‘कुछ दिन पहले मैंने इंस्टाग्राम पर DU के एक प्रोफेसर के खिलाफ वीडियो डाली थी। आज एचओडी ने मुझे अपने रूम में बुलाया और कहा कि प्रोफेसर के खिलाफ जो रील बनाई हैं, उन्हें डिलीट कर दो। तुम इस यूनिवर्सिटी का बहुत छोटा हिस्सा हो। हम तुम्हारा बहुत कुछ बिगाड़ सकते हैं।’
यह बात कहते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी में अफ्रीकन स्टडीज, एमए फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट चित्रा सिंह ने एक वीडियो 12 दिसंबर को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रोफेसर स्टूडेंट्स को कमरे में बुलाते हैं और ज्यादा समय बिताने पर अच्छे नंबर दिए जाते हैं। 14 दिसंबर तक यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। आरोप गंभीर थे। नाम दिल्ली यूनिवर्सिटी का था और सवाल सीधे प्रोफेसर और एचओडी पर थे।
यूनिवर्सिटी ने चित्रा के आरोपों की जांच के लिए 3 मेंबर की कमेटी बनाई। इस टीम ने रिपोर्ट मैनेजमेंट को दे दी है। इस रिपोर्ट से चित्रा सिंह ही सवालों के घेरे में है।

इसी वीडियो में चित्रा ने एचओडी और प्रोफेसर पर आरोप लगाए थे।
ये वीडियो वायरल हो गया था।
जांच करने वाले प्रोफेसर बोले- स्टूडेंट ने किसी से शिकायत नहीं की
जांच टीम में शामिल रहे प्रो. मनोज सिंह बताते हैं, ‘अगर स्टूडेंट को सताया जा रहा था, तो वीडियो बनाने से पहले कहीं न कहीं तो शिकायत दर्ज कराई होगी। हमने उन सारे चैनल को खंगालना शुरू किया। चित्रा सिंह की शिकायत किसी के पास नहीं आई।’
‘उसके साथ पढ़ने वाले किसी स्टूडेंट ने भी नहीं बताया कि चित्रा परेशान थी। एडमिट कार्ड नहीं मिला, बेटी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, तो पेरेंट्स भी एक्टिव होते। उन्होंने भी यूनिवर्सिटी में कॉन्टैक्ट नहीं किया।’
रिपोर्ट की बड़ी बातें
चित्रा पूरे सेमेस्टर क्लास नहीं आई, अटेंडेंस में 1 नंबर मिला
प्रोफेसर मनोज सिंह बताते हैं, ‘हमने डिपार्टमेंट के प्रोफेसर्स और चित्रा के साथ पढ़ने वाले स्टूडेंट्स से बात की। फैक्ट्स पर रिपोर्ट बनाई। उसके बिहेवियर और स्टडी को लेकर कई इश्यू थे। तीन इश्यू मौजूदा मुद्दे से जुड़ते हैं।
1. पूरे सेमेस्टर में चित्रा ने सिर्फ 2 क्लास अटेंड कीं।
2. सेमेस्टर में न आने से इंटरनल मार्क्स पर असर पड़ा। डिपार्टमेंट के एक प्रोफेसर ने बताया कि उसे 5 में से एक नंबर मिला था। ये उसकी अटेंडेंस और पढ़ाई को देखते हुए दिए गए थे।
3. चित्रा ने जो आरोप सोशल मीडिया पर लगाए, उस पर वो कभी डीयू मैनेजमेंट, डीन, वीसी, प्रोक्टर के पास नहीं गई। उसके नाम से कोई शिकायत या अपॉइंटमेंट है ही नहीं।
4. साथ पढ़ने वाले स्टूडेंट ने बताया कि चित्रा सोशल मीडिया स्टार बनना चाहती थी। उसे फेमस होने का भूत सवार था।
5. उसने किसी साथी स्टूडेंट्स से भी कभी इस तरह की शिकायत शेयर नहीं की।
6. स्टूडेंट ने बताया कि इंस्टाग्राम पर 2-3 दिन में उसके फॉलोअर 20 हजार से बढ़कर 50 हजार हो गए। प्रोफेसर पर आरोप लगाना फेमस होने की ट्रिक हो सकती है।
7. उसे स्टडी से मतलब होता तो वो लड़ती कि मुझे एग्जाम देना है। उसने सोशल मीडिया पर कहा मुझे डिग्री नहीं चाहिए। डीयू मैनेजमेंट ने अब तक उसका नाम नहीं काटा है, लेकिन वो एग्जाम देने नहीं आई।
8. उसने जिस दिन पोस्ट की, उसके अगले दिन शनिवार था। हमने उसके नंबर और फॉर्म में दिए पेरेंट्स के नंबर पर पूरे दिन फोन किया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया।
9. अगर किसी की बेटी के साथ कॉलेज प्रशासन गलत करेगा, तो पेरेंट्स जरूर कॉन्टैक्ट करेंगे, पर न स्टूडेंट और न उसके पेरेंट्स ने कॉन्टैक्ट किया।
10. इससे पहले चित्रा दिल्ली के राजधानी कॉलेज में पढ़ती थी। DU की टीम ने वहां संपर्क किया। पता चला कि वहां भी चित्रा क्लास से गायब रहती थी। उसकी

विवाद के बाद इंस्टाग्राम पर चार गुना बढ़े फॉलोअर DU की जांच टीम में शामिल एक प्रोफेसर बताते हैं, ‘ये पूरा खेल फेमस होने के लिए था। यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट फेमस हों, तो हमें अच्छा लगेगा, लेकिन कुछ अच्छा करके, हमें बदनाम करके नहीं।’
कैसे पता कि चित्रा ने फेमस होने के लिए पोस्ट किए? प्रोफेसर जवाब देते हैं, ‘उसका इंस्टाग्राम देखिए। हमारी रिपोर्ट जमा होने तक फॉलोअर 20 हजार से बढ़कर 80 हजार से ज्यादा हो गए। जांच में ये भी पता चला कि उसे पढ़ाई नहीं करनी थी। बस किसी तरह फेमस होने का भूत सवार था। उसे सेमेस्टर बर्बाद होने का दुख होता, तो वो ये तमाशा नहीं करती। प्रशासन से बात करती, अपनी दिक्कत बताती और तब भी बात न बनती तो पेरेंट्स को बताती।’

ये चित्रा का इंस्टाग्राम अकाउंट है। विवाद से पहले चित्रा के करीब 20 हजार फॉलोअर थे। अब ये 80 हजार हैं।
प्रोफेसर बोलीं- 0 इंटरनल मार्क्स और बिना रोल नंबर वाले भी एग्जाम में बैठे
अफ्रीकन स्टडीज के एक प्रोफेसर ने पहचान उजागर न करने की गुजारिश पर हमसे कुछ बातें शेयर कीं। वे बताती हैं, ‘मेरे सब्जेक्ट का पेपर था। तीन स्टूडेंट के पास रोल नंबर नहीं था। मैंने डिप्टी सुपरिंटेंडेंट को बुलाया और कहा कि सर इनके पास रोल नंबर नहीं है। उन्होंने कहा, आप इनका आईकार्ड चेक कर लीजिए और एग्जाम में बैठने दीजिए।’
‘पक्का उनकी अटेंडेंस कम होगी, इसलिए रोल नंबर इश्यू नहीं किया गया। फिर भी हमने एग्जाम दिलाया। अगर चित्रा सिंह का एडमिट कार्ड इश्यू नहीं हुआ था, तो उन्हें संपर्क तो करना चाहिए था। वो तो एग्जाम देने आई ही नहीं।’
प्रोफेसर आगे कहती हैं, ‘ऐसे भी स्टूडेंट्स ने एग्जाम दिया, जिनके इंटरनल मार्क्स जीरो थे। अगर किसी स्टूडेंट की अटेंडेंस शॉर्ट हैं, तो उसका एडमिट कार्ड इश्यू नहीं होता, ये नियम है। उसे अटेंडेंस का एक नंबर मिला था। यानी वो क्लास में न के बराबर आई होगी।
साथ पढ़ने वाली स्टूडेंट बोली- डिपार्टमेंट में उसका कोई दोस्त नहीं
डिपार्टमेंट की एक स्टूडेंट बताती हैं, ‘चित्रा क्लास में नहीं आती थी, तो उसके दोस्त भी नहीं बने। मैंने भी उसे एक-दो बार ही देखा था। कभी हाय-हैलो ही हुआ है। हालांकि, वो इंस्टाग्राम में बहुत एक्टिव थी।’
क्लास में कभी उसे प्रोफेसर ने डांटा था? स्टूडेंट बताती हैं, ‘वो क्लास में आती ही नहीं थी, तो डांटा कैसे होगा। मैंने तो उसे डांट खाते नहीं देखा।’
क्या डिपार्टमेंट के प्रोफेसर आप लोगों को रूम में बुलाते हैं? जवाब मिला, ‘आपने भी पढ़ाई की होगी। प्रोफेसर्स को हॉल और कुछ को रूम मिलते हैं। किसी स्टूडेंट के पढ़ाई से जुड़े कुछ सवाल होते हैं, तो वे टाइम लेकर चले जाते हैं। कई बार टीचर भी कह देते हैं कि क्लास के बाद पूछ लेना। ये तो हर कॉलेज-यूनिवर्सिटी में होता है। इसका मतलब ये नहीं कि टीचर जबरदस्ती बुलाते हैं या फिर वहां कुछ उनके साथ गलत करते हैं।’
वे आगे कहती हैं, ‘चित्रा ही नहीं, क्लास में कुछ और बच्चों की अटेंडेंस कम थी। कुछ तैयारी करने वाले बच्चे होते हैं। टीचर के पास जाकर उन्होंने रिक्वेस्ट की, तो तुरंत कंसीडर किया गया। उन्होंने एग्जाम भी दिया।’

दिल्ली यूनिवर्सिटी में अफ्रीकन स्टडीज के स्टूडेंट्स ने वीडियो बनाकर चित्रा के आरोपों को गलत बताया है।
प्रोफेसर ने पुलिस से शिकायत की, सारे आरोप गलत निकले
DU के प्रोफेसर ने मौरिस नगर साइबर थाने में चित्रा सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाया कि लड़की बिना किसी सबूत के मेरी इमेज खराब कर रही है। पुलिस ने यूनिवर्सिटी से लेकर चित्रा सिंह के घर तक पूछताछ की। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच में सामने आया कि मामला सिर्फ अटेंडेंस शॉर्ट होने का था।
जांच करने वाले एक पुलिस अधिकारी बताते हैं, ‘लड़की की अटेंडेंस बहुत कम थी। उसे रोल नंबर इश्यू नहीं किया गया था। शायद वो डर गई थी, इसीलिए प्रोफेसर पर आरोप लगाने लगी। उसने एचओडी और प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाए थे। यहां तक कहा कि प्रोफेसर उसे रूम में बुलाते हैं। एचओडी धमकाते हैं।’
पुलिस बोली- पिता शर्मिंदा, चित्रा को पछतावा नहीं चित्रा सिंह का वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया था। वहां उन्होंने प्रोफेसर और एचओडी पर गंभीर आरोप लगाते हुए मदद मांगी। यह वीडियो ‘एक्स’ पर चित्रा सिंह ने पोस्ट नहीं किया। दूसरे यूजर्स ने इसे रीपोस्ट और शेयर किया। इससे वीडियो वायरल हो गया।
साइबर क्राइम की शिकायत पर पुलिस चित्रा के घर पहुंची। चित्रा तब घर पर थी। उनका परिवार यूपी के सहारनपुर में रहता है। पिता सरकारी नौकरी करते हैं। मां हाउस वाइफ हैं। उनका एक भाई भी है।
पुलिस सोर्स बताते हैं, ‘हमने स्टूडेंट के पिता को पूरा मामला बताया, तो उन्होंने गलती मानी। वे बेटी के वीडियो पर शर्मिंदा थे। चित्रा को बार-बार समझा रहे थे। चित्रा तब तक अड़ी ही रही। उसे कोई पछतावा नहीं था।’
चित्रा सिंह ने घर पर पुलिस के आने का भी एक वीडियो पोस्ट किया है। इसमें वे बता रही हैं कि घर पुलिस आई थी और पेरेंट्स से बात की है। इसमें उन्होंने 2 बार क्लास अटेंड करने की बात को भी गलत बताया है। दैनिक भास्कर ने इस पर चित्रा से बात करने की कोशिश की। फोन रिसीव न होने पर सोशल मीडिया पर मैसेज

चित्रा सिंह ने ये वीडियो 14 दिसंबर को पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने बताया कि घर पर पुलिस आई थी। चित्रा अब भी इंस्टाग्राम पर एक्टिव हैं।
पेरेंट्स को यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट से कोई शिकायत नहीं है? सोर्स बताते हैं, ‘नहीं। उन्होंने तो पूछताछ में सहयोग किया। जांच के बाद तथ्य सामने हैं, उससे साफ है कि चित्रा के सारे आरोप गलत थे। चित्रा के वीडियो बोलने की आजादी के तहत आते हैं, इसमें कोई क्राइम नहीं है। हां उसने प्रोफेसर और यूनिवर्सिटी को डिफेम किया। ये मामला सिविल का है। प्रोफेसर या यूनिवर्सिटी चाहे तो सिविल कोर्ट में जा सकते हैं। मानहानि का केस कर सकते हैं।’