संजय शुक्ला ने अपने पिता श्री विष्णु प्रसाद शुक्ला जी “बड़े भैया” को लेकर कही ये बात

आप सभी को सूचित करते हुए दुःख हो रहा है कि शुक्ला परिवार के आधारस्तम्भ मेरे पूज्य पिता श्री विष्णुप्रसाद शुक्ला “बड़े भैय्या” जी अब हमारे बीच नही रहे। उनका निधन हम सभी के लिए अपूरणीय क्षति है। देव तुल्य मेरे पिता जिन्होंने देश समाज के लिए संघर्ष किया, एक वटवृक्ष की तरह कई लोगों को छाया दी और सफल कर्मठ जनसेवक बनाया। आज वे हम सभी को छोड़कर चले गए।
ऐसे महान पिता, महान गुरु को असंख्य प्रणाम, अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।

ईश्वर उनकी आत्मा को अपने श्रीचरणों में सर्वोच्च स्थान दे।। 🙏

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता विष्णु प्रसाद शुक्ला का गुरुवार शाम साढ़े चार बजे निधन हो गया। 86 वर्षीय शुक्ला लंबे समय से बीमार चल रहे थे।  वरिष्ठ बीजेपी नेता विष्णु प्रसाद शुक्ला ने अंतिम सांसे बाणगंगा स्थित घर पर ली।

वरिष्ठ भाजपा नेता विष्णु प्रसाद शुक्ला का जन्म 1937 में जानापाव के नजदीक जामली ग्राम में हुआ था। बड़े भैया का 86 वर्ष की उम्र में देवलोक गमन हुआ। बड़े भैया के 2 पुत्र राजेंद्र शुक्ला और विधायक संजय शुक्ला है।

निधन हो जाने की दुखद खबर जैसे ही शहरवासियों को मिली उनके बीच शोक की लहर छा गई। बाणगंगा क्षेत्र में अपना प्रभाव रखने वाले बड़े भैया अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ कर गए हैं। बड़े भैया की अंतिम यात्रा कल प्रातः दुर्गा भवन से मुक्तिधाम पहुंचेगी। गौरतलब है कि स्वर्गीय बड़े भैया का भारतीय जनता पार्टी में एक समय स्वर्णिम समय था जब उनके राजनीतिक गुरु फूलचंद वर्मा सांसद और प्यारेलाल खंडेलवाल का मार्गदर्शन उनके साथ था।

पूरा परिवार ही राजनीति से जुड़ा
विष्णु प्रसाद शुक्ला का पूरा परिवार भाजपा से जुड़ा है। सिर्फ़ उनके एक बेटे संजय कांग्रेस से विधायक है। हाल ही में संजय शुक्ला ने इंदौर में कांग्रेस महापौर प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और भाजपा के पुष्यमित्र भार्गव से हारे। बड़े भैया के दूसरे बेटे राजेंद्र शुक्ला भाजपा से पार्षद रहे हैं। विधानसभा चुनाव लड़ा, पर हार का सामना करना पड़ा। दरअसल, संजय शुक्ला ही परिवार में पहले और इकलौते नेता हैं, जो विधानसभा चुनाव जीते हैं। बड़े भैया खुद दो बार चुनावों में शिकस्त खा चुके हैं। संजय शुक्ला के चचेरे भाई गोलू शुक्ला भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहे हैं।

अपने दम पर खड़ी की सल्तनत
विष्णु प्रसाद शुक्ला ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वे हम्माली करते थे। रनगाड़े भी चला चुके हैं। पूरा दिन मेहनत करने के बाद भी 10 रुपये ही बचा करते थे। कुछ समय के लिए मिल की नौकरी भी की। मजदूरों का दर्द समझा और उनके बीच बड़े भाई के रूप में जगह बनाई और इस तरह बड़े भैया के तौर पर ही पहचान हासिल की। भाजपा के वरिष्ठ नेता प्यारेलाल खंडेलवाल के आग्रह पर भाजपा से जुड़े। मीसाबंदी में गिरफ्तार होकर 19 महीने जेल में भी रहे। सांवेर जनपद अध्यक्ष बने। दो बार विधानसभा चुनाव लड़ा, पर हार गए।

ब्राह्मण समाज के बड़े नेता बने
बड़े भैया के करीबी दोस्त खुरासान पठान ने एक इंटरव्यू में कहा था कि बड़े भैया के दरवाजे से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटा। वे सदैव मदद को तैयार रहे। कई बार विवाद भी हुए। एक बार अटल बिहारी वाजपेयी के परिवार पर संकट आ गया था, तब विष्णुप्रसाद शुक्ला ने खुद पूरे परिवार की मदद की। अलग-अलग ब्राह्मण जातियों को साथ में खड़ा किया और परशुराम जयंती मनाना शुरू किया। यहीं से उनकी समाज में यात्रा शुरू हुई और वे सर्वब्राह्मण संगठन के अखिल भारतीय अध्यक्ष भी रहे।

बड़े भैया के खिलाफ बयान भारी पड़ा था भाजपा को
2018 के विधानसभा चुनावों में बड़े भैया के बेटे संजय शुक्ला का मुकाबला इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 1 में तत्कालीन विधायक सुदर्शन गुप्ता से था। दोनों की मौजूदगी में चल रहे एक कार्यक्रम में सुदर्शन गुप्ता ने कह दिया कि मेरी पार्टी की गलती है कि आपके हिस्ट्रीशीटर पिता विष्णु प्रसाद शुक्ला को टिकट दिया। इस पर बड़े भैया ने अगले ही दिन कहा कि ‘विधायक बनने के बाद गुप्ता को घमंड आ गया है। वे खुद को पार्टी से ऊपर समझ रहे हैं। अगर चुनाव नहीं होते तो मैं उसके दांत गिरा देता। अगर मेरा बेटा चुनाव नहीं लड़ रहा होता तो मैं उससे हिसाब बराबर कर लेता।’ सियासी पंडित आज भी मानते हैं कि सुदर्शन गुप्ता ने अगर बड़े भैया को नाराज न किया होता तो 2018 का विधानसभा चुनाव भी जीत जाते।

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