हाईकोर्ट से भी कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी को झटका, जमानत अर्जी खारिज, हिन्दू देवताओं पर टिप्पणी के हैं आरोप

धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी और सह अभियुक्त नलिन यादव की जमानत याचिका मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है. मुनव्वर फारुकी पर आरोप है कि उसने हिंदू देवी-देवताओं को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, इस  मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. गुरुवार को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज करने का फैसला सुनाया.

उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति रोहित आर्य ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये फैसला सुनाया. वरिष्ठ अधिवक्ता व राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने फारूकी की ओर से पैरवी करते हुए हास्य कलाकार के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 295-ए (किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से जान-बूझकर किए गए विद्वेषपूर्ण कार्य) के तहत प्राथमिकी दर्ज किए जाने को लेकर सवाल उठाए थे.

जिला अदालत के एक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और इसके बाद एक सत्र न्यायाधीश फारुकी की जमानत अर्जियां दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खारिज कर दी थीं. इसके बाद हास्य कलाकार ने जमानत पर रिहाई के लिए उच्च न्यायालय की शरण ली. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक स्थानीय भाजपा विधायक के बेटे एकलव्य सिंह गौड़ ने फारूकी और हास्य कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े चार अन्य लोगों के खिलाफ तुकोगंज पुलिस थाने में एक जनवरी की रात मामला दर्ज कराया था.

विधायक पुत्र का आरोप है कि शहर के एक कैफे में एक जनवरी की शाम आयोजित इस कार्यक्रम में हिंदू देवी-देवताओं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गोधरा कांड को लेकर अभद्र टिप्पणियां की गई थीं.

चश्मदीदों के मुताबिक एकलव्य अपने साथियों के साथ बतौर दर्शक इस कार्यक्रम में पहुंचे थे. उन्होंने कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के विरोध में जमकर हंगामा किया और कार्यक्रम रुकवाने के बाद फारुकी समेत पांच लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि विवादास्पद कार्यक्रम को लेकर पांचों लोगों को भारतीय दंड विधान की धारा 295-ए और अन्य सम्बद्ध प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया था. बाद में इस कार्यक्रम के आयोजन में शामिल होने के आरोप में एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था.

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