
समय पर जाग गए तो आसानी से इलाज हो सकता है ब्लैक फंगस का..!( म्यूकरमायकोसिस )
बचने का एक इंजेक्शन पैतीस सौ रुपये का.. बीमारी बढ़ी तो 56 दिन तक लगाना पड़ सकता है
कोरोना संक्रमण की इस महामारी के मध्य कोढ़ में खाज एक अन्य संक्रमण ब्लैक फंगस ( म्यूकरमायकोसिस ) के मामले सामने आ रहे हैं । ये बीमारी कोरोना से संक्रमित लोगो में देखने को मिल रही है. ब्लैक फंगस की वजह से लोगो की आंखे तक निकालनी पड़ रही है.. ब्लैक फंगस या तकनीकी नाम लें म्यूकरमाइकोसिस नामक इस बीमारी में मरीज को वक्त पर सही इलाज न मिलने से उसकी जान भी जा सकती है ,बीमारीके बारे में विस्तृत जानकारी पुराने जानकार अभिजीत दत्ता ने दी है सही समय पर जाग जाने से इसे रोका जा सकता है लेकिन लोग कोरोना की तरह इसमें भी लापरवाही बरत रहे हैं
ब्लैक फंगस या म्यूकॉरमाइकोसिस कोई नई या छुआछूत वाली बीमारी नहीं है, ये हमारे मध्य पहले से ही संक्रमण फैलाती रही है,ये नाक, कान और गले ही नहीं, शरीर के अन्य अंगों को भी नुक़सान पहुंचाती है, हालांकि बीते कुछ दिनों से ये बीमारी एक बड़ा रूप अख़्तियार कर रही है, क्योंकि ये बीमारी इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होने की वजह से होती है,पहले ये बीमारी आम तौर पर कीमोथेरेपी, अनियंत्रित डायबिटीज़, ट्रांसप्लांट करवाने वाले मरीज़ों, और बुज़ुर्ग लोगों में देखा जाता था लेकिन कोविड के बाद को-मॉर्बिडिटी और ज़्यादा स्टेरॉइड लेने वाले मरीजों में भी ये बीमारी नज़र आने लगी है ।
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इसके पीछे मूल वजह हमारा म्यूकर फफूंद नाम का फंगस होता है, करोना विषाणु से आकार में बहुत बड़ा सूक्ष्म जीव जो आमतौर पर मिट्टी, पौधों, खाद, सड़े हुए फल और सब्ज़ियों में पनपता है. ये फंगस हर जगह होती है,मिट्टी में और हवा में और यहां तक कि स्वस्थ इंसान की नाक और बलगम में भी ये फंगस पाई जाती है, ये फंगस साइनस, दिमाग़ और फेफड़ों को प्रभावित करती है और डायबिटीज़ के मरीज़ों या बेहद कमज़ोर इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) वाले लोगों जैसे कैंसर या एचआईवी/एड्स के मरीज़ों में ये जानलेवा भी हो सकती है.
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कोविड-19 के गंभीर मरीज़ों को बचाने के लिए स्टेरॉइड्स के इस्तेमाल से ये संक्रमण फिर शुरू हुआ है,स्टेरॉइड्स के इस्तेमाल से कोरोना में फेफड़ों में सूजन को कम किया जाता है और जब शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली (इम्यून सिस्टम) कोरोना वायरस से लड़ने के लिए अतिसक्रिय हो जाती है तो उस दौरान शरीर को कोई नुक़सान होने से रोकने में मदद करते हैं लेकिन असल में इसका एक दूसरा पहलू भी है, ये स्टेरॉयड इम्यूनिटी कम करते हैं और डायबिटीज़ के मरीजों और बिना डायबिटीज़ वाले मरीज़ों में भी शुगर का स्तर बढ़ा देते हैं ।
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माना जा रहा है कि ऐसे में इम्यूनिटी कमज़ोर पड़ने के कारण म्यूकरमायकोसिस संक्रमण हो रहा है,डायबिटीज़ पहले शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र को कमज़ोर करता है, कोरोना वायरस इस कमजोर प्रतिरोधक तंत्र को बहुत जटिल काम करने के लिए बाध्य कर देता है और तब कोविड-19 के इलाज में मदद करने वाले स्टेरॉइड्स इसी आग में घी का काम करते हैं ।
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खैर म्यूकरमायकोसिस मरीजों में ये लक्षण पाए जाते हैं – नाक बंद हो जाना, नाक से ख़ून या काला तरल पदार्थ निकलना, आंखों में सूजन और दर्द (एक तरफ सूजन भी हो सकता है ), पलकों का गिरना, धुंधला दिखना और आख़िर में अंधापन जैसा होना. मरीज़ के नाक के आसपास काले धब्बे भी हो सकते हैं । फंगस नाक में जाने के बाद नाक की अंदरुनी दीवारों पर सूखापन आना,नाक के अंदर काली और भूरे रंग की पपड़ियाँ जमना,नाक बंद होना शुरू हो जाना,ऊपर वाले होठों और गालों का सुन्न होना शुरू हो जाना,आँखों में सूजन आना,आँखों का लाल होना
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अधिकतर मरीज़ डॉक्टर के पास देर से आते हैं या इसकी चिकित्सा को ले कर देर से महत्व समझते हैं, तब तक ये संक्रमण घातक हो चुका होता है और उनकी आंखों की रोशनी जाने की संभावना काफी गम्भीर हो चुकी होती है,ऐसे में डॉक्टर्स को संक्रमण को दिमाग़ तक पहुंचने से रोकने के लिए रोगी की आंख निकालनी पड़ती है,कुछ मामलों में मरीज़ों की दोनों आंखों की रोशनी चली जाती है. कुछ दुर्लभ मामलों में डॉक्टरों को मरीज़ का जबड़ा भी निकालना पड़ता है ताकि संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके ।
इसके इलाज़ के लिए एंटी-फंगल इंजेक्शन की ज़रूरत होती है जिसकी एक खुराक़ की कीमत औसतन 3,500 रुपये है. ये इंजेक्शन आठ हफ्तों तक हर रोज़ देना पड़ता है, ये इंजेक्शन ही इस बीमारी की एकमात्र दवा है,म्यूकरमायकोसिस संक्रमण से बचने के लिए ज़रूरी है कि कोविड-19 का इलाज करा रहे या ठीक हो चुके लोगों को स्टेरॉइड्स की सही खुराक और सही अवधि के लिए दी जाए ।
आईसीएमआर की एडवायज़री के अनुसार इससे बचने के लिए धूल भरी जगह पर जाने से पहले मास्क ज़रूर लगाएं,जूते, शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनें, मिट्टी या खाद का काम करने से पहले हाथों में ग्लव्स पहनें और घिस कर नहाने जैसे पर्सनल हाइजीन का पालन करें, डायबिटीज का रोगी होने पर स्टेरॉयड वाली दवाओं का उपयोग बहुत बहुत सम्भल कर करें । ख़ास तौर पर जिन्हें अनियंत्रित डायबीटीज़ हो (शरीर ज़रूरी मात्रा में इन्सुलिन न बना पाता हो), स्टेरॉइड लेने के कारण जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई हो, जो अधिक वक़्त तक आईसीयू में रहे हों, ट्रांसप्लांट या फिर किसी और स्वास्थ्य समस्या के कारण जो कोमॉर्बिड हों ,विशेष सावधानी बरते.