बिहार वोटर लिस्ट फर्जीवाड़ा: गयाजी के मकान नंबर-6 में 947 वोटर, कांग्रेस ने इसे वोट चोरी का सबूत बताया; आयोग बोला ‘नोशनल हाउस नंबर’, विपक्ष ने BJP पर लगाया चुनावी हेराफेरी का आरोप”

‘बिहार में चुनाव आयोग का बड़ा फर्जीवाड़ा, जबरदस्त वोट चोरी का सबूत! पूरे बूथ के 947 वोट एक ही घर में! निदानी गांव, बोधगया (बूथ नं. 161, बाराचट्टी विधानसभा) में इलेक्शन कमीशन ने चमत्कार कर दिया। वोटर लिस्ट में 947 वोटर एक ही घर (मकान नंबर 6) में रहते हैं। निदानी में सैकड़ों घर और परिवार हैं, मगर लिस्ट में पूरा गांव एक काल्पनिक मकान में समा गया।’

28 अगस्त को 4:31 बजे ये पोस्ट कांग्रेस लीडर सुप्रिया श्रीनेत ने की थी। रात 9:43 बजे कांग्रेस के ऑफिशियल एक्स अकाउंट से भी एक वीडियो पोस्ट किया गया, जिसमें दावा है कि वोटर लिस्ट में गयाजी जिले के निदानी गांव में पूरे गांव का एक ही मकान नंबर है।

कांग्रेस के इस दावे की पड़ताल की। पड़ताल के दौरान पता चला कि फतेहपुर ब्लॉक के पहाड़पुर गांव के मकान नंबर 1 में 896 लोग रह रहे हैं। यह दावा वोटर लिस्ट में दर्ज नाम और उनके मकान नंबर के आधार पर किया गया। दैनिक भास्कर की टीम दोनों गांवों में गई और यहां के लोगों को वोटर लिस्ट दिखाकर पूरा मामला समझा।

कांग्रेस लीडर सुप्रिया श्रीनेत ने ये पोस्ट 28 अगस्त को की थी। इसमें उन्होंने दावा कि निदानी गांव लोकतंत्र की चोरी का जीता-जागता सबूत है।

निदानी गांव, जिला- गयाजी

एक घर में 947 वोट, लोग बोले- हमसे कभी मकान नंबर नहीं पूछा गया

 

निदानी गांव की आबादी करीब 2500 है। यह गांव मोहनपुर ब्लॉक में आता है। 947 वोटर वाला घर वार्ड नंबर 11 में है। हम दिन के 11 बजे यहां पहुंचे। चौपाल पर कुछ लोग बैठे मिले। उन्हें वोटर लिस्ट दिखाई। सभी ने नाम देखे और बताया कि सारे लोग इसी गांव के हैं।

हमने पूछा, ‘गांव में कोई ऐसा घर है, जिसमें 947 लोग रहते हों?’ सवाल सुनकर वे हंसे, फिर एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। एक बुजुर्ग बोले, ‘क्या मजाक कर रहे हैं। यहां किसी घर में 10-12 से ज्यादा लोग नहीं हैं। 947 लोग तो हमारे पूरे टोले में नहीं होंगे।’

यहीं हम सुरेश साव, ज्ञानचंद पासवान और रामबली से मिले। वोटर लिस्ट के मुताबिक, तीनों का मकान नंबर 6 है। हकीकत में तीनों के घर एक-दूसरे से आधा किमी दूर हैं। तीनों अलग-अलग कम्युनिटी से हैं। सुरेश साव कहते हैं, ‘जब से होश संभाला है और वोटर लिस्ट में नाम देखा है, तब से मकान नंबर 6 ही लिखा है।’

सुरेश साव बताते हैं, ‘वोटर लिस्ट में किसी का नाम जुड़ता है, तो उसमें मकान नंबर 6 ही लिखा रहता है। आज तक किसी ने आपत्ति नहीं जताई और न ही कभी वोटिंग से रोका गया।’

गांव के महेश यादव वोटर कार्ड दिखाते हुए कहते हैं, ‘सिर्फ मेरे कार्ड में नहीं, गांव के सभी लोगों के वोटर कार्ड में मकान नंबर 6 ही लिखा है। हम सभी अलग-अलग घरों में रहते हैं। गांव में मकान का नंबर नहीं होता। आज तक किसी के घर पर नंबर प्लेट लगी ही नहीं।’

अरविंद कुमार बताते हैं, ‘मुझे खुद नहीं पता कि मेरे मकान का नंबर क्या है। गांव में कई टोले है। सभी में अलग-अलग कम्युनिटी के लोग रहते हैं। सभी अलग-अलग घरों में रहते है। मैं साहू टोला में रहता हूं। वोटर लिस्ट में सभी का मकान नंबर 6 लिखा है, लेकिन इसमें सच्चाई नहीं है।’

गांव के देवेंद्र मिस्त्री बताते हैं, ‘गांव में 700 से ज्यादा घर हैं। सभी का मकान नंबर एक ही लिखना, बड़ी गलती है।’

BLO बोले- हमेशा से घरों के एक जैसे नंबर, ये SIR की वजह से नहीं 947 वोटर का मकान नंबर 6 कैसे हो गया है, ये गलती किस लेबल पर हुई और इसे अब तक क्यों नहीं सुधारा गया, ये जानने हम गांव के बूथ लेबल ऑफिसर (BLO) अरुण कुमार से मिलने पहुंचे, लेकिन वे नहीं मिले। हमने उन्हें फोन किया।

अरुण कुमार ने बताया, ‘मैं हाल में इस गांव का BLO बना हूं। मेरी तरफ से कोई गलती नहीं हुई। मैं BLO बना, उससे पहले से गांव के सभी लोगों का मकान नंबर 6 ही था। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR में मकान नंबर डालने का ऑप्शन नहीं था। इसे सुधारने के लिए कई बार ब्लॉक लेवल की मीटिंग में अफसरों से कहा, लेकिन यह सही नहीं हुआ।’

‘अधिकारियों को बताया तो बोले- अपना काम करो’

गांव में पता चला कि अरुण कुमार से पहले सुशील कुमार गांव में BLO थे। हमने सुशील से बात की। वे बताते हैं, ‘ऐसा नहीं है कि SIR में गलती की गई है। मैं BLO बना था, तब भी सबका मकान नंबर 6 था। कई साल से यही चलता आ रहा है।’

‘मैं इलेक्शन कमीशन की मीटिंग में सवाल करता था कि सबका मकान नंबर 6 क्यों लिखा जाता है, तो अधिकारी कहते थे- आप अपना काम कीजिए, सरकार को जो करना होगा, वह करेगी।’

‘नए लोगों का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ा जाता है, तो उनके माता-पिता के मकान नंबर से नए वोटर का मकान नंबर दर्ज किया जाता है। इससे नए वोटर का मकान नंबर 6 ही दर्ज होता गया। इससे वोटर लिस्ट के सारे लोग एक ही घर में रहने वाले हो गए, हालांकि ऐसा नहीं है। सभी अलग-अलग घरों में रहते है।

अगर BLO ये मसला मीटिंग में बता रहे थे, तब ये गलती क्यों नहीं सुधारी गई? यह जानने हम मोहनपुर ब्लॉक के ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर विकास कुमार से मिलने पहुंचे। वे BLO के साथ मीटिंग कर रहे थे। उन्होंने हमें चैंबर में बैठने के लिए कहा।

करीब एक घंटे इंतजार करने के बाद विकास कुमार चैंबर में आए। हमने उनसे जैसे ही सवाल किया, वे गुस्सा हो गए। तुरंत वीडियो रिकॉर्ड करने से रोक दिया और कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। इसके बाद वे अपने ऑफिस से निकल गए।

पहाड़पुर गांव, फतेहपुर ब्लॉक 998 वोटर, 896 वोटर का मकान नंबर एक

निदानी गांव से पहाड़पुर करीब 20 किमी दूर है। ये गांव फतेहपुर ब्लॉक में है। वोटर लिस्ट के मुताबिक, इस गांव के 896 लोग मकान नंबर एक में रहते हैं। हमने यहां के लोगों को वोटर लिस्ट दिखाई और पूछा कि क्या इतने लोग एक ही घर में रहते हैं।

गांव के मनोज कुमार बताते हैं, ‘वोटर लिस्ट के सारे लोग पहाड़पुर के रहने वाले हैं, लेकिन सभी का अपना-अलग घर है। गांव में किसी भी मकान का नंबर नहीं है। यह गलती चुनाव आयोग के तरफ से की गई है।’

गांव के ही अनुज दावा करते हैं, ‘किसी ने कभी मकान नंबर पूछा ही नहीं। न वोटर लिस्ट में नाम जोड़ते हुए और न SIR के वक्त। गांव में 500 से ज्यादा घर हैं। सभी का नंबर एक कर दिया है।’

गांव के BLO अरविंद कुमार बताते हैं, ‘ये काफी पहले से चलता आ रहा है। SIR में मकान नंबर नहीं देना था। यहां पहले से सभी का मकान नंबर एक है। इसे सुधारने के लिए कई बार अफसरों से कहा, लेकिन किसी ने भी नहीं सुना।’

हमने इस मामले में गयाजी के DM शशांक शुभंकर से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं मिले।

कटिहार के बिनोदपुर में 82 नंबर मकान में 197 वोटर

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट कर दावा किया था कि कटिहार के बिनोदपुर में मकान नंबर 82 में 197 वोटर रजिस्टर्ड हैं, जबकि ये मकान बंद रहता है। दैनिक भास्कर की टीम ने इसकी भी पड़ताल की। लोगों ने बताया कि ये घर शारदा देवी का है। उनका परिवार हर साल यहां पूजा कराने आता है। गांववालों के मुताबिक, कांग्रेस की एक टीम भी इसकी जांच करने आई थी।

कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष प्रेम राय कहते हैं कि बात मकान की हो रही है, जबकि असली मुद्दा बल्क वोटरों का है। हमारी टीम ने 222 नंबर बूथ के 82 नंबर मकान की जांच की। उसमें 197 वोटर मिले। इसी तरह 223 नंबर बूथ के 15 नंबर मकान में 86 वोटर रजिस्टर्ड थे। अब तक 7-8 वार्ड की जांच की है और हर जगह 50 से ज्यादा बल्क वोटर मिले हैं।

कटिहार के DM मनेश कुमार मीणा ने इस पर कहा कि बिनोदपुर के मकान नंबर 82 में 197 वोटर होने की बात गलत है। वोटर लिस्ट में लिखा मकान नंबर नोशनल हाउस नंबर होता है। ये काल्पनिक नंबर होता है। सही एड्रेस वोटर के एपिक कार्ड पर होता है।’

197 वोटर या इस तरह के आंकड़े भ्रम फैलाने के लिए पेश किए जा रहे हैं। बूथ लेवल ऑफिसर सभी वोटर का वेरिफिकेशन करते हैं। डॉक्यूमेंट की जांच के बाद ही उनका नाम लिस्ट में शामिल होता है।

जमुई में एक मकान नंबर पर 230, मुजफ्फरपुर में 269, और पटना में 567 वोटर

गया से पहले बिहार के जमुई, मुजफ्फरपुर और पटना जिले में भी ऐसे मामले सामने आए थे। पटना जिले के मोकामा विधानसभा सीट के बूथ नंबर 329 की वोटर लिस्ट में 726 वोटर का मकान नंबर 24 दर्ज है। पटना साहिब के बूथ नंबर 40 के मकान नंबर 49 पर 567 और दीघा विधानसभा सीट के बूथ नंबर 20 में मकान नंबर एक पर 267 लोगों के नाम हैं।

दूसरे जिले जमुई के अमीन गांव में एक ही पते पर 230 वोटर के नाम दर्ज हैं। मकान नंबर 3 में 230 लोगों का नाम है। मुजफ्फरपुर की भगवानपुर विधानसभा सीट के बूथ नंबर 370 पर 629 वोटर हैं। इनमें 337 पुरुष और 292 महिलाएं हैं। इनमें से 269 वोटर का मकान नंबर 27 लिखा है। यानी बूथ के करीब 43% वोटर मकान नंबर 27 में रहते हैं।

चुनाव आयोग का दावा: जिन घरों के नंबर नहीं, उन्हें नोशनल हाउस नंबर दिए

आखिर में हम बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल से मिले। उनसे पूछा कि कैसे इतने वोटर के साथ एक मकान नंबर दर्ज कर दिया गया? गुंजियाल बताते हैं, ‘बिहार में किसी घर का मकान नंबर नहीं रहता है।’

‘वोटर लिस्ट में दर्ज मकान नंबर नोशनल हाउस नंबर हैं। यह नंबर तब दिया जाता है, जब किसी वोटर का मकान नंबर नहीं होता। कई गांवों, झुग्गियों या अस्थायी बस्तियों में घरों पर स्थायी मकान नंबर नहीं होते। ऐसे में BLO वहां जाते हैं और हर घर को खुद से एक नंबर जैसे 1, 2, 3 दे देते हैं। यह नंबर सिर्फ लिस्ट बनाने में सुविधा और मतदाताओं को सही क्रम में दर्ज करने के लिए दिया जाता है।’

RJD प्रवक्ता बोले- एक घर में सैकड़ों वोटर, फिर कैसा SIR हुआ

RJD के प्रवक्ता एजाज अहमद कहते हैं, ‘निदानी और पहाड़पुर गांव का मामला चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल है। तेजस्वी यादव पहले से चेतावनी देते रहे हैं कि SIR के नाम पर गड़बड़ियां की जा रही हैं। सरकार में शामिल नेताओं के दो-दो एपिक नंबर और अलग-अलग जगह वोटर लिस्ट में नाम होना, इस बड़े खेल का सबूत है। BJP, JDU और NDA को फायदा पहुंचाने के लिए SIR किया गया है।

कांग्रेस प्रवक्ता बोले- वोट चोरी से चुनाव जीतने की कोशिश

कांग्रेस प्रवक्ता ज्ञान रंजन कहते हैं, ‘राहुल गांधी ने बिहार में SIR प्रक्रिया की खामियां उजागर की हैं। यह सब BJP को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है, ताकि वोट चोरी के जरिए चुनाव जीता जा सके।’

बिहार में राहुल और तेजस्वी निकाल रहे वोटर अधिकार यात्रा

बिहार में महागठबंधन में शामिल पार्टियां वोटर अधिकार यात्रा निकाल रही हैं। इसमें कांग्रेस से राहुल गांधी, RJD से तेजस्वी यादव के अलावा सहयोगी पार्टियों के नेता शामिल हैं।

17 अगस्त को सासाराम जिले के रोहतास से शुरू हुई ये यात्रा एक सितंबर को पटना के गांधी मैदान में खत्म होगी यात्रा के रूट में 23 जिले शामिल किए गए हैं। ये यात्रा चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी खासकर SIR के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाने के विरोध में शुरू की गई है। 29 अगस्त को 13वें दिन यात्रा बेतिया होते हुए गोपालगंज पहुंच गई।

राहुल का आरोप- बेंगलुरु की महादेवपुरा सीट पर एक लाख से ज्यादा वोट चोरी

राहुल गांधी ने बीते 7 अगस्त को आरोप लगाया था कि कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में महादेवपुरा विधानसभा सीट पर 1 लाख से ज्यादा वोट चोरी हुए हैं। वोटर लिस्ट दिखाते हुए उन्होंने कहा कि यहां के 6.5 लाख वोट में से एक लाख वोटों की चोरी हुई है। यहां गलत पते, एक ही पते पर बल्क वोटर और डुप्लीकेट वोटर्स का पता चला।

राहुल गांधी ने दिल्ली में पत्रकारों के सामने महादेवपुरा विधानसभा सीट का डेटा दिखाकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए थे।

राहुल ने कहा, ‘लोकसभा चुनाव में हम कर्नाटक की 16 सीटें जीतते, लेकिन हम सिर्फ 9 सीटों पर जीते। हमने 7 हारी हुई सीटों में से एक बेंगलुरु सेंट्रल सीट पर जांच की। यहां कांग्रेस को 6,26,208 और BJP को 6,58,915 वोट मिले थे। दोनों पार्टियों को मिले वोटों का अंतर सिर्फ 32,707 था। महादेवपुरा असेंबली सीट पर दोनों पार्टियों के बीच वोट का अंतर 1,14,046 था।’

‘पड़ताल से सामने आया कि सीट पर 11,965 डुप्लीकेट वोटर थे। 40,009 वोटर के एड्रेस फेक थे। 10,452 वोटर का एक ही पता था। 4,132 वोटर गलत पते पर दर्ज थे। 33,692 वोट में फॉर्म 6 का गलत इस्तेमाल किया गया।’

फॉर्म 6 नए वोटर के लिए होता है, जिसने पहले कभी वोटर कार्ड नहीं बनवाया है। वह अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए आवेदन करता है। इस तरह इस एक सीट पर एक लाख से ज्यादा फर्जी वोट डाले गए।

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