भोपाल में भाजपा के सेनानी रहे, सहज, सरल और सबके प्रिय ‘मम्मा’ नहीं रहे…कौशल किशोर चतुर्वेदी

भोपाल में भाजपा के सेनानी रहे, सहज, सरल और सबके प्रिय ‘मम्मा’ नहीं रहे…

भोपाल में भाजपा को स्थापित करने वाले गिने-चुने सेनानियों में एक नाम सुरेंद्र नाथ सिंह का था। जब पार्टी कांग्रेस से संघर्ष कर रही थी और कार्यकर्ता मुट्ठी भर भी नहीं थे, तब सुरेंद्र नाथ सिंह जैसे नेताओं ने संघर्ष कर पार्टी की ठोस जमीन तैयार की। और देखते ही देखते इन सेनानियों की मेहनत रंग लाई और समय ने करवट बदलकर मध्यप्रदेश में कमल खिला दिया। शिवराज सिंह चौहान, सुरेंद्र नाथ सिंह, अशोक पांडेय, आलोक शर्मा, आलोक संजर, भगवानदास सबनानी और विकास विरानी संघर्ष के उन्हीं दिनों के साथी थे। अशोक पांडेय के बाद अब सुरेंद्र नाथ सिंह भी दुनिया से विदा हो गए। सुरेंद्र नाथ सिंह को प्यार से सभी ‘मम्मा’ कहकर पुकारते थे। और ‘मम्मा’ की बैठक से समता चौक आबाद रहता था। मम्मा की सहजता, सरलता ऐसी थी कि वह सड़क चलते समस्याओं का समाधान कर देते थे। और समता की बैठक में तो सभी के काम बड़े आराम से हो जाते थे। इसी सहजता और सरलता से ‘मम्मा’ सबके प्रिय थे।

ऐसे भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक सुरेंद्र नाथ सिंह (मम्मा) ने 11 मार्च 2025 की सुबह करीब 4 बजे अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से बीमार थे। 62 वर्षीय सुरेंद्र नाथ सिंह भोपाल की मध्य विधानसभा सीट से विधायक भी रहे हैं। वो भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) के अध्यक्ष भी रहे हैं। वह भाजपा जिलाध्यक्ष भी रहे। और अनगिनत भाजपा कार्यकर्ता तैयार करते रहे।हालांकि सुरेंद्रनाथ सिंह भाजपा की सक्रिय राजनीति से काफी समय से दूर थे। बावजूद इसके पार्टी से लेकर आम लोगों तक उनकी एक अलग ही पहचान थी। उन्होंने भोपाल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद पर रहते हुए भोपाल के विकास व जनकल्याण के लिए कई कार्य किए। वहीं, विधायक रहते हुए वो अपने विधानसभा क्षेत्र में कभी भी कुछ न कुछ कार्य करते नजर आते थे। कभी वो नाली की सफाई करने खुद ही उसमें कूद पड़ते तो कभी सड़क झाड़ने के लिए खुद झाड़ू उठा लेते। उनके इसी अंदाज से वो क्षेत्र के हर वर्ग-समुदाय के बीच विशेष स्थान रखते थे। और उनका यह स्थान अब हमेशा के लिए रिक्त हो गया है। हालांकि संघर्ष का यह योद्धा लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगा।

वर्ष 1985

में रिलीज हुई फिल्म अलग-अलग का एक गीत दिल को छूने वाला है। इसे लता मंगेशकर ने आवाज दी थी और संगीतकार आर.डी. बर्मन थे। आइए इस गीत के जरिए जीवन की सच्चाई को जीते हैं..

दूर, बहुत दूर, बहुत दूर

आसमान पर रहता है एक जादूगर

क्या-क्या खेल दिखाता है

कभी हमें हँसाता है, कभी हमें रुलाता है

इस जीवन की यही है कहानी

ओ, इस जीवन की यही है कहानी

इस जीवन की यही है कहानी

आनी-जानी ये दुनिया, बहते दरिया का पानी

इस जीवन की यही है कहानी

इस जीवन की यही है कहानी

आनी-जानी ये दुनिया, हो, बहते दरिया का पानी

फूल खिले, खिलकर मुरझाए

दीप जले, जलकर बुझ जाए

इस बगिया की रीत यही है

इक रुत आए, इक रुत जाए

कैसे बदले रीत पुरानी? कैसे बदले रीत पुरानी?

आनी-जानी ये दुनिया, बहते दरिया का पानी

इस जीवन की यही है कहानी

आनी-जानी ये दुनिया, बहते दरिया का पानी

जिस्म की मौत से फिर क्या डरना

इस मिट्टी का ग़म क्या करना

दुनिया में सब को ना जाने

कितनी बार है जीना-मरना

मौत के बाद है फिर ज़िंदगानी

मौत के बाद है फिर ज़िंदगानी

आनी-जानी ये दुनिया, बहते दरिया का पानी

ओ, बहते दरिया का पानी

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। दो पुस्तकों “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

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