
अब तक पूरी दुनिया ने यही माना है कि कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर से फैला है, लेकिन अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन (सीडीसी) की रिपोर्ट इसके उलट है। वह कोरोना महामारी को लेकर नया खुलासा कर रही है। इस सरकारी अध्ययन के मुताबिक अमेरिका में पिछले साल दिसंबर में ही कोरोना वायरस फैलने लगा था।
रिपोर्ट के अनुसार इसके कुछ बाद वायरस चीन में पाया गया और एक महीने के बाद स्वास्थ्य प्रशासन को पहला मामला मिला। बता दें कि कोरोना फैलने के बाद से ही अमेरिका लगातार चीन पर वायरस फैलाने का आरोप लगाता आया है। इस नए अध्ययन से दोनों देशों के तनाव और बढ़ सकता है।
सीडीसी की रिपोर्ट में यह है दावा
अमेरिका के एक मीडिया संस्थान के अनुसार स्टडी में उन सबूतों को बल मिला है, जिनके मुताबिक स्वास्थ्य प्रशासन और शोधकर्ताओं को संक्रमण के बारे में पता चलने से पहले से वायरस दुनियाभर में फैल रहा था। सीडीसी ने अमेरिकन रेड क्रॉस के कलेक्ट किए गए 7,389 ब्लड सैंपल का अध्ययन किया। इनमें से 106 में संक्रमण पाया गया।
इन मरीजों के शरीर में मिली एंटीबॉडी
ये सैंपल पिछले साल 13 दिसंबर से 17 जनवरी के बीच लिए गए थे। इन्हें बाद में यह देखने के लिए टेस्ट किया गया था कि क्या इनमें कोरोना वायरस से निपटने वाली एंटीबॉडीज हैं। रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने कहा कि ऐसा मुमकिन है कि सार्स-कोव-2 अमेरिका में पिछले साल दिसंबर में आ गया था जबकि अभी तक ऐसा माना जा रहा है कि यह यहां बाद में पहुंचा है।
चीन पर हमलावर रहा अमेरिका
दुनियाभर में कोरोना के प्रकोप के बाद अमेरिका लगातार चीन पर हमलावर रहा। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना को चीनी वायरस तक कह डाला। हालांकि चीन ने इस आरोप का खंडन किया लेकिन बाकी देशों ने उसके ऊपर जानकारी छिपाने और झूठ बोलने का आरोप लगाया।
चीन ने भारत पर लगाए आरोप
चीनी अकादमी ऑफ साइंसेज के वैज्ञानिकों के एक दल ने कहा कि कोरोना वायरस संभवत: 2019 की गर्मियों में भारत में पैदा हुआ था। चीनी दल ने दावा किया था कि कोरोना वायरस पशुओं से दूषित जल के माध्यम से इंसान में प्रवेश किया और इसके बाद वह वुहान पहुंच गया।