रतलाम में कुत्तों की नसबंदी में बड़ा खेल? 33 हजार का दावा, सर्वे में मिले सिर्फ 2,200; 2.5 करोड़ खर्च पर अफसरों की मिलीभगत के आरोप

मध्य प्रदेश के रतलाम में कुत्तों की नसबंदी के नाम पर करोड़ों रुपए के कथित घोटाले की परतें धीरे-धीरे खुलने लगी हैं. इस पूरे मामले की शुरुआत कांग्रेस पार्षद भावना हितेश बेमाल की शिकायत से हुई, जिसे उन्होंने लोकायुक्त के समक्ष दर्ज कराया था.

कागजों पर 33 हजार कुत्तों की नसबंदी

शिकायत के बाद हुई जांच में सामने आया कि साल 2022 से 2025 तक लगातार चार सालों तक बिना समुचित निगरानी, भौतिक सत्यापन और प्रभावी मॉनिटरिंग के निजी फर्मों को भुगतान किया जाता रहा. साल 2022 से 2024 के बीच किए गए 1 करोड़ 73,784 रुपये के भुगतान में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं.

रिपोर्ट में नगर निगम के नोडल अधिकारी सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है.जांच में यह भी सामने आया कि दो निजी फर्मों द्वारा 114 कुत्तों की नसबंदी का दावा किया गया, जबकि भुगतान की दरों और वास्तविक खर्च के बीच बड़ा अंतर पाया गया.

लोकायुक्त को आशंका है कि अधिकारियों और फर्मों के बीच आपसी मिलीभगत के चलते केवल कागजों के आधार पर राशि जारी की गई नगर निगम ने 2022 से मई 2025 तक कुल 33,630 कुत्तों की नसबंदी का दावा करते हुए करीब 2 करोड़ 29 लाख रुपये का भुगतान किया. लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर नसबंदी के बावजूद शहर में न तो आवारा कुत्तों की संख्या घटी और न ही डॉग बाइट की घटनाओं में कोई खास कमी आई. यहीं से पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं.

एक और जानकारी सामने आई. चार बार कराई गई नसबंदी में तीन बार हर कुत्ते पर 786 रुपये और एक बार 636 रुपये का भुगतान किया गया, जबकि जानकारी के मुताबिक केवल एक सामान्य नसबंदी किट की कीमत लगभग 845 रुपये होती है.

सरकारी गाइडलाइन के मुताबिक पूरे प्रोसेस जैसे कुत्तों को पकड़ना, सर्जरी, दवाइयां, देखभाल और डॉक्टर की फीस का खर्च करीब 1,600 रुपये प्रति कुत्ता आता है. ऐसे में इतनी कम राशि में नसबंदी कैसे कर दी गई? यह जांच का बड़ा सवाल बन गया है.

इस पर रतलाम महापौर प्रहलाद पटेल ने कहा, ”अभी कल-परसों ही मुझे जानकारी मिली है कि कांग्रेस के एक पार्षद ने लोकायुक्त में इसकी शिकायत की है. लोकायुक्त में मामला गया है तो इसकी जांच होगी और अगर कोई भी अधिकारी दोषी पाया जाएगा तो हम सख्त कार्रवाई करेंगे.”

क्या लगता है? जो शिकायत हुई और आरटीआई के तहत जानकारी निकली, उसमें 33,000 से अधिक कुत्तों का नसबंदी का दावा किया गया था, लेकिन जब नगर निगम ने सर्वे कराया तो केवल 2,200 कुत्ते निकले.आखिर 31,000 कुत्ते कहां गए?

इस पर महापौर ने कहा, ”देखिए, यह आपके द्वारा मुझे जानकारी मिल रही है.मैं इसकी जांच करवाता हूं. तब तक मैं खुद जांच नहीं करा लूं, इसके आधार पर कोई निर्णय नहीं ले सकता. मैं पूरी जांच कराने के बाद आपसे बात कर सकता हूं.”

इधर शिकायतकर्ता कांग्रेस पार्षद भावना हितेश बेमाल का कहना है कि शहर में बढ़ते डॉग बाइट और कुत्तों की संख्या को लेकर वे लगातार अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायत कर रही थीं.

निगम परिषद में भी तथ्यों के साथ मामला उठाया गया था, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने लोकायुक्त का दरवाजा खटखटाया.संख्या बढ़ती चली जा रही है.

हर गली, हर क्षेत्र में इतने कुत्ते हो गए हैं कि कोई भी नागरिक सुरक्षित नहीं है. आए दिन डॉग बाइट की घटनाएं बढ़ती चली जा रही हैं.रोज सिविल अस्पताल में 20 से 30 मामूली घटनाएं आ रही हैं.

जब हमने जानना चाहा कि सरकार द्वारा बधियाकरण का कार्य किया जा रहा है, लेकिन उसका असर सड़कों पर नहीं दिख रहा है. जब हमने रतलाम नगर निगम की स्थिति जाननी चाही, तो परिषद में हमने प्रश्न लगवाया, जिसमें हमें जवाब मिला कि वर्ष 2022 से 2025 तक अब तक कितने कुत्तों का बधियाकरण हुआ है और उसमें कुल कितनी राशि खर्च की गई है.

लेकिन जब जवाब मिला तो आंकड़े चौंकाने वाले थे- वर्ष 2022 से 2025 तक लगभग 33,000 से अधिक कुत्तों का बधियाकरण हुआ है और उसमें 2 करोड़ 58 लाख 80 हजार रुपये से अधिक का भुगतान हुआ है.

यह राशि जब हमें मिली तो इसमें चौंकाने वाले तथ्य हैं.जो दर निविदा के माध्यम से स्वीकृत की गई है, वह जीव जंतु कल्याण बोर्ड, नई दिल्ली (शासन की संस्था) के अनुसार एक कुत्ते के बधियाकरण में 1,650 रुपये का खर्च आता है. लेकिन इन्होंने मात्र 636 रुपये में बधियाकरण कर दिया.636 रुपये में बधियाकरण होना संभव ही नहीं है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *