2022 में महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में करीब दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में सिंहस्थ 2028 के लिए मध्य प्रदेश सरकार, उज्जैन को एक नए धार्मिक पर्यटन मॉडल के रूप में विकसित करने में जुट गई है। इसी क्रम में अब सरकार यहां ‘शनि लोक’ बनाने जा रही है।
शनि लोक की डीपीआर बन चुकी है। टेंडर होने के बाद जल्द ही काम शुरू होगा।
पहली बार देखिए कि करीब 110 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला शनि लोक कैसा होगा और श्रद्धालुओं को यहां क्या सुविधाएं मिलेंगी

त्रिवेणी में शनि मंदिर पर बनेगा शनि लोक
उज्जैन-इंदौर रोड पर त्रिवेणी क्षेत्र में शिप्रा नदी के तट पर बने शनि मंदिर को इस परियोजना का केंद्र बनाया जाएगा। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना सम्राट विक्रमादित्य ने की थी। यह देश का पहला ऐसा मंदिर माना जाता है, जहां भगवान शनि, शिव स्वरूप में विराजमान हैं।
हर शनिश्चरी अमावस्या पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान कर भगवान शनि के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।
तस्वीरों में देखिए शनि लोक का मॉडल

डीपीआर तैयार, महाकाल लोक की तर्ज पर बनेगा उज्जैन में शनि लोक के रूप में दूसरा बड़ा धार्मिक कॉरिडोर कुंभ से पहले आकार ले लेगा। इसे महाकाल लोक की तर्ज पर ही विकसित किया जाएगा। इसकी घोषणा 8 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की थी।
शनि लोक की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बन चुकी है। टेंडर होने के बाद जल्द ही काम शुरू होगा। सरकार की ओर से पूरी कोशिश है कि सिंहस्थ के पहले शनि लोक तैयार हो जाए।

सभी नौ ग्रहों को समर्पित मंदिर उज्जैन में शिप्रा किनारे बना शनि मंदिर करीब 21 हजार 100 वर्गमीटर इलाके में फैला है। इसे नवग्रह मंदिर के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह मंदिर सभी नौ ग्रहों- सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु को समर्पित है।
यहां साढ़े साती और ढैया से मुक्ति के लिए शिव रूपी शनि की विशेष पूजा कराई जाती है। शनि दोषों की शांति के लिए तेल, लोहा, तिल आदि चढ़ाए जाते हैं। भक्त शनिश्चरी अमावस्या पर पुराने कपड़े और जूते-चप्पल मंदिर के बाहर ही छोड़कर चले जाते हैं।


ग्वालियर के ऐंती पर्वत पर भी बनेगा शनि लोक उज्जैन के साथ ही ग्वालियर में भी शनि लोक बनाया जाएगा। मुरैना की सीमा पर बन रहे शनि लोक में ऐंती पर्वत पर सप्त ऋषियों के अलावा भगवान श्रीराम की विशालकाय प्रतिमा के अलावा 18 मूर्तियां लगेंगी। फिलहाल यहां मूर्तियां बनाने का काम चल रहा है। हालांकि, ग्वालियर में शनि लोक को लेकर प्रदेश सरकार ने कोई घोषणा नहीं की है।
ऐंती पर्वत पर शनि भगवान की प्रतिमा की स्थापना सम्राट विक्रमादित्य ने ही कराई थी। यहीं हनुमान प्रतिमा भी स्थापित कराई गई थी। इस मंदिर का जीर्णोद्धार विक्रम संवत 1806 में तत्कालीन महाराज सिंधिया के मामा दौलत राव सिंधिया ने कराया था। ये मंदिर मध्य प्रदेश सरकार की संपत्ति होकर औकाफ के अधीन है। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष जिला कलेक्टर हैं।

ग्वालियर में भगवान श्रीराम की मूर्ति को आकार देता मूर्तिकार