मायावती ने लगाए आरोप

लोकसभा चुनाव 2019 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करने वाली बहुजन समाज पार्टी ने अब उससे किनारा कर लिया है। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने रविवार को समाजवादी पार्टी पर बड़ा हमला बोला है।

उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले जातिवाद और इनमें भी ब्राह्मणों को वोट की खातिर लुभाने को लेकर सियासत शुरू हो गई है। सपा के बाद अब बहुजन समाज पार्टी ने ब्राह्मण कार्ड खेल दिया है। बसपा मुखिया ने समाजवादी पार्टी की ब्राह्मणवाद की सियासत पर हमला बोला है। मायावती ने कहा कि किसी भी महापुरुष को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए, वह किसी की जागीर नहीं होते हैं। लोग अपने कर्म से महापुरुष का दर्जा पाते हैं। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा उन्हेंं अपने कार्यकाल में ही परशुराम की मूॢत लगवा लेनी चाहिए थी, लेकिन चुनाव आने से पहले समाजवादी पार्टी ब्राह्मण वोटों के खातिर मूॢत लगाने की बात कह रही है, जिससे पता चलता है कि समाजवादी पार्टी की हालत प्रदेश में कितनी खराब है।

परशुराम की उनसे भी बड़ी प्रतिमा लगाएंगे : मायावती

समाजवादी पार्टी के ब्राह्मण समाज की आस्था के प्रतीक परशुराम की प्रतिमा लगाने की तैयारी के बीच में बसपा मुखिया ने कहा कि हम तो परशुराम की उनसे भी बड़ी प्रतिमा लगाएंगे। मायावती ने ऐलान किया कि उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी करने पर बसपा भगवान परशुराम के नाम पर अस्पताल व साधु-संतों के ठहरने के लिए स्थल बनवाएगी। मायावती ने कहा कि ब्राह्मण समाज को बसपा पर पूरा भरोसा है, जैसा कि हमने उन्हेंं उचित प्रतिनिधित्व दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी सिर्फ समाजवादी पार्टी की तरह बात नहीं करती है, बल्कि करके दिखाती है। हमारी पार्टी हर समाज, जाति, धर्म के संतों, महापुरषों को पूरा सम्मान देती है। उन्होंने सपा पर हमला बोलते हुए कहा कि बसपा सरकार ने महान संतों के नाम पर कई जनहित योजनाएं शुरू की थीं और जिलों के नाम रखे थे, लेकिन जातिवादी मानसिकता और द्वेष की भावना से सपा ने इन्हेंं बदल दिया। 2022 में बसपा सरकार बनने पर इन्हेंं फिर बहाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चार बार बनीं बसपा की सरकार में सभी वर्गों के महान संतों के नाम पर अनेक जनहित योजनाएं शुरू की गई थीं जिसे बाद में आई समाजवादी पार्टी की सरकार ने अपनी जातिवादी मानसिकता व द्वेष की भावना के चलते बदल दिया।
राम मंदिर को लेकर सियासत न करने की नसीहत देते हुए मायावती ने कहा कि राम लोगों की आस्था से जुड़ा मुद्दा है, इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. लेकिन 5 अगस्त को राम मंदिर भूमि पूजन को लेकर उन्होंने कहा कि अच्छा होता अगर पीएम मोदी अपने साथ दलित समाज से आने वाले देश के राष्ट्रपति को साथ लेकर अयोध्या जाते.

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