भाजपा में रचने-बसने का प्रयास ज्योतिरादित्य की मजबूरी या ईमानदार पहल
* दिनेश निगम ‘त्यागी’
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए ज्योतिरादित्य सिंधिया राज्यसभा का चुनाव जीतने के बाद पहली बार सोमवार को मालवा दौरे पर थे। इस दौरान उनकी दिलचस्पी यह दिखाने में ज्यादा रही कि वे भाजपा में आए हैं तो यहीं रचना-बसना चाहते हैं। सवाल यह है कि ऐसा वे मज़बूरी के चलते कर रहे थे या यह उनकी ईमानदार पहल है। इंदौर के किसी भाजपा नेता ने उन्हें अपने घर बुलाया नहीं था लेकिन उन्होंने ताई सुमित्रा महाजन, भाई कैलाश विजयवर्गीय सहित अन्य भाजपा नेताओं के यहां जाने का कार्यक्रम बनाया। इसे सिंधिया की मजबूरी भी माना जा सकता है क्योंकि मालवा में पांच विधानसभा सीटों के लिए उप चुनाव होना है। इनमें उनके दो खास सिपहसलारों सांवेर से तुलसी सिलावट और बदनावर में राजवर्धन सिंह दत्तीगांव की राजनीति दांव पर है। सिंधिया को इन्हें उप चुनाव जिताने के लिए जितनी जरूरत सुमित्रा महाजन की है, उससे कहीं ज्यादा कैलाश विजयवर्गीय की।
0 विजयवर्गीय के साथ रहा छत्तीस का आंकड़ा….
– राजनीति कैसे-कैसे करवट लेती है, इसका बड़ा उदाहरण इंदौर बन गया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया का कैलाश विजयवर्गीय के साथ छत्तीस का आंकड़ा किसी से छिपा नहीं है। क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव में कैलाश ने एक बार सिंधिया को छोटा नेता कह दिया था। सिंधिया ने इस चुनाव में कैलाश को 70 वोटों के अंतर से हराया था। अब सिंधिया भी भाजपा में हैं। खास बात यह है कि सांवेर में चुनाव का प्रभारी विजयवर्गीय के खास विधायक रमेश मेंदोला को बनाया गया है और सीट जिताने की जिम्मेदारी कैलाश विजयवर्गीय के कंधों पर डाली गई है। लगभग इसी तरह की स्थिति बदनावर में है। वहां राजवर्धन सिंह को कैलाश की मदद की जरूरत है। साफ है कि सिलावट एवं दत्तीगांव तभी चुनाव जीतेंगे जब कैलाश विजयवर्गीय मदद करेंगे। संभवत: इसीलिए सिंधिया ने इंदौर दौरे के दौरान रात का भोजन विजयवर्गीय के घर किया और गिले शिकवे दूर करने की कोशिश की।
0 कांग्रेस पर हमला, भाजपा त्रिमूर्ति की तारीफ….
– सिंधिया राजनीतिक हालात की नजाकत को समझते हैं। संभवत: इसीलिए कांग्रेस और कमलनाथ सरकार पर लगातार हमलावर हैं। इसके साथ भाजपा नेताओं की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं। इंदौर में उन्होंने कहा भी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ में देश सुरक्षित है और लगातार तरक्की कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमने बहुत सोच समझ कर भाजपा ज्वाइन की है। सिंधिया ने मोदी के साथ अमित शाह और जेपी नड्डा की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस त्रिमूर्ति के नेतृत्व में देश आगे बढ़ेगा। सिंधिया की कोशिश यह मैसेज देने की रही कि भाजपा में वे किसी एक नेता की बदौलत नहीं है बल्कि सभी की रजामंदी से आए हैं। ऐसा कर वे विधानसभा चुनाव में अपने समर्थको को जिताने के लिए भाजपा के सभी नेताओं का समर्थन लेना चाहते हैं।
0 रूठों को मनाना होगी बड़ी चुनौती….
– सिंधिया जानते हैं कि उनके समर्थकों के साथ भाजपा में आने के कारण भाजपा के अंदर बड़े स्तर पर नाराजगी है। वे यह भी जानते हैं कि इसे कोई एक नेता दूर नहीं कर सकता क्योंकि भाजपा नेताओं के बार-बार समझाने के बावजूद कई प्रमुख नेताओं की नाराजगी दूर नहीं हुई। बागियों के कारण वे अपना भविष्य असुरक्षित देख रहे हैं। इसलिए भी सिंधिया ताई के यहां जा रहे हैं तो भाई के यहां भी। वे जानते हैं कि सभी के समर्थन के बिना उप चुनाव जीतना कठिन होगा। भाजपा के ये नेता ही रूठों को मना पाएंगे क्योंकि वे सिंधिया के प्रयास से तो मानने वाले नहीं।
0 मंदिर मसले पर कांग्रेस को कन्फ्यूज कहा ….
– सिंधिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए किए गए भूमिपूजन का समर्थन किया और कहा कि कांग्रेस अब तक इस मसले पर कन्फ्यूज है। कोई भूमिपूजन कार्यक्रम का समर्थन कर रहा है तो कोई मुहूर्त को लेकर सवाल उठा रहा है। ताला खुलवाने को लेकर कमलनाथ तथा शशि थरूर ने अलग-अलग तरह के बयान दिए। चिंता इस बात की भी है कि जिस तरह कमलनाथ ने खुद को भगवा रंग में रंगा है, इसकी वजह से कहीं भाजपा मन्दिर मुद्दे का लाभ लेने से वंचित न रह जाए। फिर सिंधिया भाजपा में सिर्फ भाजपा की सरकार बनवाने नहीं आए हैं। कांग्रेस की तरह उनकी नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है। इसके लिए जरूरी है कि उन्हें प्रदेश के साथ केंद्रीय नेतृत्व का समर्थन भी मिले। भाजपा में सिंधिया इसी रणनीति व योजना के तहत आगे बढ़ते दिखाई पड़ रहे हैं।
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