दिल्ली से आई सीबीआई की टीम ने जबलपुर में बुधवार रात ऑर्डनेंस फैक्ट्री की जीआईएफ (ग्रे आयरन फाउंड्री) में छापा मारा है। छापे में
डीजीएम दीपक लांबा पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं
आपत्तिजनक रिकॉर्ड बरामद हुए हैं। कुछ डिजिटल साक्ष्य भी टीम के हाथ लगे हैं। सीबीआई फैक्ट्री में पदस्थ डिप्टी जनरल मैनेजर दीपक लांबा को फैक्ट्री से अपने साथ वाहन में बिठाकर किसी गोपनीय स्थान पर ले गई। यहां उनसे पूछताछ के बाद हिरासत में लेकर दिल्ली ले गई है।
आरोप है कि डीजीएम दीपक लांबा ने महाराष्ट्र में पोस्टिंग के दौरान ठेकेदार के साथ मिलकर बड़ा भ्रष्टाचार किया था। सीबीआई की इस कार्रवाई से ओएफजे (ऑर्डनेंस फैक्ट्री) समेत अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।
बता दें, जीआईएफ रक्षा मंत्रालय के आयुध निर्माणी बोर्ड की एक यूनिट है। यहां बम और तोपखाने में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स बनाए जाते हैं।
जहां रहे वहीं भ्रष्टाचार किया बताया जा रहा है कि जहां-जहां दीपक लांबा पदस्थ रहे, उन्होंने फर्जीवाड़ा किया है। इससे पहले इसी फैक्ट्री में पदस्थ एक और अधिकारी के खिलाफ सीबीआई ने कार्रवाई की थी। मामला नागपुर के अंबाझरी फैक्ट्री में निजी फर्म (आटोमेशन इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रियल सर्विसेज) के ठेके में हुए भ्रष्टाचार से संबंधित है।
जबलपुर से पहले दीपक लांबा अंबाझरी फैक्ट्री में पदस्थ थे। आरोप है कि यहां डीजीएम रहते हुए लांबा ने एक निजी फर्म को ठेके में लाभ पहुंचाया था, जिससे सरकार को लाखों रुपए का नुकसान हुआ था। इस मामले में सीबीआई लगातार जांच कर रही थी।
वाईआईएल के अधिकारी ने की थी शिकायत नागपुर की यंत्र इंडिया लिमिटेड (वाईआईएल) के डिप्टी चीफ विजिलेंस ऑफिसर डीकेटी गुप्ता ने सीबीआई को एक शिकायत सौंपी थी। जांच के बाद अंबाझरी फैक्ट्री के तत्कालीन डीजीएम दीपक लांबा, ऑटोमेशन इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रियल सर्विसेज और इस फर्म के संचालक मोहित ठोलिया पर 25 अगस्त को एफआईआर दर्ज की गई थी। इसी के बाद 3 सितंबर को छापामार कार्रवाई की गई।

डीजीएम के परिवार के खातों में संदिग्ध लेनदेन शुरुआती जांच में पता चला है कि दीपक लांबा ने अंबाझरी फैक्ट्री में डीजीएम रहते हुए एक प्रोपराइटरशिप फर्म बनाई थी। ऑटोमेशन इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रियल सर्विसेज नाम की इस फर्म के संचालक मोहित ठोलिया है। मोहित को डीजीएम का चचेरा भाई बताया गया था। निजी फर्म के बैंक खातों की जांच में लांबा और उसके परिवार के बैंक खातों में लेनदेन का पता चला है, जिसमें लांबा, उनकी पत्नी, भाई, बहन और मां शामिल हैं। इनके बीच कई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन जांच के दायरे में है।
निजी फर्म को लाभ पहुंचाने बदली शर्तें सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि चचेरे भाई की निजी सप्लायर फर्म को ठेका देने के लिए लांबा ने टेंडर की शर्तों में बदलाव किए थे। इन शर्तों को निजी फर्म के अनुकूल बनाया गया था। ठेका प्राप्त करने के लिए फर्म ने जाली अनुभव प्रमाण पत्र लगाए। इनको भी तत्कालीन डीजीएम लांबा ने अनदेखा किया।