जबलपुर जिले में गंदे नालों के पानी से सब्जियों की सिंचाई हो रही है। सब्जियां तैयार होते ही भारी मात्रा में मंडी पहुंचाई जा रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसी सब्जियां जानलेवा हैं। खासकर पत्ते वाली सब्जियां। इन्हें खाने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा रहता है। यही नहीं, धोने के बाद भी इनसे केमिकल निकलना नामुमकिन है।
मामला इतना गंभीर हो गया है कि इसे लेकर मप्र हाईकोर्ट को स्वत: संज्ञान लेना पड़ा। 22 नवंबर को कलेक्टर समेत तमाम आला अफसरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है, तब से अब तक 12 दिन बीत चुके हैं। दूषित नालों से सब्जियों की सिंचाई धड़ल्ले से जारी है। पहले की तरह सब्जियां बाजार भेजी जा रही हैं।
की टीम मौजूदा हालात जानने के लिए जबलपुर नगर निगम सीमा से 500 मीटर दूर पड़वार खुर्द गांव पहुंची। यहां जो हालात नजर आए, उसने प्रशासन की सख्ती की पूरी पोल खोल दी

लॉ स्टूडेंट के पत्र को हाईकोर्ट ने माना याचिका दरअसल, जबलपुर हाईकोर्ट ने एक लॉ स्टूडेंट के पत्र को जनहित याचिका मानकर मामले की सुनवाई की है। कोर्ट ने याचिका की सुनवाई के लिए कोर्ट मित्र के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर को नियुक्त किया है।
उनकी तरफ से बताया गया कि सीवेज की गंदगी के साथ सबसे अधिक पानी डिटर्जेंट का ही होता है। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि गंदे नालों का पानी बेहद खतरनाक है। उनके पानी से सब्जी उगाना जनता की सेहत से सरासर खिलवाड़ है।
हाईकोर्ट के नोटिस के बाद जबलपुर नगर निगम ने नालों के पानी के सब्जियों की सिंचाई करने वालों पर कार्रवाई करने के दावे किए, लेकिन नोटिस के 12 दिन बाद भी पड़वार खुर्द गांव के ओमती नाले से सब्जियों की सिंचाई जारी है। इस तरह की खेती कठौंदा, खंदारी और ओमती नाला के आसपास के इलाकों में धड़ल्ले से रही है।

नाले के पानी से सिंची हुई धनिया पहुंच रही बाजार मुख्य मार्ग से गांव के थोड़ा अंदर जाते ही नाले से सटे एक खेत में हमें 2 महिलाएं और 1 व्यक्ति खेत में लगी धनिया तोड़ते हुए नजर आए। थोड़ी ही दूरी पर सिंचाई के पाइप डले हुए थे। उन पाइप को कनेक्ट करने वाली मोटर नाले के करीब रखी हुई हैं। वहां करंट की सप्लाई भी है। इस धनिया को नाले के पानी से ही सींचकर उगाया है। देखने में धनिया एकदम फ्रेश ऑर्गेनिक दिख रहा है।
धनिया उखाड़ रही महिला माया ने बताया कि इस गांव में मेथी, धनिया, मूली, पालक, गोभी, मटर, मिर्च, लाल भाजी की खेती होती है। यहां बोरिंग और नाले के पानी से सिंचाई होती है, जिसे नाला पास पड़ता है वो नाले का पानी चला लेता है।

मरे हुए जानवर भी पड़े, बगल से हो रही सिंचाई महिला से बात कर हम नाले के किनारे बढ़ने लगे। थोड़ा आगे जाने पर नाले में ढेर सारी पॉलीथिन दिखी। यहां एक मरा हुआ गोवंश भी पड़ा था। इसके ठीक बगल से एक मोटर चल रही थी, जिससे सब्जियों की सिंचाई हो रही थी।

गोभी में सिंचाई करने छिपा कर रखी मोटर गांव में नाले के किनारे-किनारे थोड़ा और आगे बढ़े तो गोभी की सब्जी वाला खेत दिखाई दिया। गौर से देखने पर पता चला कि यहां पेड़ के नीचे छिपा कर एक मोटर रखी हुई है, जिससे नाले और फिर खेत तक पाइप कनेक्ट हैं।
दूर से लाए गए तारों के जरिए करंट की सप्लाई भी दी गई है। इसी नाले के पानी से गोभी की सिंचाई की जा रही है। हमें अन्य कई खेतों में नाले के पानी से सब्जियों की सिंचाई होते दिखी।
गांव में पैदा होती है पालक, मेथी, धनिया गांव में सब्जी बेच रहे छोटे लाल ने बताया- मैं बगल के ही बड़ी पड़वार गांव का हूं। आसपास के गांवों में सब्जियां बेचता हूं। कुछ सब्जियां इन्हीं गावों के किसानों से लेता हूं। कुछ शहर से लाता हूं। गांव में टमाटर, मिर्ची, गोभी, मटर, पालक, मेथी, धनिया, बैंगन जैसी सब्जियां होती हैं। ज्यादातर खेतों में सिंचाई नाले के पानी से होती है। ये सब्जियां जहरीली हो जाती हैं, लेकिन क्या करें। उन्हें ऐसा करने से मना करते हैं, लेकिन वे मानते नहीं हैं।

विशेषज्ञ बोले- तीसरे-चौथे स्टेज पर पता चलता है कैंसर जबलपुर के जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कृषि रसायन शास्त्र एवं मृदा विज्ञान विभाग के प्रधान वैज्ञानिक हितेंद्र कुमार राय ने कहा- ये बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है। लंबे वक्त वाली फसलों में नाले की पानी से सिंचाई का उतना बुरा प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन जो पत्तेदार सब्जियां होती हैं जैसे- मेथी, पालक, लालभाजी, धनिया और अन्य। इनमें हेवी मेटल्स का अपटेक ज्यादा होता है।
हेवी मेटल्स जैसे- क्रोमियम, निकिल, केडमियम, लेड। शहरी नाले में क्रोमियम, लेड और निकिल की मात्रा बहुत होती है। पहले ये पानी मिट्टी में जाएंगे, फिर पौधे अपने अंदर इन सब जहरीले केमिकल्स को फिक्स कर लेंगे।

लंबे समय में भयानक असर दिखाएंगी सब्जियां हितेंद्र कुमार राय ने बताया कि इसका एक पहलू और है। अन्य देश इन बातों को लेकर बहुत सेंसिटिव है। वहां की परमिसेबल लिमिट और हमारे देश की परमिसेबल लिमिट में फर्क होता है।
यहां चीजों में काफी छूट है। हम नाले के पानी की और सब्जियों की टेस्टिंग करेंगे तो हो सकता है कि वो परमिसेबल लिमिट में आएं, लेकिन लोग ये नहीं जानते कि जब हम ऐसी परमिसेबल लिमिट वाली दूषित सब्जियां रोज खाएंगे तो लंबे वक्त में ये अपना भयानक असर दिखाएंगी, तब हम जान नहीं पाते हैं कि ये सब हुआ तो कैसे हुआ।
ये सब धीरे-धीरे होता है, इसीलिए लोगों को शुरुआत में कैंसर की जानकारी नहीं लगती। तीसरे-चौथे स्टेज में बीमारी का पता चलता है। जो लोग नाले के पानी से सब्जियां धो रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए मैं कहूंगा कि उन्हें कतई ना बख्शा जाए। कड़ी से कड़ी से सजा दी जाए।
कलेक्टर बोले- पंप जब्त किए, सैंपलिंग की है जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह से सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि इस मामले में आप नगर निगम कमिश्नर से जानकारी ले सकते हैं। जब ने उन्हें बताया कि नगर निगम सीमा से बाहर भी नाले के पानी से सब्जियों की सिंचाई भारी मात्रा में हो रही है।

सैंपल किसने और कहां से लिए? कितनी और कहां की सब्जियां सैंपल के लिए भेजी गईं? इसका जवाब देते हुए कलेक्टर ने कहा, हमने स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के तहत सैंपलिंग कराई है। सीवेज वाली जगहों और सब्जियों के सैंपल लिए हैं। बाकी स्पेसिफिक जानकारी आप हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट से ले लीजिए। वो ज्यादा बता पाएंगे।