“भोपाल की वकील वीणा गौतम अकेली हिंदू, 100 मुस्लिम पड़ोसियों और पुलिस के दबाव के बीच संघर्ष: पानी और सीवरेज लाइन तक बंद किए गए, कोर्ट ने झूठी कार्रवाई को खारिज कर 2 लाख रुपए का हर्जाना लगाया”

ये कहते हुए भोपाल की एडवोकेट वीणा गौतम के चेहरे पर बेबसी और गुस्से के मिलेजुले भाव आते हैं। कुछ देर रूककर वह आगे कहती है, ‘घर के सामने मोटरसाइकिल पर 8 से 10 लड़के झुंड बनाकर खड़े रहते थे। बच्चों का खेलना मुश्किल हो गया । बेटी का घर की सीढ़ियां उतरना तक बंद हो गया। बची-खुची कमी पुलिस ने इनके पक्ष में खड़े होकर पूरी कर दी।

वीणा सवाल पूछती है कि अपने अस्तित्व को बचाने के लिए झगड़ा करने के अलावा हमारे पास क्या रास्ता बचता था। दरअसल, वीणा ओल्ड सुभाष नगर की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहती है। 10-15 साल पहले उनके पड़ोसी हिंदू थे, लेकिन धीरे-धीरे हिंदू मकान बेचते गए और ज्यादातर मुस्लिम परिवार रहने लगे। इसकी वजह से वीणा और पड़ोसियों के बीच आए दिन विवाद होने लगे।

वीणा का आरोप है कि जब ये विवाद थाने पहुंचा तो पुलिस ने पड़ोसियों से हुए झगड़े के दो काउंटर केस को आधार बनाकर उसे और पति संदीप गौतम को न केवल गुंडा लिस्ट में डाल दिया, बल्कि जिलाबदर करने की तैयारी भी कर ली।

वीणा बोलीं- 10-15 सालों में बदल गई कॉलोनी की तस्वीर वीणा बताती हैं, ‘मेरी शादी 2003 में हुई। मेरे ससुर एसपी गौतम ने 80 के दशक में ओल्ड सुभाष नगर की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में यह घर बनवाया था। तब यह इलाका शांत था और यहां ज्यादातर हिंदू परिवार के लोग ही रहते थे। घर के पीछे एक मस्जिद जरूर थी, लेकिन कॉलोनी के पक्के मकानों में हिंदू ही रहते थे। वह बताती हैं कि अगले 15-20 सालों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई।

एक-एक कर हिंदू परिवार अपने मकान बेचकर चले गए और आज यहां गिनती के सिर्फ दो हिंदू परिवार बचे हैं। समस्या की असली जड़ उनके घर के सामने की 10 से 15 हजार वर्गफीट की खुली जमीन बनी। जैसे-जैसे इलाके का समीकरण बदला, यह खाली जमीन बहुसंख्यक समुदाय के लिए अपने उपयोग का जरिया बन गई

खुली जमीन पर पार्क बनाया तो विरोध किया वीणा के मुताबिक वहां कारें खड़ी होने लगीं, बकरे बांधे जाने लगे। हमने आपत्ति की तो दुश्मनी शुरू हो गई। वीणा ने कॉलोनी के बचे-खुचे लोगों के साथ मिलकर घर के सामने की खुली जमीन पर एक पार्क विकसित कराया, ताकि बच्चों को खेलने की जगह मिल सके। जैसे ही पार्क में गेट लगाने की बारी आई, पड़ोसियों ने पुरजोर विरोध शुरू कर दिया।

वे नहीं चाहते थे कि वह जमीन पार्क बने। वे उसे एक खुले मैदान की तरह इस्तेमाल करना चाहते थे, जहां उनकी बकरियां चर सकें। वीणा के मुताबिक वह चाहते थे कि वहां गाड़ियां खड़ी हों और जब मन चाहे, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम किए जा सकें। इस विकास के रास्ते में वीणा गौतम सबसे बड़ी बाधा थीं, और यहीं से उन्हें घर बेचकर चले जाने के लिए दबाव बनाने का सिलसिला शुरू हुआ।

वीणा के मुताबिक उनके पड़ोसियों ने गार्डन बनाने का विरोध किया था।

लॉकडाउन में बेहद परेशान किया ताकि घर छोड़ दे वीणा के मुताबिक दबाव बनाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए गए। घर के सामने दिनभर 8-10 लड़कों का झुंड खड़ा रहता। वे सिगरेट पीते, फब्तियां कसते और माहौल को इतना तनावपूर्ण बना देते कि घर की महिलाओं और बच्चों का बाहर निकलना दूभर हो गया। वीणा की बेटी ने डर के मारे घर की सीढ़ियों से नीचे उतरना ही बंद कर दिया।

वीणा बताती हैं, ‘जब हम सब लॉकडाउन में अपने घरों में बंद थे, तब वे लोग सड़क पर कुर्सियां डालकर बैठते थे। उनके यहां लोगों का आना-जाना लगा रहता, ठहाके गूंजते। सोशल डिस्टेंसिंग का कोई पालन नहीं होता था।

हमें यहां से भगाने के लिए हालात इतने बिगाड़ दिए गए कि हमारे घर के सामने आते ही कचरे वाली गाड़ी का माइक बंद कर दिया जाता था। मुझे बच्चों को गैलरी में खड़ा करना पड़ता था कि देखो, गाड़ी आई या नहीं।

ये वीडियो वीणा ने ही  दिया है जिसमें दो पक्षों के बीच विवाद होता दिख रहा है।

सीवरेज लाइन बंद की, पानी आने नहीं दिया जब इन सब से भी बात नहीं बनी, तो घर के दूसरी ओर रहने वाले मुस्लिम परिवार ने उनकी सीवेज लाइन बंद कर दी। घर के बाथरूमों में गंदा पानी उलटा भरने लगा। गंदगी कमरों तक आ गई, पूरे घर में बदबू फैल गई। उन्हें रोज स्वीपर बुलाकर सफाई करानी पड़ती।

हद तो तब हो गई जब कॉलोनी में नर्मदा जल की पाइपलाइन बिछाई गई, तो उनके घर की ओर आने वाली मेन लाइन ही नहीं डालने दी गई। वीणा ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई

पुलिस ने परिवार के खिलाफ ही मामला दर्ज किया पड़ोसियों से विवाद जब थाने पहुंचा, तो पुलिस ने वीणा और उनके परिवार को ही अपराधी बना दिया। ऐशबाग पुलिस ने वीणा गौतम का नाम धारा 110 की गुंडा सूची में शामिल करने के लिए एसडीएम कोर्ट में एक रिपोर्ट पेश की।

उस रिपोर्ट में लिखा था- “अभिरुचि परिसर, मकान नंबर 65 निवासी वीणा गौतम पत्नी संदीप गौतम आदतन अपराधी है, जिसके विरुद्ध थाना ऐशबाग व अन्य थानों में 3 अपराध पंजीबद्ध हैं।

आरोपी की गाली-गलौज करने, मारपीट करने, धमकी देने आदि की प्रवृत्ति इतनी अधिक बढ़ गई है कि यदि आरोपी को बॉन्ड ओवर नहीं कराया गया तो उसके द्वारा विवाद करने की पूर्ण संभावना है। इससे क्षेत्र में शांतिभंग होने की भी संभावना है। अतएव अनावेदिका को अधिक से अधिक धनराशि के जमानत मुचलके पर बॉण्ड ओवर करने की कृपा करें। जिससे शांति पूर्वक चुनाव सम्पन्न हो सके और नगर की शांति व्यवस्था बनी रहे।

वीणा का मकान जिसके बगल में एक मुस्लिम परिवार रहता है।

पुलिस ने घोषित किया आदतन अपराधी

जब वीणा को यह नोटिस मिला तो वह चौंक गईं। उन्होंने पुलिस का प्रतिवेदन देखा तो पता चला कि उनके ‘गुंडा’ होने का आधार तीन केस थे। इनमें से दो केस वही थे जो पड़ोसियों से हुए विवाद के बाद दर्ज हुए थे। वीणा बताती हैं, ‘जब पड़ोसियों ने हमसे लड़ाई की, तो मैंने थाने पहुंचकर उनके खिलाफ प्रकरण (007/20) दर्ज कराया था।

मेरे घर आने के बाद पुलिस ने उनकी ओर से भी एक काउंटर केस (008/20) दर्ज कर लिया। इसी तरह दूसरा प्रकरण भी एक काउंटर केस ही था। तीसरा मामला एक मामूली कार दुर्घटना का था। इन्हीं तीन केसों के आधार पर पुलिस ने मुझे आदतन अपराधी घोषित कर दिया था।

कोर्ट में लड़ी खुद के सम्मान की लड़ाई एक वकील होने के नाते वीणा कानून की बारीकियों को समझती थीं। उन्होंने इस झूठी कार्रवाई के खिलाफ लड़ने का फैसला किया। उन्होंने आरटीआई लगाकर शहर के सभी थानों से अपने खिलाफ दर्ज प्रकरणों की जानकारी मांगी। हर थाने से जवाब आया कि उनके खिलाफ कोई प्रकरण दर्ज नहीं है। यह लड़ाई आसान नहीं थी।

वह बताती हैं, ‘मैं पेशी पर सुबह 11 बजे पहुंच जाती थी, तब बाबू बताते थे, साहब आए नहीं हैं। मैं घंटों इंतजार करती। कई बार दोपहर बीत जाती, तब पेशी होती। इधर पुलिस वाले ठीक मौके पर वर्दी में पहुंचते, शायद दबाव बनाने के लिए, लेकिन मैंने अपना पक्ष रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने एसडीएम कोर्ट में सारे सबूत पेश किए।

वीणा ने बताया कि थाना प्रभारी ऐशबाग द्वारा झूठा और दुर्भावना से ग्रसित होकर यह इस्तगासा प्रस्तुत किया गया है। जब एसडीएम ने पुलिस से उनके “गुंडा” होने के सबूत मांगे, तो तत्कालीन थाना प्रभारी अजय नायर और एसआई गौरव पांडे उन तीन एफआईआर के अलावा कुछ भी पेश नहीं कर सके। आखिरकार एसडीएम कोर्ट ने पुलिस का इस्तगासा खारिज कर दिया।

वीणा ने अपने केस की लड़ाई कोर्ट में खुद लड़ी।

पुलिस वालों के खिलाफ दायर किया मानहानि का मुकदमा एसडीएम कोर्ट में यह तो साबित हो गया था कि पुलिस की कार्रवाई गलत थी, लेकिन वीणा यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने कहा, “पुलिस ने मुझे फंसाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।” उन्होंने साथी वकीलों से सलाह की और अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के लिए कोर्ट में मानहानि का केस दायर कर दिया।

कोर्ट में उन्होंने बताया कि उनका परिवार हमेशा से प्रतिष्ठित रहा है और दो दशक से ज्यादा की वकालत में उन्होंने समाज में इज्जत कमाई है, लेकिन पुलिस की इस झूठी कार्रवाई ने उन्हें और उनके परिवार को बदनाम कर दिया। उन्होंने तथ्यों के साथ बताया कि कैसे गुंडा लिस्ट में नाम डालने की खबर फैलने के बाद उनके पास केस आने कम हो गए और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।

लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने उनके पक्ष को सही पाया और ऐशबाग के तत्कालीन थाना प्रभारी अजय नायर और एसआई गौरव पांडे पर 2 लाख रुपए का हर्जाना लगाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *