द्रविड़ मुक्त हुई तमिलनाडु की सत्ता… पर यहां भगवा की राह आसान नहीं… कौशल किशोर चतुर्वेदी

द्रविड़ मुक्त हुई तमिलनाडु की सत्ता… पर यहां भगवा की राह आसान नहीं…
आजादी के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में भगवा रंग बिखर रहा है। लेकिन द्रविड़ राजनैतिक दलों की परछाईं से मुक्त तमिलनाडु की सत्ता में भगवा की राह अब भी आसान नहीं है। शायद इस बात को पूरी तरह से समझकर तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने भाजपा से अलग होना ही बेहतर समझा है। अगर भाजपा को तमिलनाडु में अपना आधार मजबूत करना था, तब अन्नामलाई द्वारा बताई गई राह पर अकेले ही आगे बढ़ना जरूरी था। विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा को मिले मतदान प्रतिशत ने यह बात पूरी तरह साफ कर दी है। अन्ना मलाई फार्मूला पर जहां लोकसभा में एआईएडीएमके से अलग होकर भाजपा का मत प्रतिशत 11 तक पहुंच गया था, वह विधानसभा चुनाव में गिरकर एक अंक में ही सिमट गया। शायद इसीलिए अन्नामलाई ने भाजपा से तौबा करने में ही अपने भविष्य की भलाई समझी। भाजपा ने अन्नामलाई की राय को तरजीह नहीं दी तो अन्ना ने भी अपनी राह तय कर ली। और काफी समझाइश के बाद भी जब अन्नामलाई नहीं माने तो भाजपा ने भी इस्तीफा स्वीकार करने में ही भलाई समझी।
तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा देने और एक नए राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत करने की घोषणा की है। सोशल मीडिया पर लाइव आकर अन्नामलाई ने कहा कि यह आंदोलन आगे चलकर एक राजनीतिक पार्टी का रूप लेगा। यानी मतलब साफ है कि
अन्नामलाई को उनकी राय न माने जाने का अफसोस इतना ज्यादा रहा कि उनके जमीर ने भाजपा के साथ बने रहना स्वीकार नहीं कर पाया।अन्नामलाई ने कहा है कि वे आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों और उसके बाद होने वाले आम चुनावों में हिस्सा लेंगे।
अन्नामलाई ने लोगों से ‘वी द लीडर’ आंदोलन से जुड़ने की अपील की।उन्होंने कहा, “मेरी सबसे बड़ी इच्छा एक नया रास्ता और नया राजनीतिक आंदोलन शुरू करने की है। बीजेपी ने मुझे छह साल तक तमिलनाडु के लोगों के लिए काम करने का मौक़ा दिया। आज मैं उससे अलग हो गया हूँ।”
अन्नामलाई ने कहा, “2009 में छात्र जीवन के दौरान मैंने विजयकांत की डीएमडीके में तीन महीने इंटर्नशिप की थी। इसके बाद 2020 में बीजेपी में शामिल हुआ। आज मैं आपके सामने एक नया आंदोलन पेश कर रहा हूँ। मेरे बारे में कई तरह की ख़बरें चल रही हैं, इसलिए मैं ख़ुद स्थिति स्पष्ट कर रहा हूँ।” अन्नामलाई ने दो जून को गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की थी। अभिनेता रजनीकांत का ज़िक्र करते हुए अन्नामलाई ने कहा, “मैंने बीएल संतोष से वादा किया था कि मैं बीजेपी में शामिल होऊँगा। 2020 में बीजेपी में शामिल होने से एक दिन पहले रजनीकांत ने मुझे फ़ोन किया था, लेकिन मैंने उनका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया।” उन्होंने कहा, “मैं भारतीय पहचान वाला एक स्वाभिमानी तमिल हूँ। हर किसी को तमिलनाडु के विकास के लिए काम करना चाहिए। मैं हमेशा कहता रहा हूँ कि बीजेपी को अपनी तमिल पहचान बनाए रखने के लिए अकेले चुनाव लड़ना चाहिए। अन्नामलाई ने दावा किया कि उन्होंने पिछले दिसंबर में ही पार्टी नेतृत्व को अपने इस्तीफ़े की जानकारी दे दी थी।
उन्होंने कहा, “पिछले 18 महीनों से मैं अपने मतभेद व्यक्त कर रहा था। पांच दिसंबर को मैंने पार्टी छोड़ने की सूचना दे दी थी।” उन्होंने यह भी कहा कि कोयंबटूर में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर एक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा। बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ज़िक्र करते हुए अन्नामलाई ने कहा, ” प्रधानमंत्री मोदी के प्रति मेरा सम्मान है. लेकिन अगर तीन-भाषा नीति जैसे किसी मुद्दे पर बीजेपी से असहमति होगी, तो हम खुलकर अपनी राय रखेंगे।”
अन्नामलाई ने कहा कि औपचारिक रूप से इस्तीफ़ा देने के लिए उन्होंने अमित शाह से व्यक्तिगत मुलाक़ात की थी।
5 जून 2026 को सुबह बीजेपी नेतृत्व ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि अन्नामलाई का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया गया है। विज्ञप्ति में कहा गया कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उनकी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया है।
अन्नामलाई 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने थे। उनके नेतृत्व में बीजेपी ने एआईएडीएमके से अलग होकर 2024 का लोकसभा चुनाव अकेले लड़ा। हालांकि पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी, लेकिन उसका वोट प्रतिशत बढ़कर 11 फीसदी से अधिक हो गया। इसके बाद 2025 में अन्नामलाई ने प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ दिया और नैनार नागेंद्रन नए प्रदेश अध्यक्ष बने। और 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने फिर एआईएडीएमके के साथ गठबंधन किया। माना जा रहा था कि अन्नामलाई चुनाव लड़ेंगे, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि वे केवल प्रचार करेंगे। इसके बावजूद बीजेपी सिर्फ़ एक सीट जीत सकी और उसका वोट प्रतिशत घटकर 3 फीसदी से नीचे आ गया।
तो यही कहा जा सकता है कि अन्ना के फार्मूला पर चलकर ही भाजपा को तमिलनाडु में मलाई मिल सकती है। अन्ना के इस दृढ़ विश्वास से असहमत हुई भाजपा से अब इसीलिए अन्ना ने दूरी बना ली है। तमिलनाडु में उनका राजनैतिक सफर जारी रहेगा। अन्ना फॉर्मूला पर भाजपा आगे बढ़ने का विचार करती है तो एक बार फिर भाजपा संग अन्ना नजर आ सकते हैं… पर यह बात तय है कि द्रविड़ राजनीति से मुक्त हुई तमिलनाडु की सत्ता में बिना अन्ना फॉर्मूला के भगवा की राह आसान नहीं है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *