
कोरोना के बाद दुनियाभर के लिए देहशत का कारण बनने वाले मंकी पॉक्स का देश में मामला सामने आने के बाद अब मध्य प्रदेश पर भी इसका खतरा मंडराने लगा है। आर्थिक नगरी इंदौर में एक महिला में मंकी पॉक्स के लक्षण सामने आए हैं। मंकी पॉक्स के लक्षण मेहसूस होने के बाद स्वास्थ विभाग में हड़कंप मच गया है। फिलहाल, 54 वर्षीय महिला को होम आइसोलेशन में रखकर उसकी खास निगरानी की जा रही है। स्वास्थ विभाग ने महिला के सैंपल लेकर जांच पुणे भेजने की तैयारी कर ली है। रिपोर्ट आने तक महिला होम आइसोलेशन में ही रखा जाएगा।
कास बात ये है कि, महिला की कोई ट्रेवल हिस्ट्री नहीं है। बावजूद इसके मंकी पॉक्स के लक्षण उसमें दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग किसी तरह का रिस्क लेने के मूड में नहीं है, इसलिए महिला को आइसोलेशन में रखकर उसपर नजर रखी जा रही है।
निजी क्लीनिक में दिखाने गई थी महिला
आपको बता दें कि, महिला की तबीयत बिगड़ने के बाद वो अपना इलाज निजी क्लीनिक में कराने पहुंची थी। महिला को सर्दी-खांसी और बदन दर्द के साथ शरीर पर लाल चकत्ते हो रहे थे। उपचार में जुटे डॉक्टर को महिला में मंकी पॉक्स के लक्षण मेहसूस हुए। इसके बाद डॉक्टर ने इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी। एहतियात के तौर पर विभाग ने महिला को फिलहाल होम आइसोलेट करके रखा है।
क्या है मंकी पॉक्स?
यह बीमारी मंकीपॉक्स नाम के वायरस की वजह से होती है। मंकीपॉक्स भी स्मॉलपॉक्स (चेचक) परिवार के वायरसों का ही हिस्सा है। हालांकि, इसके लक्षण स्मॉलपॉक्स की तरह गंभीर नहीं, बल्कि हल्के होते हैं। मंकीपॉक्स बहुत कम मामलों में ही घातक होता है। यहां यह बात ध्यान देने योग्य है कि इसका चिकनपॉक्स से लेना-देना नहीं है।
जानिए मंकी पॉक्स का लक्षण
-बार-बार तेज बुखार आना।
-पीठ और मांसपेशियों में दर्द।
-त्वचा पर दानें और चकते पड़ना।
-खुजली की समस्या होना।
-शरीर में सामान्य रूप से सुस्ती आना।
-मंकीपाक्स वायरस की शुरुआत चेहरे से होती है।
-संक्रमण आमतौर पर 14 से 21 दिन तक रहता है।
-चेहरे से लेकर बाजुओं, पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों पर रैशेस होना।
-गला खराब होना और बार-बार खांसी आना।
कैसे फैलता है संक्रमण
-मंकी पॉक्स एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। ऐसे में लोगों को शारीरिक संपर्क से बचाव रखना चाहिए।
-संक्रमित व्यक्ति या किसी व्यक्ति में मंकी पॉक्स के लक्षण हैं, तो उसे तुरंत डाक्टर से संपर्क करना चाहिए।
-संक्रमित व्यक्ति को इलाज पूरा होने तक खुद को आइसोलेट रखना चाहिए।
-मंकी पॉक्स वायरस त्वचा, आंख, नाक या मुंह के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है।
-यह संक्रमित जानवर के काटने से, या उसके खून, शरीर के तरल पदार्थ, या फर को छूने से भी हो सकता है।