नकारात्मक परिस्थितियों का सकारात्मक अध्यक्ष- गौरव रणधिवे

नकारात्मक परिस्थितियों का सकारात्मक अध्यक्ष..!

–अभिषेक कानूनगो–

गौरव रणदिवे को जब लगभग 6 महीने पहले भाजपा दफ्तर की कमान मिली तो ऐसा लगा कि मारुति के ड्राइवर को ट्रक की चाबी थमा दी है अब एक्सीडेंट होना पक्का है और उस पर शहर पर संक्रमण की मार तो ऐसी पड़ी की दोबारा सत्ता पर काबिज हुई पार्टी के भाजपा दफ्तर पर जिम्मेदारियों का बोझ सीधा रणदिवे के कंधे पर भारी भरकम पर्वत की तरह नजर आने लगा,लेकिन जिस समझदारी और सूझबूझ से उन्होंने दीनदयाल दफ्तर की रोनक इस नकारात्मक वक्त में भी सकारात्मक ढंग से काबीज रखी है उसके लिए उन्हें 10 में से 10 नंबर भी दिए जाएं तो कम ही है पहले उन नेताओं को संतुष्ट करने में काफी टाइम बीत गया जो रणदिवे जैसे निचले कार्यकर्ता की आमद से खुश नहीं थे जैसे ही वह दौर बीता संक्रमण की दूसरी लहर ने शहर को अपने आगोश में ले लिया देखते ही देखते हंसता खेलता शहर वीरान हो गया लोग इलाज के लिए इधर उधर भटकने लगे व्यवस्थाओं के नाम पर प्रशासन के हाथ फूल रहे थे ऐसे में दीनदयाल दफ्तर पर लोगों की उम्मीद आकर टिक गई अस्पताल में दाखिला दिलवाने की बात हो या रेमेडीशिविर इंजेक्शन से किसी की जीवन रक्षा करनी हो,अध्यक्ष मौजूद थे रणदिवे आम दिनों के मुकाबले अभी कुछ ज्यादा ही एक्टिव नजर आ रहे हैं जिन लोगों ने उन्हें कमजोर आंका था वह भी पीठ पीछे अब रणदिवे की तारीफ करते हैं एक और जहां गांधी दफ्तर मैं कांग्रेस के लोगों को दूरबीन से भी ढूंढना मुश्किल हो रहा है वहीं दूसरी तरफ रणदिवे हर दिन अब भी दीनदयाल दफ्तर में नजर आते हैं अपने कार्यकर्ताओं की पीड़ा सुनते हैं और उसे दूर करने की कोशिश करते हैं दिन भर में आई समस्याओं को हल करने के बाद शाम को उसका फॉलोअप लेकर लोगों को अपना बनाने की कला जिस तरह से रणदिवे में नजर आती है शायद ही भाजपा इसके पहले रहे दर्जन भर अध्यक्षों में से किसी में रही हो ये वक्त सबको साथ लेकर चलने का है किसी के दो सकारात्मक बोल मरीजों के परिजन और कोरोनावायरस से लड़ रहे मरीजों के लिए संभल का काम करते हैं और रणदिवे दिन भर में हजार फोन उठाने के बाद भी अपनी आवाज में वह नरमी बरकरार रखने में कामयाब रहते हैं फिर अगले दिन से नया टास्क के शुरू हो जाता है सुबह होते ही लोगों को अस्पताल में दाखिल करवाने की जद्दोजहद फिर दोपहर बीत जाने के बाद,लोगों के जीवन रक्षक इंजेक्शन रेमेडशिविर के लिए फोन आना शुरू हो जाते हैं हर रोज अपने दो सहायकों को साथ लेकर रणदिवे मदद के लिए निकल पड़ते हैं खुद कोरोना के संक्रमण से लड़ चुके हैं इसलिए लोगों की पीड़ा को नजदीक से जानते हैं हालांकि शहर के तमाम जनप्रतिनिधि अभी मदद के काम में आगे हैं लेकिन भाजपा संगठन को चलाते हुए लोगों के लिए इस तरह से मदद का जज्बा पहली बार किसी भाजपा अध्यक्ष में नजर आता है जब रणदिवे को इंदौर की ओर इशारा कर वी डी शर्मा ने भेजा था तो इस उम्मीद के साथ ही उन्हें रवाना किया गया था की तमाम बड़े नेताओं को एक माला में पिरो कर संगठन को मजबूती देने का काम वो करेंगे और रणदिवे बखूबी उसे निभाने में कामयाबी नजर आते हैं जब भी क्राइसिस कमेटी की मीटिंग की बात हो या शहर को लेकर कोई बड़ा फैसला हो ना हो प्रशासन के आला अफसरों के पहले दीनदयाल दफ्तर में तय होती हैं जहां प्रभारी मंत्री से लेकर सांसद और तमाम विधायकों को एक मत कर रणदिवे शहर के लिए बड़े फैसले लेते हैं फिर उसे भाजपा दफ्तर के जरिए रेसीडेंसी कोठी तक पहुंचाया जाता है उनकी इसी कार्यकुशलता की बढ़ाई कई बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कर चुके हैं हालांकि ज्यादा समय नहीं मिलने के कारण रणदिवे शहर में अब तक अपनी टीम का ऐलान नहीं कर पाए हैं और जिस तरह से संक्रमित मरीजों और उनके परिजनों की मदद के लिए वह आगे आए हैं टीम का ना होना उनके हाथ को कमजोर भी करता है लेकिन जिस तरह से उन्होंने भाजपा दफ्तर का मैनेजमेंट संभाला है वो तरीका कारगर है, कई बार मजाकिया लहजे में रणदिवे से पूछा कि ऐसा कौन सा वैक्सीन लगवा कर आए हो जो इस तरह अपने परिवार की परवाह किए बगैर सार्वजनिक जीवन में मदद का जज्बा जुटा लेते हो तो कहते हैं किसी की मदद हो जाती है यानी इन दिनों में उसे इलाज मिल जाता है तो मन की संतुष्टि एक अलग स्तर पर पहुंच जाती है बस यही मेरे लिए वैक्सीन का काम कर रही है रणदिवे कहते है कि मुझे सुबह खुद नहीं पता होता है कि इतने लोगों की मदद कैसे कर पाऊंगा लेकिन शाम होते-होते भगवान हाथों को इतना मजबूत कर देता है की 90 फ़ीसदी से ज्यादा जरूरतमंदों को उनकी मंजिल मिल जाती है इसी तरह की कुछ सोच इस युवा अध्यक्ष में देखते हुए संगठन ने उन्हें इस वक्त बड़े फैसले लेने वाली क्राइसिस कमेटी की प्रमुख कुर्सी भी दे रखी है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हर दिन रणदिवे के जरिए ही इंदौर का हाल जानते हैं
दुनिया में फैली इस महामारी का संक्रमण इंदौर शहर में इतनी तेजी से फैलेगा बात तो शायद कोई नहीं जानता था लेकिन जिस तरह से इस पर काबू करने की कोशिश शासन प्रशासन ने मिलकर की है उसमें भी भाजपा दफ्तर की टीम का बड़ा हाथ देखा जा सकता है जिस तरह से वहां बड़े फैसले लिए गए और उसे शहर में लागू करवाने के लिए सभी को तैयार किया गया उसने कुछ हद तक तो अब इस बीमारी पर काबू पाना शुरू किया है फिर चाहे वह राधास्वामी सेवा न्यास के वैकल्पिक अस्पताल को लेकर बड़ा फैसला हो या फिर बड़े अस्पताल के ऊपर वाले तीन मालो कोविड सेंटर बनाने की बात हो इन हर फैसलों के पीछे प्रभारी मंत्री से लेकर सांसद और विधायकों को एकजुट करने का काम रणदिवे नहीं किया है उनकी कार्यशैली ने महेश कुछ महीनों में ही यह साबित कर दिया है कि युवा अध्यक्ष पर दांव लगाना भाजपा के लिए हरा सौदा साबित हुआ है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *