रहा है।

कई स्थानों पर 24 घंटे हाईफाई मशीनें, पोकलेन, जेसीबी और नावों के जरिए खनन किया जा रहा है। यह स्थिति तब है, जब सुप्रीम कोर्ट ने चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन को लेकर मध्य प्रदेश सहित तीन राज्यों को फटकार लगाई है।

दैनिक भास्कर टीम ने जबलपुर-नरसिंहपुर सीमा से लगे घाटों का दौरा किया। यहां नर्मदा नदी के भीतर तक रैंप बने मिले, जहां जेसीबी मशीनों से हाइवा (डंपर) में रेत भरी जा रही थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक हाइवा रेत 30 से 50 हजार रुपए तक में बेची जा रही है।

देखिए अवैध रेत खनन की तस्वीरें…

इस तरह से हीरापुर घाट पर जेसीबी की मदद से रेत निकाली जा रही।

खनन के लिए माफिया ने यहां ड्रम का पुल बना रखा है।

नर्मदा, हिरण और परियट में मशीनों से खनन

जबलपुर जिले के बेलखेड़ा क्षेत्र के हीरापुर-अमोदा गांव स्थित नर्मदा घाट पर हाईफाई डिवाइस (पनडुब्बी) के जरिये रेत निकाली जा रही है। यहां नदी किनारे रेत जमा कर हाइवा में भरकर जबलपुर सहित आसपास के जिलों में सप्लाई की जाती है।

नादिया घाट से शुरू होकर यह नेटवर्क मालकछार, बेलखेड़ी, पावला घाट होते हुए नरसिंहपुर सीमा तक फैला है। स्थानीय स्तर पर बताया गया कि माफिया ने नदी की धार मोड़कर बीच में रैंप तैयार कर लिए हैं, जहां भारी वाहन सीधे नदी के भीतर तक पहुंच रहे हैं।घाटों पर निगरानी के लिए युवक तैनात रहते हैं, जो किसी बाहरी व्यक्ति या प्रशासनिक गतिविधि की सूचना तुरंत नेटवर्क तक पहुंचाते हैं।

कालीघाट के पास अवैध रेत के ढेर।

कॉलोनियों और गांवों से चल रहा नेटवर्क

टीम जब अमोदा घाट पहुंची तो वहां कई किलोमीटर तक फैला अस्थायी रैंप दिखाई दिया। मौके पर बड़ी मशीनों से लगातार रेत निकाली जा रही थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह काम लंबे समय से चल रहा है और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी भी है।

इस तरह से रेत के डंपर कॉलोनियों के अंदर से गुजर रहे हैं।

कटनी में रोज 100 से 150 डंपर अवैध रेत का परिवहन

कटनी जिले के विजयराघवगढ़ क्षेत्र में महानदी से भी बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, प्रतिदिन 100 से 150 डंपर अवैध रेत का परिवहन हो रहा है।

कुछ समय पहले प्रशासन ने महानदी की रेत खदानों को सरेंडर करने के आदेश दिए थे। इसके बाद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर कार्रवाई करते हुए सैकड़ों वाहन जब्त किए गए। इसके बावजूद बड़े वाहन लगातार रेत ढोते दिखाई दे रहे हैं।

अधिकारी बोले- केवल एक स्थान पर रेत भंडारण की अनुमति

खनिज विभाग के अधिकारियों के मानें तो जबलपुर जिले में केवल एक स्थान पर ही रेत भंडारण करने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा जहां भी रेत इकट्‌ठा की जा रही है, वहां अवैध तरीके से भंडारण किया गया है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कालीघाट, तिलवाराघाट, बरगी, अमोद, हीरापुर के आसपास आखिर कैसे रेत के ढेर लगे हुए हैं और खनिज विभाग के अधिकारियों को इसकी जरा भी जानकारी नहीं है। यह पूरी तरह समझ से परे है।

कार्रवाई मजदूरों और छोटे वाहन चालकों पर, माफिया बच निकलते हैं

बरगी के नादिया घाट से पावला घाट तक नर्मदा नदी में बड़े पैमाने पर रेत खनन हो रहा है। इसके अलावा हिरण, गौर और परियट नदियों में मशीनों के जरिए रेत निकाली जा रही हैं। बरेला, गौर, बरगी, चरगवां, शहपुरा और बेलखेड़ा क्षेत्र भी इससे अछूते नहीं हैं।

कांग्रेस के पूर्व विधायक संजय यादव का आरोप है कि नर्मदा के साथ-साथ हिरण नदी में भी बड़े पैमाने पर अवैध खनन जारी है। उनका कहना है कि कार्रवाई केवल मजदूरों और छोटे वाहन चालकों पर होती है, जबकि खनन के असली सरगना और माफिया बच निकलते हैं।

नेशनल चंबल सैंक्चुरी में अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार

26 मई को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल चंबल सैंक्चुरी में हो रहे अवैध रेत खनन और माफिया के बढ़ते हमलों पर मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को फटकार लगाई थी।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा था कि केवल एफआईआर दर्ज करना या छोटे वाहन चालकों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि अवैध खनन के असली मास्टरमाइंड, फाइनेंसर और नेटवर्क संचालकों तक पहुंचना जरूरी है।

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