कटनी की अर्चना तिवारी का कुबूलनामा: परिवार के शादी दबाव से परेशान होकर चलती ट्रेन से लापता हुई, बोली- पटवारी से रिश्ता मेरी मर्जी के खिलाफ था, सिविल जज बनने तक न घर जाऊंगी न शादी करूंगी, नेपाल बॉर्डर तक पहुंची


Archana Tiwari Case: भोपाल GRP कोपूछताछ में अर्चना तिवारी ने खुलासा किया कि परिवार वाले उसकी मर्जी के खिलाफ शादी लिए रिश्ते देख रहे थे. कुछ समय पहले बताया गया कि उसका रिश्ता एक पटवारी लड़के से तय किया गया है. बार-बार शादी के लिए दबाव डाले जाने से वह मानसिक रूप से परेशान हो गई थी.

घटना में अर्चना का साथ देने वाला फ्रेंड सारांश. (PHOTO: ITG)

घरवाले मेरी मर्जी के खिलाफ शादी के लिए रिश्ता देख रहे थे. कुछ दिन पहले मुझे बताया गया कि तुम्हारे के लिए एक पटवारी लड़का देख लिया है. परिजन बार-बार शादी करने के लिए मजबूर कर रहे थे. इसी वजह से मैं मानसिक रूप से परेशान हो गई थी. इसी बीच, 7 अगस्त को रक्षाबंधन मनाने के लिए मैं इंदौर से कटनी के लिए नर्मदा एक्सप्रेस ट्रे रवाना हुई. लेकिन मैं मानसिक रूप से घ जाने के लिए तैयार नहीं थी. मैंने सोच लिया था कि मैं अब घर नहीं जाऊंगी और सिविल जज बन जाने तक मैं शादी नहीं करूंगी…” चलती ट्रेन से लापता और नेपाल बॉर्डर से बरामद हुई मध्य प्रदेश के कटनी की वाली अर्चना तिवारी का यह कुबूलनामा है

भोपाल GRP को पूछताछ में अर्चना तिवारी ने खुलासा किया कि परिवार वाले उसकी मर्जी के खिलाफ शादी के लिए रिश्ते देख रहे थे. कुछ समय पहले बताया गया कि उसका रिश्ता एक पटवारी लड़के से तय किया गया है. बार-बार शादी के लिए दबाव डाले जाने से वह मानसिक रूप से परेशान हो गई थी.

7 अगस्त को वह रक्षाबंधन के लिए इंदौर से कटनी के लिए नर्मदा एक्सप्रेस से रवाना हुई, लेकिन मानसिक रूप से घर जाने के लिए तैयार नहीं थी. उसने फैसला किया कि वह न तो घर जाएगी और न ही शादी करेगी, जब तक कि वह सिविल जज नहीं बन जाती.

तेजेंद्र और सारंश की ली मदद

इटारसी पहुंचने से पहले अर्चना ने अपने पुराने क्लाइंट तेजेंद्र सिंह से संपर्क किया. उसने तेजेंद्र को बताया कि वह इटारसी में उतरकर वापस इंदौर जाना चाहती है. अर्चना ने अपने दोस्त सारांश को भी इटारसी बुलाया. उसने ऐसी उ उतरने की योजना बनाई, जहां CCTV कैमरे न हों.

तेजेंद्र नर्मदापुरम स्टेशन से अर्चना के साथ शामिल हो गया और इटारसी में उसे सारांश के पास छोड़कर रुक गया. सारांश की कार से शुजालपुर पहुंची, फिर इंदौर गई. परिवार के आने की आशंका के कारण वह हैदराबाद चली गई.

हैदराबाद में 2-3 दिन रुकने के बाद, मीडिया और समाचारों से पता चला कि उनका केस चर्चित हो गया है, जिसके चलते वह सुरक्षित महसूस कर रही थी.

नेपाल तक पहुंच गई अर्चना

11 अगस्त को अर्चना सारांश के साथ हैदराबाद से दिल्ली पहुंची और वहां से टैक्सी के जरिए धनगढ़ी (नेपाल) चली गई. धनगढ़ी से काठमांडू पहुंची, जहां सारांश ने अपने परिचित वायपी देवकोटा के माध्यम से उन्हें एक होटल में ठहराया और खुद इंदौर लौट गया. कुछ दिन बाद देवकोटा ने अर्चना को नेपाल की सिम उपलब्ध कराई, जिसके जरिए वह व्हाट्सएप पर सारांश से बात करती रही.

दोस्तों ने कोई गलत हरकत नहीं की

अर्चना ने बताया कि सारांश और तेजेंद्र ने दोस्त के नाते उनकी मदद की और किसी ने उनके साथ कोई गलत हरकत या गलत काम नहीं किया. पुलिस ने सारांश के माध्यम से अर्चना से संपर्क किया और बताया कि उनके परिवार वाले परेशान हैं.

भोपाल लाई गई अर्चना

इसके बाद अर्चना काठमांडू से विमान के जरिए धनगढ़ी पहुंची और वहां से लखीमपुर खीरी, नेपाल बॉर्डर पर आई, जहां मध्य प्रदेश GRP की भोपाल टीम ने उन्हें बरामद किया. अर्चना को अब रानी कमलापति GRP थाने लाया गया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *