भगवान श्री परशुराम जन्मोत्सव – डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री

 

? परशुराम जन्मोत्सव –

भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया के दिन हुआ था अतः उनकी शस्त्रशक्ति भी अक्षय है । भगवान शिव के दिव्य धनुष की प्रत्यंचा पर केवल परशुराम ही बाण चढ़ा सकते थे , यह उनकी अक्षय शक्ति का ही परिचय है । इन्हें विष्णु का छठा अवतार भी कहा जाता है । उक्त जानकारी मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री ने एक विशेष चर्चा मे की ।
डाँ. शास्त्री ने बताया की भगवान परशुराम को नियोग भूमिहार ब्राह्मण , चितपावन ब्राह्मण , त्यागी , मोहयाल , अनाविल और नंबूदिरी ब्राह्मण समुदाय मूल पुरुष या स्थापक के रूप में पूजते हैं ।
भगवान परशुराम के गायत्री मंत्र इस प्रकार हैं:
❀ ॐ ब्रह्मक्षत्राय विद्महे क्षत्रियान्ताय धीमहि तन्नो राम: प्रचोदयात् ॥
❀ ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम: प्रचोदयात् ॥
❀ ॐ रां रां ॐ रां रां परशुहस्ताय नम: ॥
डाँ. अशोक शास्त्री के अनुसार आमतौर पर अक्षय तृतीया एवं  परशुराम जयंती एक ही दिन होती है , परन्तु तृतीया तिथि के प्रारंभ होने के आधार पर परशुराम जयंती , अक्षय तृतीया से एक दिन पूर्व भी हो सकती है ।
भगवान परशुरामके प्रसिद्ध मंदिर
* भगवान परशुराम मंदिर , त्र्यम्बकेश्वर , ‎नासिक , महाराष्ट्र
* परशुराम मंदिर , अट्टिराला , जिला कुड्डापह , आंध्रा प्रदेश
* परशुराम मंदिर , सोहनाग , सलेमपुर , उत्तर प्रदेश
* अखनूर, जम्मू और कश्मीर
* कुंभलगढ़ , राजस्थान
* महुगढ़ , महाराष्ट्र
* परशुराम मंदिर , पीतमबरा , कुल्लू , हिमाचल प्रदेश ,
* जनपव हिल, इंदौर मध्य प्रदेश
* परशुराम कुंड लोहित जिला , अरुणाचल प्रदेश – एसी मान्यता है, कि इस कुंड में अपनी माता का वध करने के बाद परशुराम ने यहाँ स्नान कर अपने पाप का प्रायश्चित किया था ।

भगवान परशुराम के बारे में डाँ. शास्त्री ने बताया की परशुराम जी की माता रेणुका तथा पिता का नाम मुनि जमदग्नि है । भगवान परशुराम को रामभद्र , भार्गव , भृगुपति , भृगुवंशी तथा जमदग्न्य नाम से भी जाना जाता है।
डाँ. शास्त्री ने बताया की परशुराम दो शब्दों से मिलकर बना है , परशु अर्थात कुल्हाड़ी तथा राम । इन दो शब्दों को मिलाकर अर्थ निकलता है कुल्हाड़ी के साथ राम ।
आपने कहा परशुराम शस्त्र विद्या के श्रेष्ठ जानकार थे परशुरामजी का उल्लेख रामायण , महाभारत , भागवत पुराण और कल्कि पुराण इत्यादि अनेक ग्रन्थों में किया गया है । कल्कि पुराण के अनुसार परशुराम , भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि के गुरु होंगे और उन्हें युद्ध की शिक्षा देंगे । भीष्म , गुरु द्रोण एवं कर्ण उनके जाने – माने शिष्य थे ।
डाँ. अशोक शास्त्री ने बताया भगवान परशुराम शिवजी के उपासक हैं । उन्होनें सबसे कठिन युद्धकला  कलारिपायट्टू की शिक्षा शिवजी से ही प्राप्त की थी ।
हिन्दू धर्म में परशुराम के बारे में यह मान्यता है , कि वे त्रेता युग एवं द्वापर युग से कलयुग के अंत तक अमर हैं।
( डाँ. अशोक शास्त्री )

ज्योतिषाचार्य
डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
श्रीमंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245 , एम. जी. रोड ( आनंद चौपाटी ) धार , एम. पी.
मो. नं. 9425491351

–: शुभम् भवतु :–

14 मई को अक्षत तृतीया के साथ भगवान परशुराम जी का जन्म उत्सव मनाया जाएगा । हालांकि कोरोना काल के चलते इस बार ब्राह्मण समाज ने परशुराम जयंती घर पर ही मनाने का निर्णय किया है । भगवान परशुराम ने सनातन धर्म की रक्षा और मानव जीवन को बचाने के लिए अपने असाधारण शौर्य , पराक्रम और शक्तियों का प्रयोग कर मायावी असुरों का प्रतिकार किया था । वर्तमान में कोरोना की महामारी भी मायावी असुरों की भांति कई रूप बदलकर मानव जीवन के लिए खतरा बन गई है । ऐसे में भगवान परशुराम जी की पांच विशेषताओं का पालन कर हम भी कोरोना जैसी महामारी का मुकाबला कर सकते हैं । मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. अशोक शास्त्री ने एक विशेष मुलाकात मे बताया की भगवान परशुराम जी की इन पांच विशेषताओ को हमे अपनाना चाहिए ।
1.धैर्यवान :~ भगवान परशुराम ने कभी भी आवेश में आकर कोई निर्णय या काम नहीं किया । वे हमेशा धैर्यवान होकर समस्त मानव जाति के लिए कार्य करते थे । कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए हमें भी धैर्य से काम लेना होगा । हमें ऐसे संकट पूर्ण समय में अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए । इसी से हम समय पर सही निर्णय कर इस बीमारी का हल कर सकते हैं ।
2. दानशील :~ भगवान परशुराम की एक विशेषता उनकी दान शीलता भी थी । आज जब कोरोना महामारी में सभी दूर लॉकडाउन में कामकाज , आवागमन बंद है । ऐसे में निर्धन और जरूरतमंदों को हमें खाद्य सामग्री के साथ ही जरूरत का हर सामान दान कर समाज की स्थिरता के लिए काम करना चाहिए । ताकि लोगों का मनोबल बना रहे ।
3. नैतिकता व न्याय प्रियता :~ आपदा में भी कई लोग अपने हितलाभ साधने के लिए अनैतिक कार्य कर रहे हैं साथ ही मानव समाज के लिए खतरा भी उत्पन्न कर रहे हैं ऐसे समय में हमें अपने नैतिक मूल्य का ध्यान रख पीड़ित लोगों की सहायता करनी चाहिए साथ ही इस संकट की घड़ी में जरूरतमंदों को न्याय दिलाने के लिए भी प्रयास करना चाहिए ।
4. माता पिता को माना ईश्वर :~ भगवान परशुराम ने अपने माता पिता को ही ईश्वर मना था । हमें भी अपने घर के बड़े बुजुर्गों का उसी प्रकार ध्यान रखकर उनकी देखभाल करना चाहिए ताकि वे इस संक्रमण की चपेट में ना आए और हमेशा परिवार में खुशहाली बनी रहे ।
5. संहारक और भक्ति का संगम :~ भगवान परशुराम की इस अलौकिक विशेषता से भी हम बहुत हद तक मानव जाति को कोरोना संक्रमण से बचा सकते हैं। जहां एक और कोरोना योद्धा के रूप में कई लोग काम कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर सामान्य जन को भी अपने घर पर रहकर भक्ति का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए ताकि आने वाले समय में हम इस संकट से उबर सकें। इसका संहार कर सकें ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *