इंदौर। सुपर स्पेशलिटी में पहली बार छाती और हाथ की नसों से बाइपास सर्जरी

एमजीएम मेडिकल कॉलेज से जुड़े सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में पहली बार हार्ट की बायपास सर्जरी पैर की नसों के बजाय सीने व हाथ की नसों के जरिए की गई। इस बायपास सर्जरी को टोटल आर्टरियल रिवैस्कुलराइजेशन (टीएआर) बायपास कहते हैं। प्रदेश के किसी सरकारी अस्पताल में इस तरह का यह पहला बायपास ऑपरेशन है।

इस ऑपरेशन के दूसरे दिन ही मरीज चलना-फिरना शुरू कर देता है। इंदौर के 56 वर्षीय व्यक्ति के हार्ट की तीनों मुख्य नसों में ब्लॉकेज था, जिसका पिछले दिनों ऑपरेशन किया गया। मरीज अब स्वस्थ है। कार्डियोलाजिस्ट डॉ. एडी भटनागर ने बताया टोटल ऑर्टरियल बायपास सर्जरी कम उम्र के हृदय रोगियों के लिए वरदान की तरह है, क्योंकि 20 वर्ष में इसका सक्सेस रेट 90-95 प्रतिशत रहा है।

छाती या हाथों से ली जाती हैं नसें

कार्डियक सर्जन डॉ. पीयूष गुप्ता ने बताया शरीर में दो प्रकार की खून की नसें धमनी (आर्टरी) व शिरा (वेन) होती हैं। आर्टरी हार्ट से पूरे शरीर को खून पहुंचाती है जबकि वेन पूरे शरीर का खून हार्ट तक पहुंचाती है। अब तक बायपास सर्जरी में ज्यादातर पैर की नसों (सेफेनस वेन) का उपयोग होता रहा, जबकि टोटल आर्टरियल रिवैस्कुलराइजेशन बायपास में आर्टरी नसों (आईएमए व रेडियल आर्टरी) नसों का उपयोग करते हैं। इन नसों को हार्ट के पास छाती से या हाथों से लिया जाता है। ऑपरेशन करने वाली टीम में कार्डियक सर्जन डॉ. गुप्ता के अलावा डॉ. सुमित सिंह, डॉ. अंकुर गोयल, कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. निमिष जैन, नर्सिंग स्टॉफ की मोनिका, प्रतिभा व रजनी शामिल रहे।

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