मध्य प्रदेश सरकार निजी कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए जल्द ‘कोचिंग संस्थान विनियमन अधिनियम’ (कोचिंग इंस्टीट्यूट रेगुलेशन एक्ट) लागू करेगी। नए कानून में कोचिंग संस्थानों पर नियंत्रण के लिए कड़े प्रावधान हैं। हर संस्थान का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
कोई भी कोचिंग सेंटर छात्रों से मनमानी फीस नहीं वसूल सकेगा। उन्हें सुरक्षा और बेहतर मूलभूत सुविधाएं भी देनी होंगी। उच्च शिक्षा विभाग ने कानून का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसे अगले विधानसभा सत्र में चर्चा और मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।बता दें दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने कोचिंग संस्थानों को रेगुलेट करने के लिए केंद्र से कानून बनाने के लिए कहा था। केंद्र सरकार ने मॉडल ड्राफ्ट बनाकर राज्यों को भेजा, लेकिन एमपी सरकार ने नियम ही नहीं बनाए। पिछले साल सुनवाई के बाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को 90 दिन में नियम बनाने के लिए कहा था।

कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही बढ़ेगी
इस कानून का मसौदा बनाने का काम उच्च शिक्षा विभाग को दिया गया है। विभाग के एससीएस अनुपम राजन के मुताबिक, कानून लागू होने पर कोचिंग संस्थान भी निजी स्कूलों, अस्पतालों और कॉलोनाइजर गतिविधियों की तरह नियामक ढांचे में आएंगे। इससे कोचिंग इंडस्ट्री की जवाबदेही बढ़ेगी। फीस और विज्ञापनों में पारदर्शिता आएगी।
छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को कानूनी संरक्षण मिलेगा। छात्रों के हितों की रक्षा, सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने और पारदर्शिता लाने के लिए इन संस्थानों को कानूनी ढांचे में लाना जरूरी हो गया है। राजन ने कहा कि नियम बनाने से पहले कोचिंग संस्थानों के साथ बैठक कर सुझाव मांगे गए थे।
कोचिंग संस्थानों को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए और विद्यार्थियों को सकारात्मक व सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार विद्यार्थी जीवन की चुनौतियों और मानसिक समस्याओं का सामना नहीं कर पाते, जिससे गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं।

प्रस्तावित कानून के मुख्य प्रावधानरजिस्ट्रेशन जरूरी: प्रत्येक कोचिंग सेंटर का रजिस्ट्रेशनअनिवार्य होगा। पहले से संचालित संस्थानों को भी तय समय सीमा में पंजीकरण कराना होगा।शिक्षकों की योग्यताः पढ़ाने वाले ट्यूटर का न्यूनतमस्नातक (Graduate) होना जरूरी है। किसी नैतिक अपराध में दोषी व्यक्ति को शिक्षक नियुक्त नहीं किया जा सकेगा।आयु सीमा: 16 वर्ष से कम आयु के छात्रों का
नामांकन नहीं होगा। छात्र का कम से कम 10वीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है।फीस और रिफंड: कोर्स के दौरान फीस नहीं बढ़ाईजा सकेगी। यदि कोई छात्र पढ़ाई छोड़ता है, तो शेष अवधि की फीस ‘प्रो-राटा’ आधार पर 10 दिनों के भीतर लौटानी होगी।भ्रामक विज्ञापनों पर रोक: ‘100% चयन’ यागारंटीड रैंक’ जैसे दावे अपराध माने जाएंगे। सफल छात्रों की फोटो या नाम उनकी लिखित सहमति के बिना इस्तेमाल नहीं किए जा सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और केंद्र की गाइडलाइन
इस कानून के पीछे न्यायपालिका की भी अहम भूमिका है। नवंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई में कहा था कि वह सीधे कानून नहीं बना सकता और याचिकाकर्ता को सरकार के पास जाने की सलाह दी थी।
2024 में दिल्ली के राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में तीन यूपीएससी अभ्यर्थियों की मौत और कोटा में छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों के बाद अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोचिंग संस्थानों के लिए सुरक्षा के ‘यूनिफॉर्म स्टैंडर्ड’ (एक समान राष्ट्रीय मानक) होने चाहिए।

एमपी में केवल खानापूर्ति की गई
सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए एक मॉडल फ्रेमवर्क जारी किया। इसके आधार पर मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने अप्रैल 2024 में सभी सरकारी और निजी कॉलेजों को केंद्र की गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसका खास असर नहीं दिखा। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को 90 दिनों के भीतर नियम लागू करने का सख्त आदेश दिया।

दो साल में 900 से ज्यादा छात्रों ने की खुदकुशी
इस कानून की आवश्यकता को मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 में पेश आंकड़े और मजबूत करते हैं। कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई के सवाल पर मुख्यमंत्री ने लिखित जवाब में बताया कि 13 दिसंबर 2023 से 20 जनवरी 2026 के बीच राज्य में 987 छात्रों ने सुसाइड किया है।
एनसीआरबी 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, खुदकुशी के मामलों में मप्र देश में तीसरे नंबर पर है। एग्जाम में नाकाम होने पर खुदकुशी के मामलों में प्रदेश दूसरे नंबर पर है। महाराष्ट्र में 377 छात्रों ने खुदकुशी की है, जबकि मप्र में यह आंकड़ा 224 है। ग्वालियर में सबसे ज्यादा छात्रों ने परीक्षा में नाकाम होने के बाद खुदकुशी की है।
