भोपाल। एमपी में हुक्का बैन होने के बावजूद चोरी छिपे हो रहा है इस्तेमाल, गेमिंग जोन में प्राइवेट रूम और हुक्का – देखें VIDEO

मध्यप्रदेश में हुक्के पर प्रतिबंध है। बावजूद इसके चोरी छिपे हुक्के का इस्तेमाल हो रहा है। खास तौर पर गेम जोन में हुक्के के साथ प्राइवेट रूम भी दिए जा रहे हैं। इसके लिए केवल 300 रु. प्रति घंटा चार्ज किया जाता है। भीतर से लॉक होने वाले इन प्राइवेट रूम्स में न तो कैमरे लगे हुए हैं, न ही फायर सेफ्टी के इंतजाम है।

राजधानी भोपाल के एमपी नगर में चल रहे अलग-अलग गेम जोन में जाकर स्टिंग ऑपरेशन किया। पहले गेम जोन में पहुंचे तो पता चला कि यहां प्राइवेट रूम किराए पर दिए जाते हैं। इसका संचालक ये कहते हुए कैमरे में कैद हुआ कि प्राइवेट रूम में एक घंटे के लिए कुछ भी कर सकते हैं, कोई रोक टोक नहीं है।

वहीं दूसरे गेम जोन में पहुंचने पर प्राइवेट रूम के अलावा हुक्का भी मिलता है। हुक्का तैयार करने वाले कर्मचारी ने कहा कि हुक्का में कुछ भी मिक्स करवा सकते हैं, कोई पाबंदी नहीं है। गेम जोन के संचालकों से ये भी पूछा कि यहां सब कुछ खुलेआम चलता है, क्या पुलिस का डर नहीं तो वे बोले पुलिस को हफ्ता जाता है इसलिए डरने की जरूरत नहीं है।

अब जानिए किस तरह से हो रहा कानून का उल्लंघन

सीन 1: एमपी नगर जोन 2 का माइनस वन गेम जोन

एमपी नगर जोन 2 को स्टूडेंट एरिया भी कहते हैं। यहीं पर मौजूद है माइनस वन गेम जोन। ये गेम जोन तलघर में बना है। अंदर जाने के लिए करीब 12 सीढियां उतरना पड़ती है। वैसे तो गेट पर ही नो स्मोकिंग का बोर्ड लगा है पर अंदर दाखिल होते ही तेज म्यूजिक की आवाज और सिगरेट के धुएं की गंध महसूस होती है। अंधेरे में युवक युवतियां बैठे दिखते हैं। कुछ युवा गेम खेलते नजर आते हैं।

गेम जोन के भीतर अंधेरे कमरे में बैठे युवक-युवतियां

कर्मचारी बोला- हमारे यहां हुक्के की व्यवस्था है

गेम जोन में दाखिल होने के बाद पास यहां का एक कर्मचारी पहुंचा। उससे बात की

कर्मचारी: भैया आपको कौन सा गेम खेलना है?

रिपोर्टर: पीएस 4।

कर्मचारी: भैया हमारे पास हुक्का की व्यवस्था भी है, आपको लगेगा क्या?

रिपोर्टर: कितने का है ?

कर्मचारी: 350 रुपए का रेगुलर 450 का फ्लेवर वाला, इसके साथ प्राइवेट रूम की फैसिलिटी भी है आपको चाहिए?

रिपोर्टर: क्या चार्ज है?

कर्मचारी: 350 रुपए में दो लोग, एक घंटा।

रिपोर्टर: प्राइवेट रूम की परमिशन है? कोई डर की बात तो नहीं?

कर्मचारी: कोई दिक्कत नहीं है हम पुलिस को हफ्ता देते हैं।

गेम जोन में हुक्का भी बड़े आराम से पी सकते हैं। जबकि, एमपी में हुक्का बैन है।

प्राइवेट रूम को लॉक करने की सुविधा

गेम जोन में हमने वहां मौजूद प्राइवेट रुम का जायजा लिया। प्राइवेट रुम में पूरा अंधेरा था, 2 मुलायम सोफे थे, AC और फेन था। वहीं, गेम खेलने के लिए टी.वी भी था। इस दौरान हमे एक CCTV कैमरा भी दिखा जिसका व्यू पॉइंट नीचे की तरफ था।

प्राइवेट रुम का जायजा लेने के बाद हम एक टेबल पर बैठ गए। वहीं, बगल में बैठे कुछ युवा किसी भी तरह के फायर सेफ्टी के बिना चारों ओर लकड़ी के फर्नीचर से घिरे हुए गेम जोन में बेखौफ होकर हुक्का पी रहे थे। यहां काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि गेम जोन में इलेक्ट्रिक सिगार, हुक्का और सिगरेट पी सकते हैं।

 

गेम जोन में सिगरेट भी महंगे दामों में बेची जाती है।

सीन 2 : एमपी नगर का इन्फिनिटी गेम जोन

इसके बाद एमपी नगर चौराहे के पास इन्फिनिटी गेम जोन में पहुंची। ये गेम जोन भी अंडरग्राउंड बना हुआ है। अंदर जाने पर बांस और अलग अलग तरह की लकड़ी से बना इंटीरियर दिखाई देता है। वही, एक बैनर पर लिखा था कि यहां प्राइवेट रूम उपलब्ध है। गेम जोन के संचालक से प्राइवेट रूम को लेकर बात की।

रिपोर्टर: यहां पर प्राइवेट रूम है?

संचालक: हां है 300 रुपए घंटे का चार्ज है।

रिपोर्टर: इस रूम में प्राइवेसी का क्या सिस्टम है ?

संचालक: फुल प्राइवेसी है आप अंदर से दरवाजा लॉक कर सकते है कोई कैमरा भी नहीं लगा है। आपको जो करना है करो हम लोग बाहर ही हैं कोई डिस्टर्ब भी नहीं करेगा।

रिपोर्टर: कोई दिक्कत तो नहीं है ये प्राइवेट रूम की परमिशन है या नहीं?

संचालक: इस गेम जोन में ACP सुरभि मीणा की हिस्सेदारी है। पुलिस यहां नहीं आती।

रिपोर्टर: क्यों नहीं आएगी?

संचालक: क्योंकि ये उनका सेटअप है। वे यहां की इनवेस्टर है।

संचालक से बात करने के बाद हम उस प्राइवेट रूम में पहुंचे जिसकी वह बात कर रहा था। रूम गेम जोन के एक कोने में बना हुआ है। जैसे ही रूम में हम पहुंचे वहां अंधेरा था। यहां भी उस गेम जोन जैसे ही 2 सोफे रखे थे और कमरा पूरे तरीके से साउंड प्रूफ था। प्राइवेट रूम में कैमरा भी नहीं था। प्राइवेट रूम में और प्राइवेसी पाने के लिए दरवाजे काे अंदर से लॉक करने का भी ऑप्शन था।

 

प्राइवेट रूम को अंदर से लॉक करने की सुविधा है। रूम पूरी तरह से साउंड प्रूफ है।

ACP सुरभि मीणा बोलीं- गेम जोन का संचालक मेरा भाई

इन्फिनिटी गेम जोन के संचालक ने कहा कि इस गेम जोन की इन्वेस्टर एसीपी सुरभि मीणा है। एसीपी से संपर्क किया। उनसे पूछा कि क्या वाकई में गेम जोन में उनकी पार्टनरशिप है तो वे बोलीं- गेम जोन संचालक मेरे भाई है। उनका नाम शिवांश मालवीय है।

इन्फिनिटी गेम जोन के संचालक शिवांश मालवीय। ACP सुरभि मीणा ने इन्हें ही अपना भाई बताया है।

फायर सेफ्टी के इंतजाम जीरो, बांस से बना इंटीरियर

पड़ताल में दोनों ही गेम जोन में फायर सेफ्टी की कोई व्यवस्था नहीं दिखी। यहां ना तो अग्निशमन यंत्र है और ना ही स्मोक सेंसर लगे हैं। हमने जब गेम जोन संचालक से पूछा कि यहां स्मोक सेंसर क्यों नहीं है तो उसने बताया कि हुक्के के धुएं से स्मोक अलार्म चालू हो जाते हैं, इसीलिए ये सेंसर नहीं लगवाए।

इसके अलावा ज्यादातर गेम जोन अंडरग्राउंड संचालित हो रहे हैं, इनमें एंट्री और एग्जिट गेट एक ही है। किसी फायर एग्जिट की कोई व्यवस्था नहीं है। बिना फायर सेफ्टी के चल रहे इन गेम जोन के साथ अंडर ग्राउंड ही कैफे भी खोले गए हैं। इनका इंटीरियर बांस और खजूर के झाड़ से बना हुआ है। अंदर सिगरेट और हुक्के की भी बिक्री होती है।

गेम जोन में फायर सेफ्टी के कोई इंतजाम नहीं है।

पुलिस कमिश्नर बोले- शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई करेंगे

फायर सेफ्टी को लेकर हमने फायर ऑफिसर रामेश्वर नील से बात की। उन्होंने बताया कि किसी भी गेम जोन में लकड़ी और थर्माकोल का उपयोग करना बैन है। हमारी 4 टीम अभी भोपाल में अस्पतालों और अन्य जगहों की जांच कर रही है, जहां फायर सेफ्टी के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है उन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं।

वहीं इस मामले को लेकर जब भोपाल के पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी से बात की तो उन्होंने कहा कि गेम जोन से जुड़ा ऐसा कोई भी मामला हमारे संज्ञान में नहीं है। हालांकि, पब्लिक प्लेस पर इस तरह के प्राइवेट रूम बना नहीं सकते। बनाना भी है तो उसके लिए फायर एनओसी लेने की जरूरत है। साथ ही ऐसे रूम में सीसीटीवी कैमरे भी होने चाहिए।

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