लता दीदी के बाद अब बप्पी दा के निधन से दुखी हैं आशा भोसले, कही ये बात

 

देश की सुर कोकिला और भारतरत्न लता मंगेशकर का 6 फरवरी को निधन हो गया था। इस गम से इंडस्ट्री अभी उबरी भी नहीं थी कि बुधवार को मशहूर सिंगर और कंपोजर बप्पी लहरी ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। इसके बाद से बड़ी हस्तियां उनके साथ बिताए पलों को याद कर श्रद्धांजलि दे रही हैं। इस बीच आशा भोसले ने भी अंतिम वक्त में बप्पी दा से नहीं मिल पाने का दुख जाहिर किया है।

दोनों दिगग्ज 10 दिन में चले गए:-वहीं, लता मंगेशकर  और बप्पी लहरी  के निधन से आशा भोसले  बेहद दुखी हैं. दैनिक भास्कर से बातचीत में आशा भोसले ने बताया कि अभी तो 10 दिन भी नहीं हुए हैं और दोनों दिग्गज इस तरह से हमें छोड़कर चले गए. उन्होंने कहा, ‘मैं बप्पी से मिलना चाहती थी. मैंने कई बार ड्राइवर से कहा था कि मुझे बप्पी से मिलने जाना है. लेकिन, उसने कहा कि कोरोना काल में जाएंगे और अगर उनको कुछ हो गया, तो आपकी बदनामी होगी. मैंनेकहा-मुझको नहीं है, तब उनको कैसे हो जाएगा। किसी को कुछ हो या नहीं, पर इस वक्त किसी के घर जाना नहीं चाहिए. कुछ हो जाएगा, तब बोलेंगे कि आशा आई थी.’

बहुत हंसमुख थे बप्पी:-आशा भोसले ने आगे कहा, ‘मेरे ड्राइवर ने मुझे समझा दिया और मैं मिल नहीं पाई. आज पता लगा कि वो चले गए . यह बहुत दुख की बात है. बड़े हंसमुख थे. कोई कुछ कह दे, तब हंस देते थे. कुछ कहते नहीं थे. एक गाने वाली और एक म्यूजिक बनाने वाला, दोनों दस दिन के अंदर चले गए.’ आशा भोसले ने ये भी कहा कि वो बप्पी दा के घर जाना चाहती हैं लेकिन नहीं जा सकती हैं कि अभी लता मंगेशकर का तेरहवां नहीं हुआ है इसलिए घर में सूतक है और वो नहीं निकल सकती हैं.

गाए 500 से अधिक गाने:-आशा भोसले ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने और बप्पी लहरी ने मिलकर 500 से अधिक गाने गाए हैं. वो बहुत साफ दिल इंसान थे. कम बोलते थे और अधिक काम करते थे. उन्हें सिगरेट, पान, शराब कुछ की लत नहीं थी. आशा भोसले ने कहा कि उनके हर प्रोग्राम और घर के फंक्शन में जाती थीं. आशा भोसले ने बताया कि कोविड से पहले उनके घर पर गाना भी रिकॉर्ड किया था लेकिन कोरोनो का बाद वो उनसे मिल नहीं पाईं.

मन है दुखी:-आशा भोसले ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा, ‘मैं बहुत दुखी हूं कि इस तरह असमय बप्पी सबको छोड़कर चले गए. उनके घर के लोग भी बहुत अच्छे हैं. बेटी रीमा और बेटे बप्पा भी अच्छे से घर संभालते हैं. इधर, दीदी भी चली गईं. मुझे लगा था कि अभी दीदी तीन-चार साल निकालेंगी, पर नहीं निकाल पाईं.’

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