इंदौर। खुद को डीएसपी बताकर लोगों से पैसे ठगने वाले एक युवक को पुलिस ने पकड़ा , मामला निपटाने के बदले ढाई करोड़ रुपए मांगे।

 

इंदौर में खुद को डीएसपी बताकर लोगों से पैसे ठगने वाले एक युवक को पुलिस ने पकड़ा है। आरोपी युवक ने पुलिस महकमे में होटल कारोबारी का काम निपटाने के बदले 50 लाख रुपए मांगे थे। क्राइम ब्रांच ने आरोपी के साथ एक अन्य युवक को भी पकड़ा है। उसने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

इंदौर के विजय नगर की एक होटल के मालिक को पुलिस के सरकारी नंबर से एक एडिटेड अश्लील वीडियो व्हॉट्सएप पर मिला। रांची (झारखंड) निवासी इस कारोबारी ने इंदौर के अपने साथी से संपर्क किया और फिर उलझता ही चला गया। जानिए सभी किरदारों के बारे में विस्तार से…

घटनाक्रम 15 दिन पहले का है। होटल कारोबारी के व्हॉट्सएप पर पुलिस के सरकारी नंबर से एक एडिटेड वीडियो रिसीव हुआ। इसमें युवक की जगह होटल कारोबारी का चेहरा लगा था। घबराए होटल कारोबारी ने अपने इंदौर के दोस्त कमल मेहरा को पूरा वाकया बताया। चूंकि पुलिस का सरकारी नंबर था इसलिए कमल ने कहा मेरा एक दोस्त अशोक तिवारी डीएसपी है। वह इस मामले को निपटा देगा। अशोक तिवारी ने पूरा मामला निपटाने के बदले ढाई करोड़ रुपए मांगे। व्यापारी ने हां कह दी तो पहली किश्त के रूप में कमल और अशोक ने 30 लाख रुपए ले लिए। एक सप्ताह बाद अशोक तिवारी ने होटल कारोबारी से 50 लाख रुपए की और डिमांड की। कहा, कि हमने उस आदमी का एनकाउंटर कर दिया है, जिसने तुम्हें यह वीडियो ब्लैकमेल करने के लिए भेजा था। चूंकि हमें ऊपर भी अफसरों तक पैसा पहुंचाना है इसलिए 50 लाख रुपए की व्यवस्था करो।

कारोबारी ने उसके आसपास के दिनों के न्यूज पेपर खंगाले लेकिन किसी तरह के एनकाउंटर की कोई खबर नहीं मिली तो उसे शक हुआ। होटल कारोबारी ने इंदौर आकर क्राइम ब्रांच के डीसीपी निमिष अग्रवाल से मुलाकात की। पूरा घटनाक्रम बताने के बाद पुलिस के कहने पर कारोबारी ने अशोक तिवारी को पैसे देने का कहकर अपनी विजय नगर स्थित होटल में ही बुलाया। जैसे तिवारी पहुंचा क्राइम ब्रांच ने उसे पकड़ लिया। पुलिस ने इस मामले में अशोक तिवारी, कमल मेहरा और वीडियो भेजने वाले पुलिसकर्मी को आरोपी बनाया है। अशोक और कमल की गिरफ़्तारी हो चुकी है। जबकि वीडियो भेजने वाले पुलिसकर्मी की पहचान होना बाकी है। इसके बाद उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आरोपी से 12 लाख रुपए बरामद कर लिए हैं। बाकी के 18 लाख कहां खर्च हुए इसके बारे में पुलिस पूछताछ कर रही है।

इधर, पूछताछ में आरोपी अशोक तिवारी ने चौंकाने वाले कई खुलासे किए।

– खुद को डीएसपी बताने वाला अशोक तिवारी पहले रेलवे आरपीएफ में डीएसपी था। उसे रिश्वत के एक मामले में दोष सिद्ध होने पर बर्खास्त कर दिया गया था।

– जयपुर के रहने वाले अशोक ने देवास में रहने वाली बुटीक संचालिका से 12 साल पहले शादी कर ली थी। इसके बाद से ही वह देवास गोमती नगर में रहने लगा था।

– पुलिस को पूछताछ में पता चला है कि अशोक ने रिश्तेदारों को भी आरपीएफ में बड़ा अफसर होना बताया था। इसी के चलते वह देवास में काफी रौब झाड़ता था।

– एसआई के पद पर रहते हुए अशोक तिवारी ने आगरा में रिश्वत ली थी। इसी केस के बाद वह जांच में बर्खास्त हुआ था।

– उसने सबसे ज्यादा आगरा और गुजरात के गांधीनगर के नजदीक नौकरी की।

– रेलवे में भी वह वर्दी पहनकर सफर करता है।

– अफसरों को शंका है कि उसने देवास में दूसरी शादी की थी। उसका एक परिवार जयपुर में भी है। जिसे लेकर क्राइम ब्रांच पूछताछ कर रही है।

असली अफसरों से मिलीभगत की जांच
पूर्व में क्राइम ब्रांच का खरगोन के सोना चांदी व्यापारी के साथ धमकाने में नाम सामने आया था। अफसरों को शंका है कि नकली डीएसपी भी पुलिस अफसरों के संपर्क में था। मामले में गोपनीय तरीके से उसके संपर्क निकाले जा रहे है। अफसर नकली डीएसपी के मामले में भी जानकारी देने से बच रहे है।

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