“सखी सइंया तो खूबय कमात है… महंगाई डायन खाय जात है…” रसोई का काम खत्म करने के बाद भोपाल की रहने वाली प्रीती कुरूपा मोबाइल हाथ में लेकर बिस्तर पर बैठी हैं और इस गाने पर बनी रील अपनी सहेलियों को भेज रही हैं। प्रीती का कहना है कि ये महज एक रील नहीं हमारे मन की बात है।
पूरे महीने का खर्च डायरी में लिखा है। सैलरी तो रोज बढ़ती नहीं, लेकिन रोज बढ़ती मंहगाई में अब बजट मैनेज करना मुश्किल हो रहा है। मध्य प्रदेश के हजारों परिवारों में इन दिनों ऐसी ही बातचीत हो रही है।फरवरी-मार्च में मिडिल क्लास का जो परिवार करीब 9,258 रुपए में जरूरी मासिक खर्च निपटा रहा था, उसे मई के आखिर तक उसी जीवनशैली के लिए 12,318 रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। यानी सिर्फ 90 दिनों में घरेलू बजट पर करीब 3 हजार रुपए का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। यह 33 प्रतिशत की वृद्धि है।

रसोई पर सबसे ज्यादा मार
महंगाई का सबसे बड़ा असर रसोई पर दिखाई दे रहा है। कुछ महीने पहले जो परिवार 2,500 रुपए में महीनेभर की सब्जियां खरीद लेता था, उसे अब 3,500 से 3,800 रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। दाल, तेल और मसालों के दाम भी लगातार बढ़े हैं।
दूध के दाम में करीब 2 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। रोज दो लीटर दूध लेने वाले परिवार को महीने में लगभग 120 रुपए अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। घरेलू गैस सिलेंडर भी 60 रुपए तक महंगा हो चुका है।प्रीती कुरूपा कहती हैं, ‘पहले महीने के अंत में कुछ पैसे बच जाते थे, अब पूरा बजट गड़बड़ा गया है। बच्चों की जरूरतों में कटौती नहीं कर सकते, इसलिए बाहर खाना और दूसरी छोटी-छोटी चीजों पर खर्च कम करना पड़ रहा है।’

कई जगह गैस की बजाय इंडक्शन पर खाना बन रहा है, लेकिन इससे बिजली का खर्च बढ़ रहा।
गर्मी ने बढ़ाया बिजली का झटका
भीषण गर्मी के बीच बिजली बिल भी लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। कूलर, पंखे और एसी के अधिक उपयोग से कई घरों का बिजली बिल डेढ़ से दोगुना तक पहुंच गया है। छोटे दुकानदारों और सेवा क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि बिजली और संचालन लागत बढ़ने से उन्हें भी कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं।
पेट्रोल महंगा, तो हर चीज महंगी
15 मई के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 9 से 10 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। मध्य प्रदेश में पेट्रोल 116 रुपए प्रति लीटर के आसपास पहुंच गया है, जबकि डीजल भी 100 रुपए के करीब है।इसका असर सिर्फ वाहन चलाने तक सीमित नहीं है। परिवहन महंगा होने से सब्जियां, दूध, दवाइयां और दूसरे जरूरी सामान भी महंगे हो जाते हैं। भोपाल में

दवाइयां और इलाज भी महंगे
शुगर, बीपी और दूसरी नियमित दवाओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। इससे बुजुर्गों और लंबे समय से इलाज करा रहे मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। ईंधन महंगा होने से अस्पताल पहुंचने, एंबुलेंस और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की लागत भी बढ़ी है। ये अभी और बढ़ने का अनुमान है।

सुपर मार्केट में कई लोग दाम में बढ़ोतरी देख कम खरीददारी कर रहे हैं।
बाहर खाना भी जेब पर भारी
होटल और रेस्टोरेंट में खाना पहले की तुलना में महंगा हो गया है। कमर्शियल गैस, सब्जियों और परिवहन लागत बढ़ने का असर सीधे खाने की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर भी डिलीवरी चार्ज और फ्यूल सरचार्ज बढ़ने से खर्च बढ़ा है।
ट्रांसपोर्टरों को नुकसान, बढ़ रही लागत
ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी सीएल मुकाती के अनुसार, ट्रकों में इस्तेमाल होने वाले यूरिया (DEF), इंजन ऑयल, लुब्रिकेंट, टायर और स्पेयर पार्ट्स के दाम 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं।वहीं डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने लागत और बढ़ा दी है। उनका कहना है कि करीब 30 प्रतिशत ट्रकों को पर्याप्त माल नहीं मिल रहा, जिससे उद्योग पहले से दबाव में हैं। बढ़ती लागत को देखते हुए 1 जून से मालभाड़े में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जा सकती है।

ट्रांसपोर्ट कारोबारी अपने नुकसान की भरपाई के लिए मालभाड़ा बढ़ाने की तैयारी में हैं।
पेट्रोलियम पदार्थों का महंगाई से सीधा कनेक्शनः अर्थशास्त्री
अर्थशास्त्री प्रोफेसर मनीष शर्मा के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ता है। यदि कोई व्यक्ति महीने में 30 से 40 लीटर पेट्रोल खर्च करता है और कीमत 7 से 10 रुपए प्रति लीटर बढ़ जाती है, तो उसका मासिक खर्च 300 से 800 रुपए तक बढ़ सकता है।वे कहते हैं कि असली असर इसके बाद शुरू होता है। परिवहन लागत बढ़ने से सब्जियां, दूध, राशन, दवाइयां, बस-ऑटो किराया, होटल और डिलीवरी सेवाएं तक महंगी हो जाती हैं।
आगे और बढ़ सकती है महंगाई
प्रोफेसर शर्मा के अनुसार, मध्य पूर्व में तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक तेल आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताएं दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो