
थाईलैंड से लौटा एक भारतीय शख्स जैसे ही मुंबई एयरपोर्ट पर पहुंचा, कस्टम अफसरों ने उसे पकड़ लिया। जब उसके बैग की तलाशी ली, तो उसमें 47 जहरीले सांप और 5 दुर्लभ कछुए मिले। ये ऐसे सांप थे, जो ब्लैक मार्केट में लाखों में बिकते हैं। अगर ये काट लें तो भारत में इनका एंटी-वेनम भी नहीं है।
आखिर ये सांप कौन से हैं, भारत में ऐसे जहरीले सांपों की तस्करी क्यों हो रही है और इन सांपों का मार्केट कैसे चलता है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: मुंबई एयरपोर्ट पर जहरीले सांपों से भरे बैग के बारे में कैसे पता चला?
जवाब: 31 मई को रात 9.55 बजे थाईलैंड के बैंकॉक से थाई एयरवेज की फ्लाइट TG317 मुंबई के छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड की। टर्मिनल-2 पर यात्रियों ने उतरना शुरू किया। इसी दौरान कस्टम ऑफिसर्स को खुफिया जानकारी मिली कि एक भारतीय यात्री के पास संदिग्ध बैग है। इसके बाद उस यात्री को पकड़ लिया गया।
पूछताछ करने पर वह यात्री घबरा गया। तभी बैग की चेकिंग की गई, जिसमें दुर्लभ प्रजाति के 5 कछुए और 47 बेहद जहरीले सांप मिले। इसमें एक सांप मरा हुआ था।
1 जून को मुंबई कस्टम्स डिपार्टमेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट शेयर कर सांप पकड़ने की जानकारी दी। पुलिस ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 और कस्टम एक्ट 1962 के तहत यात्री को गिरफ्तार किया है। हालांकि अभी उसकी पहचान नहीं हुई है। वहीं वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो यानी WCCB ने जब्त सापों और कछुओं को उनके मूल देश में भेजने का आदेश दिया है।
On 01.06.2025, officers at CSMIA seized 3 Spider-Tailed Horned Vipers & 5 Asian Leaf Turtles (CITES Appendix-II), along with 44 Indonesian Pit Vipers, concealed in checked-in baggage. An Indian national arriving from Thailand was arrested. pic.twitter.com/C07R2Y58ZX
— Mumbai Customs-III (@mumbaicus3) June 1, 2025
सवाल-2: बैग में किस तरह के सांप मिले, यह कितने खतरनाक हैं?
जवाब: यात्री के बैग में 5 एशियाई लीफ टर्टल यानी कछुए के अलावा 3 स्पाइडर- टेल्ड हॉर्नड वाइपर और 44 इंडोनेशियाई पिट वाइपर मिले।
हालांकि इन दोनों प्रजातियों के सांपों की ह्यूमन बाइट हिस्ट्री नहीं है यानी इन सांपों ने आज तक किसी इंसान को नहीं काटा। इस कारण यह पता नहीं चल पाया कि इनके काटने से किसी इंसान की मौत कितनी देर में हो सकती है। आमतौर पर एक किंग कोबरा के काटने से 30 मिनट से 6 घंटे के अंदर मौत हो जाती है

इनके अलावा 5 एशियाई लीफ टर्टल भी मिले, जो बेहद दुर्लभ हैं। यह कछुए दक्षिण-पूर्व एशिया में पाए जाते हैं। पत्तों के जैसे रंग और पैटर्न की वजह से इसे लीफ टर्टल कहा जाता है। यह भी CITES के अपेंडिक्स- II और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची- IV में लिस्टेड है।
यह कछुआ जहरीला नहीं है और इंसानों को इससे खतरा भी नहीं है, लेकिन दुर्लभता के कारण इसकी तस्करी बायोडायवर्सिटी के लिए खतरा है।
सवाल-3: जब इन सांपों की ह्यूमन बाइट हिस्ट्री नहीं, तो फिर तस्करी क्यों की जा रही थी?
जवाब: सांपों की तस्करी 4 बड़ी वजहों से की जाती है…
1. कम जोखिम में ज्यादा मुनाफा: ड्रग्स या हथियारों की तस्करी की तुलना में वन्यजीवों की तस्करी कम जोखिम वाली मानी जाती है, क्योंकि इसमें सजा का प्रावधान कम होता है। कई देशों में इसे गंभीर अपराध भी नहीं माना जाता है। थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों में तस्करी पर जुर्माना कम है।
इंटरनेशनल ब्लैक मार्केट में स्पाइडर-टेल्ड हॉर्न्ड वाइपर की कीमत 4 से 12 लाख रुपए तक हो सकती है। वहीं, इंडोनेशियाई पिट वाइपर की कीमत 40 हजार से 2 लाख रुपए तक हो सकती है। यानी कम जोखिम में ज्यादा मुनाफा।
2. अवैध व्यापार से संगठित अपराध में मदद: ‘द फार्मर’ मैगजीन के मुताबिक, सांपों की तस्करी संगठित अपराध नेटवर्क का हिस्सा है। यानी सांपों की तस्करी से हथियार खरीदने, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अवैध कामों के लिए पैसा जुटाया जाता है। ऑस्ट्रेलिया में क्रिमिनल सिंडिकेट्स देशी सांपों और पक्षियों को एशिया के ब्लैक मार्केट में बेचते हैं और इन पैसों से हथियार खरीदते हैं।
इन सांपों को दक्षिण-पूर्व एशिया, साउथ अफ्रीका और मिडिल ईस्ट से अवैध रूप से पकड़ा जाता है। फिर इन्हें यूरोप, अमेरिका और एशिया के बाजारों में भेजा जाता है, जहां इनकी मांग ज्यादा है।
3. दुर्लभ सांपों को पालतू जानवर बनाना: कई शौकीन लोग दुर्लभ और जहरीले सांपों को खरीदकर रखना पसंद करते हैं। सांप जितना रेयर होगा, उसकी कीमत उतनी ज्यादा होगी। सांपों की कीमत उनकी प्रजाति, जहर और दुर्लभता के हिसाब से अलग-अलग होती है।
ब्लैक मार्केट में रेड सैंड बोआ सांप 2 करोड़ रुपए से 25 करोड़ रुपए तक, दो सिर वाले रसेल वाइपर 1 करोड़ रुपए तक और दुर्लभ तक्षक सांप 9 करोड़ रुपए तक में बिकते हैं। ऐसे सांपों को अमीर लोग और इनके कलेक्टर्स ज्यादा पसंद करते हैं।
4. सांप की स्किन से लग्जरी आइटम्स बनाना: सांप की स्किन से हैंडबैग, जूते और बेल्ट भी बनाए जाते हैं। सांप की स्किन का रंग अनोखा होता है। इनसे बनीं चीजें लग्जरी कैटेगरी में शुमार हैं और मार्केट में बहुत महंगी बिकती हैं।
2023 में पाइथन स्किन का एक बैग करीब 3.7 लाख रुपए में बिका था। मुंबई में पकड़े गए इंडोनेशियाई पिट वाइपर की चटकीली हरी खाल फैशन इंडस्ट्री में आकर्षक मानी जाती है।
इसके अलावा सांपों की तस्करी जहर निकालने के लिए भी होती है। सांपों के जहर से दवाइयां और शराब बनती हैं। इसके अलावा सांपों के जहर से नशा भी किया जाता है।
सवाल-4: नशे के लिए सांपों के जहर का इस्तेमाल क्यों और कैसे होता है?
जवाब: एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सांपों के जहर का इस्तेमाल वे लोग करते हैं, जो रेगुलर नशीले पदार्थ जैसे मॉर्फीन और कोकीन से ऊब जाते हैं। दो साल पहले यूट्यूबर एल्विश यादव को स्नेक बाइट यानी सांप से कटवाकर नशा करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
जर्नल ऑप साइकोलॉजिक मेडिसिन के मुताबिक, सांप के जहर का थोड़ा अमाउंट लिया जाए तो इसका साइकोएक्टिव इफेक्ट होता है। यानी ये इंसान के नर्व सिस्टम को धीमा कर देता है। कुछ स्टडी में ये भी सामने आ चुका है कि कोबरा के जहर में मॉर्फीन ड्रग जैसा नशा होता है।
सांप का जहर जब शरीर में जाता है तब खून में एक्टिव मेटाबोलाइट्स यानी खाना पचने के बाद बनने वाला पदार्थ रिलीज होता है। इसमें Serotonin, Bradykinin, Peptides, Prostaglandins और दूसरे इसी तरह के पदार्थ शामिल हैं। इनसे इंसानी शरीर में नींद आने और शांत कर देने वाला रिएक्शन होता है।
सांप के जहर से नशा करने के लिए सांप से डसवाया जाता है, जिसके अलग-अलग तरीके होते हैं। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी NCB के अफसरों के मुताबिक, सांप के जहर से बने स्नेकबाइट पाउडर को ड्रिंक्स के साथ मिलाकर पिया जाता है। इस पाउडर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल कोबरा के जहर का होता है। इसका नशा कुछ घंटे से लेकर पूरे दिन तक हो सकता है, जो जहर की मात्रा पर डिपेंड करता है।

सवाल-5: कैसे सांपों के जहर से दवाएं और शराब बनती हैं?
जवाब: सांपों के जहर में प्रोटीन, एंजाइम, पेप्टाइड्स और अन्य बायोएक्टिव केमिकल्स होते हैं। इस वजह से इसे दवाएं बनाने और शराब बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। भारत में हैदराबाद के हाफकिन इंस्टीट्यूट या इरुला स्नेक कैचर्स को-ऑपरेटिव में कोबरा, क्रेट, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड का जहर निकाला जाता है।
सांप के जहर से दवा बनाने के लिए इसे सुखाकर पाउडर बनाया जाता है, फिर इसमें से प्रोटीन, एंजाइम और पेप्टाइड्स को अलग किया जाता है। लैब में जांच के बाद इन एलीमेंट्स से एंटी-वेनम, हाई ब्लडप्रेशर, कैंसर, पेनकिलर्स और खून को पतला करने की दवाएं बनती हैं।
वहीं, शराब बनाने के लिए जिंदा या मरे हुए सांप को एक बोतल में रखकर उसमें चावल, गेंहू या फिर अन्य अनाज की शराब को डाला जाता है। फिर किण्वन यानी फर्मेंटेशन के बाद इससे शराब बनती है।

सवाल-6: भारत समेत दुनियाभर में सांपों के जहर का बाजार कैसे चलता है?
जवाब: दुनियाभर में सांपों के जहर का कारोबार वैध और अवैध दोनों रूप से चलता है। कानूनी रूप से सांप के जहर का इस्तेमाल दवाएं बनाने में होता है। चीन में तो सांपों की खेती और कारोबार किया जाता है। यहां के जिसिकियाओ गांव में इन्हें पाला जाता है। बाद में इनके जहर को फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री को बेच दिया जाता है।
कोबरा सांप का जहर वैध रूप से 5,000 से 25,000 रुपए तक में बिकता है। किंग कोबरा के एक गैलन यानी करीब 3.7 लीटर जहर की कीमत 1.3 करोड़ रुपए तक होती है। अगर इस जहर की तस्करी की जाए, तो कीमत कई गुना तक बढ़ जाती है।
फरवरी 2021 में बांग्लादेश से तस्करी कर भारत लाया जा रहा सांप का जहर पकड़ा गया। यह करीब 4 lbs यानी 1,814 ग्राम जहर था। डिवीजन फॉरेस्ट ऑफिसर के मुताबिक, पकड़ा गया जहर करीब 120 डॉलर यानी 10,000 रुपए प्रति ग्राम में बिकता है। यानी इस जहर की कीमत 1.81 करोड़ रुपए होनी चाहिए, लेकिन ब्लैक मार्केट में यह करीब 24 करोड़ रुपए तक में बिक सकता है।
जानवर बेचनी वाली कंपनी अंडरग्राउंड रेपटाइल्स की वेबसाइट पर इंडोनेशियाई पेट वाइपर की कीमत 500 डॉलर यानी करीब 43,000 रुपए है। यानी मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़े गए ऐसे 43 सांपों की कीमत करीब 18.5 लाख रुपए होनी चाहिए। ब्लैक मार्केट में इनकी कीमत भी कई गुना बढ़ जाती है।

सवाल-7: देश में सांप की तस्करी का क्या कानून है और भारतीय आदमी के साथ आगे क्या होगा?
जवाब: भारत में सांपों की तस्करी एक गंभीर अपराध है और देश में दो कानूनों के तहत सजा मिलती है…
1. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972
यह कानून वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके अवैध व्यापार को रोकने के लिए बनाया गया।
इसमें सांपों की अलग-अलग प्रजातियों को तीन शेड्यूल्ड यानी सूची में रखा गया।
इसके तहत सापों की तस्करी के लिए 3 से 7 साल तक गैर-जमानती सजा और 25 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है।
2. कस्टम्स एक्ट 1962
यह कानून भारत में इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट को रेगुलेट करता है।
भारत में जिन जानवरों का इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट बैन है, वह कस्टम एक्ट के तहत भी प्रतिबंधित होता है।
इसके सेक्शन 104 के तहत सांप के तस्कर को गिरफ्तार और तस्करी किए सांप को जब्त किया जा सकता है।
इसमें 2 से 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
सवाल-8: क्या देश में पहले भी सांपों की तस्करी के मामले सामने आ चुके हैं?
जवाब: इससे पहले भी पुलिस और कस्टम विभाग कई सांप तस्करों को पकड़ चुके हैं…
केस 1: बेंगलुरु एयरपोर्ट पर थाईलैंड से लाए 70 सांप सितंबर 2023 में बेंगलुरु एयरपोर्ट पर थाईलैंड से आए एक भारतीय को 70 सांपों की तस्करी करते हुए पकड़ा गया। इनमें से 20 सांप जहरीले कोबरा के बच्चे थे। इसके अलावा तस्कर बंदर के 6 बच्चे भी लेकर आ रहा था।
केस 2: बैंकॉक से लाए जा रहे 11 जिंदा सांप मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़ाए 23 दिसंबर 2023 को मुंबई एयरपोर्ट पर बैंकॉक से आ रहे पैसेंजर के पास 11 जिंदा सांप मिले थे। इसमें से 9 पॉल पायथन और 2 कॉर्न सांप थे, जिन्हें बिस्कुट और केक के पैकेट में छिपाया गया था।
केस 3: पुलिस ने व्यापारी बनकर सांप तस्करों को पकड़ा अक्टूबर 2024 में मुंबई पुलिस ने रेड सैंड बोआ स्नेक की तस्करी करने वाले 4 लोगों को पकड़ा था। इन लोगों के पास जो सांप था, उसकी कीमत करीब 30 लाख रुपए थी, लेकिन तस्कर इसके 5 करोड़ रुपए मांग रहे थे।