जबलपुर में बड़ा खुलासा: बेरोजगार युवक बने किन्नर, ट्रेनों में वसूली कर कमा रहे थे 60 हजार रुपए महीना; यूपी-बिहार के गैंग का कटनी से इटारसी तक फैला नेटवर्क, RPF ने किया पर्दाफाश

बेरोजगारी युवा को ऐसे रास्तों पर धकेल रही है, जिसकी कल्पना भी मुश्किल है। जबलपुर रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में यात्रियों से पैसे वसूलने वाले किन्नरों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की कार्रवाई में सामने आया है कि कई किन्नर असल में युवक हैं, जो सिर्फ आसान कमाई और आर्थिक तंगी के कारण किन्नर का रूप धारण कर घूम रहे हैं। RPF ने 6 महीनों में करीब 120 से ज्यादा लोगों को पकड़ा, जिनमें से 60% (60 से अधिक) युवक निकले।

आरपीएफ थाने में पकड़े गए नकली किन्नरों से पूछताछ करती रेलवे पुलिस।

किन्नर का वेश रखकर तीन युवक ट्रेनों में वसूली कर रहे थे।

तीन संदिग्ध किन्नरों को हिरासत में लिया, तब खुला राज

ट्रेनों में यात्रियों से जबरन वसूली की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद RPF ने 3 जून को स्पेशल चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान टीम ने तीन संदिग्ध किन्नरों को हिरासत में लिया। जब इनसे कड़ाई से पूछताछ की गई तो सच सामने आ गया। ये तीनों महिलाएं या किन्नर नहीं, बल्कि अच्छे-खासे युवक हैं जो वेशभूषा बदलकर यात्रियों को ठग रहे थे

आरपीएफ थाने में जांच करती पुलिस।

घर से पैंट-शर्ट में निकलते, स्टेशन से पहले पहनते साड़ी

पकड़े गए आरोपियों में कानपुर का रहने वाला आशीष (बदला हुआ नाम- आशी), महेश (माही) और पिंचू (तरन्नुम) शामिल हैं। ये तीनों जबलपुर के गायत्री नगर में किराए से कमरा लेकर एक साथ रहते हैं। घर से ये आम लड़कों की तरह पैंट-शर्ट पहनकर निकलते हैं।

रेलवे स्टेशन पहुंचने से ठीक पहले ये किसी सुरक्षित जगह पर साड़ी या सूट पहनते हैं। मांग में सिंदूर लगाते हैं। भारी मेकअप करते हैं और पूरी तरह किन्नर का रूप ले लेते हैं। इनकी आवाज और चलने-बोलने का तरीका इतना सटीक होता है कि आम यात्री तो क्या, पुलिस भी धोखा खा जाए।

पुलिस पूछताछ में क्यूआर कोड बताता आशीष उर्फ आशी।

रोज की कमाई 1500 से 2000: कैश नहीं तो QR कोड हाजिर

पकड़े गए आरोपी आशीष ने बताया कि नौकरी के लिए वह कई शहरों में भटका, लेकिन जब काम नहीं मिला तो उसने सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर यह रास्ता चुना। यात्रियों के डर और संकोच का फायदा उठाकर ये लोग प्रति पैसेंजर 10 से 100 रुपए तक वसूलते हैं। इससे इनकी रोजाना की कमाई 1,500 से 2,000 हो जाती है।यदि कोई यात्री कहता है कि उसके पास खुले पैसे या कैश नहीं है तो ये तुरंत जेब से मोबाइल निकालकर ऑनलाइन पेमेंट के लिए QR कोड सामने अड़ा देते हैं।

कई युवक ऑपरेशन कराने की सोच रहे

आरपीएफ अफसरों ने बताया कि इस धंधे में बिना किसी इन्वेस्टमेंट के इतनी मोटी और आसान कमाई है कि कुछ युवक अब जेंडर चेंज ऑपरेशन (लिंग परिवर्तन) कराने तक की बात सोच रहे हैं।आरोपियों को अच्छी तरह पता है कि रेलवे एक्ट के तहत पकड़े जाने पर कोर्ट से आसानी से और बहुत जल्दी जमानत मिल जाती है। इसी लचीले कानून का फायदा उठाकर ये बेखौफ घूम रहे हैं।

किराए के मकानों में रहकर नेटवर्क को चला रहे

आरपीएफ पोस्ट प्रभारी राजीव खरब ने बताया कि पकड़े गए ज्यादातर युवक उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं। इन लोगों ने जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, इटारसी जैसे रेलवे जंक्शन वाले इलाकों में बाकायदा गैंग बना रखी है और किराए के मकानों में रहकर इस नेटवर्क को चला रहे हैं।

किन्नर समाज नाराज, कहा- हमारी छवि खराब हो रही

इस खुलासे के बाद असली किन्नर समुदाय ने विरोध दर्ज कराया है। जबलपुर की माही किन्नर का कहना है- इन नकली किन्नरों की वजह से हमारे पूरे समाज की बदनामी हो रही है। ये लड़कों की टोलियां ट्रेनों से लेकर मोहल्लों तक में लोगों से बदतमीजी और जबरन वसूली करती हैं, जिससे लोग हमें गलत समझने लगते हैं। प्रशासन को ऐसे जालसाजों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

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