जानिए भारत के ऐसे शहर के बारे में जहाँ आधी से ज़्यादा आबादी है कोरोना से ग्रस्त

कोरोना प्रभावित महाराष्ट्र के पुणे में लोगों में संक्रमण चेक करने के लिए सीरो सर्वे कराया गया। इस सर्वे में पुणे के 51.5 प्रतिशत निवासियों के शरीर में एंटीबॉडी पाया गया। नतीजे चौंकाने वाले हैं क्योंकि शरीर में Covid-19 एंटीबॉडी होने का मतलब है कि शख्स संक्रमित हो चुका है। इसका मतलब यह कि शहर के आधे से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं।

पुणे में महामारी और सीरम सर्विलांस कोविड-19 की स्टडी नगर निगम के तहत पांच प्रभावित इलाकों से 1644 सैंपल लिए गए थे। इन इलाकों में पॉजिटिविटी की दर 36.1 प्रतिशत से 65.4 प्रतिशत के बीच रही। भवानी पेठ वॉर्ड के तहत आने वाले लोहियानगर-कासेवाडी इलाकों में कोरोना संक्रमण सर्वाधिक रहा।

सर्वे टीम का हिस्सा सीनियर रिसर्चर अर्णब घोष के अनुसार जांच में इन प्रभाग में कोरोना संक्रमण सबसे ज्यादा पाया गया। यह स्टडी पुणे नगर निगम और भारतीय विज्ञान शिक्षा एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट (IISER) ने मिलकर की। शरीर में SARS-CoV-2 के मुकाबले IgG एंटीबॉडी की मौजूदगी का पता लगा।

एक जुलाई तक मिले कोरोना पॉजिटिव मामलों को बेसलाइन मानकर 20 जुलाई से 5 अगस्त के बीच यह सर्वे किया गया। एंटीबॉडी की मौजदूगी हर तरह की आवासीय सुविधा वालों में पाई गई। बंगले में रहने वाले 49 प्रतिशत, आबादी वाली झुग्गियों में रहने वाले 56 से 62 प्रतिशत, अपार्टमेंट में रहने वाले 33 प्रतिशत लोगों में सीरोपॉजिटिविटी रजिस्टर की गई।

52.8 प्रतिशत पुरुषों में मिली एंटीबॉडी
पुणे के डिविजनल कमिश्नर सौरभ राव ने बताया कि शहर में दो और सर्वे किए जाएंगे जिनका सैंपल साइज बड़ा होगा। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) के एसोसिएट प्रफेसर डॉ. अर्नब घोष ने कहा कि सर्वे में 52.8 पर्सेंट पुरुष और 50.1 पर्सेंट महिलाओं में एंटीबॉडी मिली है। डॉ. अर्नब घोष ने कहा, ”हम सार्स-कोव-2 के खिलाफ आईजीआर एंटीबॉडी का पता लगाते हैं। यह पूर्व में संक्रमण की ओर इशारा करता है, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि इम्युनिटी संक्रमण के बाद ही डेवलप हुआ हो।

झोपड़ी में रहने वालों में रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा
सर्वे में यह भी पता चला है कि झोपड़पट्टियों में रहने वाले लोगों में यानी गरीबी या मजदूर वर्ग में अपार्टमेंट और बंगलों में रहने वाले लोगों से अधिक सीरो पॉजिटिविटी है यानी इनमें रोग से लड़ने की ज्यादा क्षमता है। सर्वे में यह भी पता चला है कि सार्वजनिक शौचालय इस्तेमाल करने वाले लोगों के अधिक सैंपल पॉजिटिव मिले हैं। सार्वजनिक शौचालय इस्तेमाल करने वाले (62.3%) सैंपल सीरो पॉजिटिव मिले हैं, जबकि निजी शौचालय वाले (45.3%) लोगों में एंटीबॉडी मिली है।

सीरो सर्वे का यह है मकसद
सीरो सर्वे के जरिए यह पता लगाया जाता है कि किसी इलाके में कोरोनावायरस का संक्रमण कितना फैला है और पूरी आबादी का कितना बड़ा हिस्सा कोरोना से संक्रमित है और कितने लोगों के अंदर इस वायरस से लड़ने के लिए इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बन चुकी है और कितने शरीर में एंटीबॉडी पैदा हो चुकी है।

रिपोर्ट तैयार होने की ये है प्रक्रिया
सीरो सर्वे करने वाली टीम पहले लोगों के ब्लड सैंपल एकत्रित करती है। फिर 30 मिनट में आने वाले सैंपल के परिणाम से पता किया जाता है कि जिस व्यक्ति का ब्लड सैंपल लिया गया है उसके अंदर वायरस से लड़ने के लिए इम्युनिटी विकसित हुई है या नहीं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित होता है, लेकिन उसमें लक्षण नहीं दिखते। तो ये माना जाता है कि ऐसे लोगों में 5-7 दिन के अंदर अपने आप एंटीबॉडी बनना शुरू हो गई होगी।

पुणे में राज्य के सबसे ज्यादा एक्टिव पेशेंट
राज्य में पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 8493 नए मामले सामने आए हैं। इसके अलावा राज्य के अलग-अलग जिले में कोरोना से 228 लोगों की मौत भी हुई है। राज्य में कुल मृतकों की संख्या 20 हजार 265 तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में अभी 1,55,268 केस एक्टिव हैं, जिनमें सर्वाधिक मामले पुणे शहर में हैं। यहां कुल 39424 मामले एक्टिव हैं। वहीं ठाणे में 19818 और मुंबई में 17704 केस एक्टि

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *