उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच अब CBI कर सकती है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सीबीआई जांच के लिए संस्तुति प्रदान कर दी है। विपक्ष लगातार इसकी मांग कर रहा था, इसके लिए पूरे राज्य में प्रदर्शन किए जा रहे थे
सीएम पुष्कर सिंह धामी मीडिया को जानकारी देते हुए और इनसेट में अंकिता भंडारी की फाइल फोटो।
वहीं, सीएम धामी ने एक वीडियो जारी कर जानकारी देते हुए बताया कि अंकिता के माता-पिता के अनुरोध और उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार ने ये फैसला लिया है।
बीते बुधवार को ही मुख्यमंत्री ने अंकिता के माता- पिता को देहरादून बुलाया था, जहां पर परिवार ने सीएम से मामले में निष्पक्ष जांच की मांग रखी थी। सीएम धामी के ऐलान के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा की सीबीआई जांच की सिफारिश कर सरकार ने माना है कि अतीत में उनसे गलती हुई है।

सीएम धामी ने कही 5 बड़ी बातें
- माता–पिता के अनुरोध पर CBI जांच की संस्तुति: मुख्यमंत्री ने बताया कि अंकिता भंडारी के माता–पिता से मुलाकात के दौरान उन्होंने CBI जांच कराने का अनुरोध किया, जिसके बाद सरकार ने इस प्रकरण में CBI जांच की संस्तुति देने का निर्णय लिया।
- घटना के बाद बिना विलंब के कार्रवाई: मुख्यमंत्री के अनुसार घटना की जानकारी मिलते ही राज्य सरकार ने बिना किसी देरी के कार्रवाई की और पूरे मामले को गंभीरता से लिया।
- महिला IPS अधिकारी के नेतृत्व में SIT का गठन: मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक महिला IPS अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
- अभियुक्तों की गिरफ्तारी से लेकर सजा तक: मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी अभियुक्तों को शीघ्र गिरफ्तार किया गया। राज्य सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी की गई, जिसके चलते विवेचना और ट्रायल के दौरान किसी भी अभियुक्त को जमानत नहीं मिल सकी और निचली अदालत ने अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
- ऑडियो क्लिप्स पर FIR, जांच जारी: मुख्यमंत्री ने बताया कि सोशल मीडिया पर सामने आई कुछ ऑडियो क्लिप्स के संबंध में अलग–अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं और इन मामलों में जांच की प्रक्रिया लगातार जारी है।

CM के ऐलान के बाद नेताओं की प्रतिक्रिया…

अब समझिए अगर सीबीआई जांच हुई तो क्या होगा…
CBI जांच के बावजूद दोषियों की सजा पर असर नहीं
क्राइम मामलों के एडवोकेट विवेक के अनुसार, अगर मामला सीबीआई के पास जाता है तो इससे केस में पहले से सजा पा चुके तीन आरोपियों को कोई राहत नहीं मिलेगी। तीनों को आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है और सीबीआई जांच से उनकी सजा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
CBI को नए सिरे से जांच का अधिकार
एडवोकेट विवेक के मुताबिक, सीबीआई को यह मामला अब नए सिरे से जांचने का अधिकार होगा। यदि जांच के दौरान ऐसे नए साक्ष्य सामने आते हैं, जो पहले की जांच में शामिल नहीं थे, तो सीबीआई उन्हें अपनी विवेचना का हिस्सा बना सकती है।
कथित VIP की भूमिका पर बन सकता है केस
एडवोकेट विवेक का कहना है कि यदि सीबीआई जांच में कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े ठोस और नए साक्ष्य सामने आते हैं, और उन साक्ष्यों के आधार पर सीबीआई चार्जशीट दाखिल करती है, तो विशेष अदालत उस चार्जशीट का संज्ञान ले सकती है। ऐसी स्थिति में कथित वीआईपी को इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता माना जा सकता है।
साजिश साबित होने पर सजा संभव
एडवोकेट विवेक के अनुसार, यदि सीबीआई कोर्ट में यह साबित करने में सफल रहती है कि कथित वीआईपी ने साजिश रची थी, तो कानून के तहत उसे भी सजा दी जा सकती है। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि सीबीआई के पास साजिश से जुड़े साक्ष्य कितने मजबूत हैं और अदालत उन्हें किस तरह स्वीकार करती है।
हाईकोर्ट पहले SIT की जांच पर जता चुका संतोष
एडवोकेट विवेक बताते हैं कि इससे पहले उत्तराखंड हाईकोर्ट अंकिता भंडारी मर्डर केस में सीबीआई जांच की मांग खारिज कर चुका है। कोर्ट ने उत्तराखंड पुलिस की एसआईटी जांच पर संतोष व्यक्त किया था और यह भी कहा था कि जांच किसी हाई-प्रोफाइल व्यक्ति को बचाने की दिशा में नहीं की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका अभी विचाराधीन
एडवोकेट विवेक के अनुसार, सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी, जो फिलहाल विचाराधीन है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा सीबीआई जांच का आदेश देना एक अलग प्रशासनिक निर्णय माना जाएगा, जिसका कानूनी असर तय प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ेगा।
