एंकर – इंदौर में साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला और अनोखा मामला सामने आया है। यहां ठगों ने कथित तौर पर AI तकनीक का इस्तेमाल कर वीडियो कॉल के जरिए एक नाबालिग बच्चे की फर्जी किडनैपिंग दिखाकर परिवार से एक लाख रुपये से ज्यादा की रकम ऐंठ ली। पीड़ित महिला पेशे से अधिवक्ता हैं। वे अपने पति के साथ शिकायत लेकर इंदौर क्राइम ब्रांच पहुंचीं।
वीओ – वही महिला ने बताया कि कुछ दिन पहले उनका 16 वर्षीय बेटा बिना बताए घर से चला गया था। परिवार ने उसे हर जगह तलाशा, लेकिन पता नहीं चला। इसके बाद परिजनों ने सोशल मीडिया पर बच्चे की फोटो और गुमशुदगी की जानकारी पोस्ट की। इसी दौरान परिवार के मोबाइल पर एक वीडियो कॉल आया।
कॉल में उनके बेटे को दिखाया गया और उसके गले पर चाकू जैसा हथियार लगाकर धमकाया गया। कॉल करने वाले ने कहा कि एक बारकोड भेजा जा रहा है, उस पर तुरंत पैसे ट्रांसफर करो, वरना बच्चे को नुकसान पहुंचा दिया जाएगा। बेटे की जान के डर से घबराए माता-पिता ने
अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 1 लाख 2 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में परिवार को जानकारी मिली कि उनका बेटा दोस्तों के साथ राजस्थान के मंडफिया स्थित सांवरिया सेठ मंदिर गया हुआ था और उसके साथ किसी तरह की कोई घटना नहीं हुई थी।
बच्चे ने खुद भी बताया कि उसके अपहरण जैसी कोई बात नहीं हुई। इस मामले में राजेश दंडोतिया, डीसीपी क्राइम ब्रांच, ने बताया कि यह प्रदेश या देश का संभवतः पहला मामला हो सकता है, जिसमें AI की मदद से वीडियो कॉल पर फर्जी किडनैपिंग जैसा दृश्य तैयार कर ठगी की गई हो। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। यह घटना साइबर अपराध के
नए और खतरनाक ट्रेंड की ओर इशारा करती है, जहां तकनीक का दुरुपयोग कर भावनात्मक दबाव बनाकर ठगी की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है, कि ऐसे मामलों में किसी भी वीडियो कॉल या अन्य तरीके के कॉल को वेरिफाई करें और घबराने के बजाय तुरंत संबंधित थाने या क्राइम ब्रांच से संपर्क करे….
बाइट – राजेश दंडोतिया, एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच इंदौर