” ब्रह्म शक्ति ” किस तरफ…?

” ब्रह्म शक्ति ” किस तरफ…?

रोचक हुआ इंदौर का मुकाबला
दोनो प्रत्याशी ब्राह्मण वर्ग से
नेताओ के साथ विप्रजन भी संशय में

नितिन मोहन शर्मा
———————

शहर के करीब पौने 3 लाख ब्राह्मण वोटर्स किस तरफ?? ये यक्ष प्रश्न अब इंदौर नगर निगम महापौर चुनाव में सामने आ खड़ा हुआ है। कारण-कांग्रेस भाजपा के दोनो उम्मीदवारों का ब्राह्मण वर्ग से होना है। भाजपा में उम्मीदवार घोषित होने के पहले तक कांग्रेस आश्वस्त थी कि शहर का ” विप्र वर्ग ” उसकी झोली में आएगा। क्योकि सबसे पहले पार्टी ने ब्राह्मण समुदाय से प्रत्याशी तय कर दिया था। भाजपा में टिकिट को लेकर निरन्तर बढ़ रहे घमासान ने कांग्रेस की बांछे खिला रखी थी। लेकिन भाजपा ने पुष्यमित्र भार्गव ( शर्मा ) के रूप में ब्राह्मण उम्मीदवार सामने कर कांग्रेस की शुरुआती बढ़त थाम दी। ” द्विज बंधु ” के सामने भी अब संशय है कि वे अपने ही वर्ग से किसके पक्ष में खुलकर सामने आए।

कांग्रेस प्रत्याशी को जहा इस वर्ग में फिलहाल थोड़ी बढ़त दिख रही क्योकि संजय शुक्ला परिवार में ब्राह्मण एकता और ब्राह्मण संगठन को लेकर अरसे से सक्रियता चल रही है। सर्व ब्राह्मण समाज के माध्यम से सामाजिक गतिविधियों की एक लंबी फेहरिस्त शुक्ला परिवार से जुड़ी है। “बाबूजी” विष्णुप्रसाद शुक्ला स्वयम इसके अगुवाकर रहे है और अब परिवार के ही युवा विकास अवस्थी समाज के लिए निरंतर सक्रिय है। हाल ही समाज के आराध्य भगवान परशुराम जयंती पर निकली शोभायात्रा में इस बार अवस्थी का समाज के बीच मजबूत नेटवर्क नजर आया। इसके अलावा शुक्ला परिवार की सामाजिक गतिविधियों की इस श्रखला में अब समाज के ही निम्न आय वर्गीय परिवारों की मदद का अभियान भी अवस्थी की अगुवाई में शुरू हुआ है। ऐसे में ये कह सकते है कि ब्राह्मण समाज मे सक्रियता के मामले में कांग्रेस प्रत्याशी फिलहाल मुफीद स्थिति में है।
वही भाजपाई हलकों की माने तो उनका कहना है ब्राह्मण बुद्धिजीवी वर्ग है और वो किसी भी भेड़चाल में शामिल होने की बजाय विवेक से निर्णय लेता है। भाजपा के सूत्र
शुक्ला परिवार की सामाजिक गतिविधियों को स्वीकारते तो है लेकिन ये भी स्प्ष्ट करते है इस कार्य मे समाज की एक इकाई पर ही ज्यादा फोकस है। समाज की शेष इकाई उतनी बड़ी संख्या में सर्व ब्राह्मण समाज के बैनर तले नही जुटी है। ऐसे में ब्राह्मण समाज एकतरफा कांग्रेस के फेवर में जाने का सवाल ही नही।
दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी पुष्यमित्र भार्गव गोत्र ओर शर्मा उपनाम के साथ मैदान में तो है लेकिन समाजिक गतिविधियों की जगह उनकी सक्रियता था सर्व समाज वाली रही है। लिहाजा सम्पूर्ण समाज के समाज लिए भार्गव को अलग से कोई ठोस रणनीति बनाना होगी। फिलहाल भाजपाई खेमा ये सोचकर आश्वस्त है कि ब्राह्मण समुदाय भाजपा का पारंपरिक वोटर्स है।
———–
सुदर्शन के बयान ने बना दी थी एकता

कांग्रेस प्रत्याशी संजय शुक्ला का पिछला विधानसभा चुनाव ब्राह्मण विरुद्ध भाजपा हो गया था। 2018 विधानसभा चुनाव में संजय का मुकाबला उस वक्त के मौजूदा विधायक सुदर्शन गुप्ता से था। गुप्ता ने जोश जोश में एक ऐसा बयान दे दिया था जो ब्राह्मण वर्ग को आहत कर गया। परिणाम मोदी लहर के बावजूद सुदर्शन की हार के रूप में सामने आया। जबकि विधानसभा 1 का मूल चरित्र भाजपाई रहा है।
————–
ये है वोटो गणित
शहर में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या 2 लाख 75 हजार के आसपास है। टोटल मतदातओं का आंकड़ा निगम चुनाव की दृष्टि से 18 लाख 36 हजार से ज्यादा है। ऐसे में ब्राह्मण वोट निर्णायक साबित होना है। कांग्रेस के लिए ये तब ही फायदेमंद हो सकते है जब समाज का एकमुश्त वोट संजय के खाते में जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *