मप्र में ई-व्हीकल खरीदने पर अब आम लोगों को न तो सब्सिडी मिलेगी और न ही किसी तरह का इन्सेंटिव मिलेगा। दरअसल, सीनियर अफसरों की कमेटी ने नई ईवी पॉलिसी में से ये सारी छूट देने से इनकार कर दिया है।
बता दें, इससे पहले नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग पॉलिसी का जो ड्रॉफ्ट तैयार किया था उसमें टू-व्हीलर, थ्री व्हीलर और फोर व्हीलर खरीदने पर 10 हजार से 10 लाख रुपए तक की छूट देने का प्रावधान किया था। इस पर वित्त विभाग को आपत्ति थी।
छूट देने के बाद सरकार के खजाने पर तीन हजार करोड़ से ज्यादा का वित्तीय भार पड़ने वाला था। इस आपत्ति के बाद शुक्रवार को सीनियर अफसरों की कमेटी ने नए सिरे से पॉलिसी के ड्रॉफ्ट को लेकर मंथन किया और सब्सिडी के साथ इन्सेंटिव के प्रावधान को हटा दिया है।
अब ईवी खरीदने पर टैक्स और रजिस्ट्रेशन पर छूट मिलेगी। ये भी केवल एक साल के लिए है यानी पॉलिसी लागू होने के बाद जो लोग एक साल के भीतर ईवी खरीदेंगे उन्हें इसका फायदा मिलेगा।
पढ़िए क्या थी पुरानी पॉलिसी और इसमें क्या बदलाव किया है…
क्यों लाई जा रही EV पॉलिसी ?

अब 3 पॉइंट्स में जानिए पॉलिसी में पहले क्या था और क्या बदल गया
1.कैपिटल सब्सिडी
पहले: ई-व्हीकल पर छूट मिलने वाली थी
नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग ने पॉलिसी का जो ड्रॉफ्ट तैयार किया था उसमें इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और फोर-व्हीलर खरीदने पर 10 हजार से 10 लाख रु. तक की कैपिटल सब्सिडी देना शामिल किया था। पांच साल में 1 लाख टू व्हीलर पर 10 हजार की, तो 10 हजार ईवी कार पर 50 हजार रुपए की सब्सिडी देना तय किया था। इसी तरह ई- थ्री व्हीलर, ई-एम्बुलेंस, ई- बस के लिए भी छूट के प्रावधान किए गए थे।
बदलाव:अब ये छूट नहीं मिलेगी। सीनियर अफसरों की कमेटी ने पॉलिसी से इस कॉलम को ही हटा दिया है।
2.चार कैटेगरी के इन्सेंटिव
पहले: बैटरी, पुरानी गाड़ियों के बेचने पर भी छूट
सब्सिडी के साथ चार तरह के इन्सेंटिव देने का भी पॉलिसी में प्रावधान किया गया था। इसमें बैटरी कैपेसिटी, रेगुलेटरी, स्कैप और रेट्रोफिटिंग इन्सेंटिव देना तय किया था। पॉलिसी पीरियड यानी पांच साल तक के लिए ये प्रावधान किया गया था।
बदलाव: अब केवल रेगुलेटरी इन्सेंटिव यानी टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट का प्रावधान है। इसकी अवधि भी 5 साल से घटाकर 1 साल कर दी है। केंद्र सरकार की पॉलिसी के मुताबिक ई व्हीकल खरीदने पर 4% रोड टैक्स लगता है। मगर, मप्र सरकार की मौजूदा पॉलिसी में ये 1% है, यानी सरकार पहले ही ई व्हीकल को 3% की छूट दे रही है।
एमपी में इस तरह मिलेगी टैक्स-रजिस्ट्रेशन पर छूट

3. चार्जिंग स्टेशन पर सब्सिडी बरकरार
इलेक्ट्रिक व्हीकल का सबसे अहम कंपोनेंट बैटरी है। एक डेडिकेटेड चार्जिंग स्टेशन से ईवी की बैटरी चार्ज होती है। नई पॉलिसी में चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने पर जोर है। सीनियर अफसरों की कमेटी ने इस पर दी जा रही सब्सिडी पर रोक नहीं लगाई है। इसका फायदा दो तरह से मिलेगा।
1.सरकार जमीन देगी
- नोडल एजेंसी चार्जिंग स्टेशन के लिए लैंड बैंक का डेटा बेस तैयार करेगी।
- जिन्हें चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना है उन्हें MPEV पोर्टल से अप्लाय करना होगा।
- प्राइवेट प्लेयर्स का सिलेक्शन टेंडर से किया जाएगा।
- नोडल एजेंसी टेंडर की शर्तों के मुताबिक चार्जिंग स्टेशनों को जमीन देगी।
- सरकारी एजेंसियों को 10 साल के पट्टे पर जमीन मिलेगी।
2.बिजली की आपूर्ति
- चार्जिंग स्टेशन को पूरे 5 साल तक एक रेट पर बिजली मिलेगी। ये बिजली की औसत लागत से ज्यादा नहीं होगी।
- सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक बिजली की लागत औसत लागत का 0.8 गुना होगी। शाम को ये औसत लागत का 1.2 गुना होगी।
- जो चार्जिंग स्टेशन खुद बिजली बनाएंगे उन्हें पॉलिसी पीरियड तक 100 फीसदी की छूट मिलेगी।
- एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी तय करेगी चार्जिंग स्टेशन ग्राहकों से कितना सर्विस चार्ज वसूल करेंगे। ये टैरिफ का 1 फीसदी तक हो सकता है।
चार्जिंग स्टेशन के लिए 1.5 लाख से 10 लाख तक की सब्सिडी

ईवी पॉलिसी लागू करने बनेगा प्रमोशनल बोर्ड
ईवी पॉलिसी को लागू करने और इसके क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में MPEV प्रमोशनल बोर्ड का गठन होगा। बोर्ड में तीन विभागों के मंत्री और 6 विभागों के प्रमुख सचिव, अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी सदस्य होंगे। नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग पॉलिसी लागू करने वाली नोडल एजेंसी रहेगी।
सीएम की अध्यक्षता में बनेगा बोर्ड, 3 विभागों के मंत्री होंगे सदस्य

एमपी के पांच शहर बनेंगे ईवी सिटी
साल 2019 की पॉलिसी में भी सरकार ने इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को ईवी सिटी बनाने का प्रावधान किया था। ये पॉलिसी में भी इन पांचों शहरों को ईवी सिटी बनाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत अगले पांच साल में इन शहरों में चलने वाले पेट्रोल-डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक व्हीकल में बदला जाएगा।
इसके अलावा 5 साल का पॉलिसी पीरियड खत्म होने तक टू-व्हीलर का 40 फीसदी, थ्री व्हीलर का 70 फीसदी, फोर व्हीलर का 15 फीसदी और ई बस के 40 फीसदी रजिस्ट्रेशन का टारगेट सरकार ने तय किया है। नगर निगम और नगर पालिका की कचरा गाड़ियों को भी इलेक्ट्रिक व्हीकल में बदला जाएगा।
दूसरे राज्यों के मुकाबले मप्र में इलेक्ट्रिक व्हीकल की बिक्री
