इंदौर। विधायक रमेश मेंदोला ने राहुल गांधी को लिखा पत्र ,कही ये बात

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को लेकर भाजपा विधायक रमेश मेंदोला लगातार मुखर होते जा रहे हैं। मेंदोला ने राहुल को लिखे पत्र में नसीहत दी है। यह पत्र और इसके अलग-अलग अंश उन्होंने टि्वटर पर भी पोस्ट किए हैं।

पहले पढ़िए वो ट्वीट जो मेंदोला ने शेयर किया:- विधायक रमेश मेंदोला ने ई मेल में लिखे पत्र में कहा है कि आप 80 दिनों से नफरत छोड़ो का नारा लगा रहे हैं पर अभी तक आप अपने मन से अपनी काकीजी यानी मेनका गांधी जी और छोटे भाई वरुण के प्रति अपने भरी नफरत को तो निकाल नहीं पाए। आप मेनकाजी के घर आशीर्वाद लीजिए तो लगेगा आपका नारा सच्चा है। आप अपनी यात्रा में लगातार नफरत छोड़ने के नारे लगा रहे हैं। यह नारा सुनकर मुझे आपकी आदरणीय काकीजी मेनका गांधी की याद आ गई और मुझे अंग्रेजी की यह कहावत ‘Charity begins at home’ भी याद आई। हर अच्छे काम की शुरुआत अपने घर से होना चाहिए। नफरत छोड़ने की भी। मैं यह देख रहा था कि यह नारा लगाते लगाते आप खुद आपके अपने और अपने परिजनों के मन में नफरत निकाल पा रहे हैं या नहीं?

नफरत का जहर भरा है आपमें:-मेंदोला ने 40 साल पहले की घटना याद दिलाते हुए लिखा कि 28 मार्च 1982 की रात को जब आपके परिवार ने मेनकाजी को घर से निकाला था। तब से आप और आपके पूरे परिवार के मन में उनके प्रति नफरत का जहर भरा हुआ है। यह बात पूरा देश जानता है। आपके मन में उनके लिए इस कदर नफरत भरी है कि पिछले 40 साल में न आप उनके घर गए न उन्हें आपकी माताजी ने आपके घर बुलाया, न आपने मेनकाजी के पैर छुए और न कभी अपने छोटे भाई वरुण को गले लगाया। इस पत्र के माध्यम से आपसे आग्रह है कि दूसरों को ज्ञान देने के पहले आपके, सोनिया गांधी और प्रियंका के मन में अपनी काकीजी मेनकाजी के लिए बसी नफरत को बाहर निकालिए। यदि आप ऐसा करेंगे तो ही लोगों को ये भरोसा होगा कि आप वाकई नफरत छोड़ने का नारा दिल से लगा रहे है नहीं तो यह यात्रा और यह नारा भी आपके पिछले नारों में से एक बनकर रह जाएगा।

माताजी सोनिया को ले जाना मत भूलिएगा:-मेंदोला ने अंत में लिखा कि मुझे उम्मीद है कि मेरा यह पत्र पढ़ते ही आप पूरे परिवार सहित अपनी काकी मेनकाजी के 14 अशोक रोड स्थित घर जाकर उनके पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लेंगे और अपने छोटे भाई वरुण को गले लगा लेंगे। हां… अपने साथ अपनी माताजी सोनिया को ले जाना मत भूलियेगा। अपने पति को खोने के बाद 2 साल के बेटे और उसकी मां को आधी रात को घर से बाहर निकालने में उनकी बड़ी भूमिका थी। उनके मन में मेनकाजी के प्रति भरी नफरत को निकलने का दायित्व भी आपका ही है।

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