
कोरोना वायरस महामारी के दौरान जिन डॉक्टरों को कोरोना वॉरियर कहा गया, भारत सरकार के पास उन्हीं से जुड़े आंकड़े नहीं है। कोविड-19 के मरीजों का इलाज करते हुए कितने डॉक्टर्स ने अपने जीवन का बलिदान दे दिया, सरकार के पास इसकी जानकारी नहीं है। इसके लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने केंद्र सरकार की आलोचना की है।
आईएमए ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन द्वारा संसद में दिए गए बयान के जवाब में अपनी बात कही है। संसद में केंद्रीय मंत्री ने इस महामारी के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों के योगदान को स्वीकार तो किया, लेकिन कोविड-19 के कारण मरने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के आंकड़े उनके बयान से गायब थे। पत्र में आईएमए ने सरकार पर महामारी के कारण डॉक्टरों और हेल्थकेयर वर्कर्स के बलिदान के प्रति उदासीन रहने का आरोप लगाया है। पत्र में कहा है कि ये राष्ट्रीय नायकों का परित्याग है, जो लोगों के लिए खड़े हुए।
हालांकि, आईएमए द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि कोविड-19 के कारण महामारी में कम से कम 382 डॉक्टरों की मृत्यु हो गई है। IMA ने पत्र में कहा है, ‘भारत की तरह किसी भी राष्ट्र ने इतने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को नहीं खोया है।’
आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजन शर्मा ने कहा, ‘अगर सरकार कोविड-19 से संक्रमित कुल डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या और उनमें से कितने महामारी के कारण अपना जीवन बलिदान कर देते हैं, के आंकड़े को नहीं रखती है, तो यह महामारी अधिनियम 1897 और आपदा प्रबंधन अधिनियम को संचालित करने के नैतिक अधिकार को खो देती है।’ इससे इस पाखंड का का भी पर्दाफाश होता है कि एक तरफ इनको कोरोना वॉरियर कहा जाता है और दूसरी तरफ इनके और इनके परिवार को शहीद का दर्जा और फायदे देने से मना किया जाता है.’
एसोसिएशन ने आगे कहा, ‘बॉर्डर पर लड़ने वाले हमारे बहादुर सैनिक अपनी जान खतरे में डालकर दुश्मन से लड़ते हैं लेकिन कोई भी गोली अपने घर नहीं लाता और अपने परिवार के साथ साझा करता, लेकिन डॉक्टर्स और हेल्थ केयर वर्कर राष्ट्रीय कर्तव्य का पालन करते हुए ना सिर्फ खुद संक्रमित होते हैं बल्कि अपने घर लाकर परिवार और बच्चों को देते हैं.’
एसोसिएशन आगे कहती है, ‘केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि पब्लिक हेल्थ और हॉस्पिटल राज्यों के तहत आते हैं इसलिए इंश्योरेंस कंपनसेशन का डाटा केंद्र सरकार के पास नहीं है. यह कर्तव्य का त्याग और राष्ट्रीय नायकों का अपमान है जो अपने लोगों के साथ खड़े रहे.’ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने उन 382 डॉक्टर की लिस्ट जारी की जिनकी जान कोरोना के चलते गई.
IMA की ये चार मुख्य मांगें हैं…
1. सरकार कोरोना से मारे गए डॉक्टर्स को शहीद का दर्जा दे
2. देश की सरकार इनके परिवार को सांत्वना और मुआवजा दे
3. सरकार नर्सों व अन्य हेल्थ केयर वर्कर प्रतिनिधि से भी ऐसा डेटा ले
4. प्रधानमंत्री उचित समझें तो हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष को बुलाएं और उनकी चिंताएं समझें और सुझाव लें