कांवड़ लेने मत जाना, तुम ज्ञान का दीप जलाना। मानवता की सेवा करके, तुम सच्चे मानव बन जाना। कांवड़ ढोकर कोई वकील, DM-SP नहीं बना है। कांवड़ जल से कोई बनिया, हाकिम, वैद्य नहीं बना है।
यूपी के बरेली में सरकारी स्कूल के टीचर रजनीश गंगवार ने 12 जुलाई को बच्चों को ये कविता सुनाई। तब उन्हें ये अंदाजा भी नहीं था कि इसकी वजह से उनके लिए बड़ी मुश्किल खड़ी होने वाली है। कांवड़ यात्रा की जगह पढ़ाई को तरजीह देने वाली इस कविता का वीडियो वायरल हुआ और रजनीश को मारने की धमकियां मिलने लगीं।
सोशल मीडिया पर उन्हें ‘सनातन का गद्दार’ बोला गया। लोग उनके लिए ‘मास्टर को जूते से मारने वाले को 1200 रुपए का इनाम देने’ जैसी बातें लिखने लगे। विरोध यहीं नहीं थमा, बरेली में VHP और महाकाल सेवा समिति जैसे हिंदू संगठन के लोगों ने कविता को धर्म विरोधी बताया। उन्होंने पहले रजनीश का पुतला फूंका, फिर स्कूल से निकालने की मांग करते हुए उनके खिलाफ FIR दर्ज करवाई।
रजनीश और उनका परिवार विवाद के बाद से परेशान है। उन्होंने लगातार धमकियां मिलने के बाद पुलिस से सुरक्षा की मांग की है। हालांकि स्कूल के बच्चे रजनीश को गलत नहीं मानते। उनका कहना है कि सर की कविता में एक शब्द भी ‘धर्म’ विरोधी नहीं था। उल्टा वो हमें पढ़ाई को लेकर गंभीर रहने की नसीहत दे रहे थे कि कांवड़ लाने से DM-SP नहीं बनते। उन्हें जबरदस्ती विवाद में घसीटा जा रहा है।

इस मामले को लेकर दैनिक भास्कर की टीम ने रजनीश गंगवार, स्कूल प्रशासन और वायरल वीडियो में दिख रहे बच्चों से बात की। हम उन लोगों तक भी पहुंचे, जिन्होंने कविता पर एतराज जताया। कांवड़ यात्रा से जुड़े विवाद के बाद क्या टीचर की गिरफ्तारी होगी? बरेली पुलिस का पूरे मामले पर क्या कहना है? इस रिपोर्ट में पढ़िए…
शुरुआत 12 जुलाई की सुबह से, जब विवाद की शुरुआत हुई… बरेली शहर से 50 किलोमीटर दूर बहेड़ी कस्बा पड़ता है। यहां रेलवे स्टेशन से बाहर आते ही गेट के ठीक सामने महात्मा गांधी मेमोरियल इंटर कॉलेज है। यहां बहेड़ी और आसपास के गांवों से करीब 1800 बच्चे पढ़ने आते हैं। ये पूरा विवाद स्कूल में हिंदी विभाग के सीनियर टीचर रजनीश गंगवार से जुड़ा है।
उनकी कविता से कैसे हंगामा शुरू हुआ, इस बारे में रजनीश कहते हैं, ‘12 जुलाई, शनिवार का दिन था। कॉलेज में रोज की तुलना में कम बच्चे आए थे। उस दिन सुबह की प्रार्थना सभा के बाद मैंने बच्चों के लिए एक कविता पढ़ी। इसे लेकर ऐसा कहा गया कि वो कांवड़ यात्रा के विरोध में थी, जबकि ऐसा कुछ नहीं था।’
मैंने छोटे बच्चों के लिए वो कविता पढ़ी थी, जिसमें उन्हें स्कूल आने और पढ़ाई के प्रति गंभीर रहने के लिए प्रेरित किया गया था।
’मैं तो बच्चों को जागरूक कर अपना शिक्षक धर्म निभा रहा था। अफसोस है कि कुछ लोगों को मेरी कविता में मानवता और शिक्षालय जैसी बातें छोड़ सिर्फ ‘कांवड़’ शब्द ही नजर आया। किसी भी धर्म से जुड़ा व्यक्ति अगर इंसानियत भूल जाए तो वो धार्मिक नहीं बन सकता। इसलिए मेरा मानना है कि जिन लोगों ने इस विवाद को बढ़ाया, वो हमारे बीच रहने वाले असमाजिक तत्व हैं।’

वीडियो वायरल होने पर ‘सनातन का गद्दार’ बोला गया इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से हिन्दी साहित्य में PhD कर चुके रजनीश, कवि और लेखक भी हैं। वो अभी एमजीएम इंटर कॉलेज के स्पोक्सपर्सन और स्वच्छ भारत मिशन के कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रजनीश 12 जुलाई तक ABVP के नगर अध्यक्ष भी थे। हालांकि कविता से शुरू हुए विवाद के बाद उन्हें संगठन से बाहर कर दिया गया है। उनकी जगह डॉ. हरिनंदन कुशवाह को पद दे दिया गया है।
रजनीश के मुताबिक, जब से विवाद शुरू हुआ है उन्हें हर दिन कोई-न-कोई नई परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने दावा किया कि लोकल हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने उन्हें बदनाम करने के लिए झूठी खबरें फैलाईं। वीडियो वायरल होने पर उन्हें खुलेआम मारने तक की धमकियां दी गईं।
वो कहते हैं, ‘लोगों ने सोशल मीडिया पर मुझे जूतों से मारने और ‘सनातन का गद्दार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। इन धमकियों के बाद मुझे डर था कि ये लोग कभी भी मुझ पर हमला करवा सकते हैं। इसलिए मैंने बहेड़ी पुलिस को तहरीर देकर ऐसे लोगों पर कार्रवाई और अपने लिए सुरक्षा की मांग की। हालांकि पुलिस ने अब तक मेरी एप्लिकेशन स्वीकार नहीं की है।

बच्चे बोले- कविता में कुछ भी गलत नहीं, सर को फंसाया जा रहा पूरे विवाद को लेकर हमने एमजीएम इंटर कॉलेज के टीचर्स और स्टूडेंट्स से भी बात की, जो उस दिन प्रार्थना सभा में मौजूद थे। हमने ये जानने की कोशिश कि वो इस पूरे घटनाक्रम को कैसे देखते हैं। पहले छात्रों की बात…
स्कूल में 9वीं क्लास में पढ़ने वाले मोहन गौतम कहते हैं, ‘रजनीश सर की कविता में मुझे कुछ भी गलत नहीं लगा। यहां तक कि मैंने घरवालों को भी कविता का वीडियो दिखाया था, उन्हें भी सर की बातें सही लगीं। ये बात सच है कि कांवड़ लाने से कोई DM-SP नहीं बन सकता। आज अगर हम किसी सरकारी परीक्षा के लिए फॉर्म भरते हैं, तो हमसे ये नहीं पूछा जाता कि तुम कितनी बार कांवड़ लेने गए थे, बल्कि ये पूछा जाता है कि आपने कहां तक पढ़ाई की है।‘
‘आज अगर मैं पढ़-लिखकर इंडियन आर्मी में चला जाता हूं या डॉक्टर बन जाता हूं तो मेरा और मेरे परिवार का नाम होगा। कांवड़ लाने से ये जरूरी नहीं है कि मैं अच्छा इंसान बन जाऊंगा, लेकिन पढ़ाई करके मैं अपनी पहचान बना सकता हूं। यही बात सर ने कविता के रूप में हमें बताई थी।’

12वीं क्लास में पढ़ने वाली दीक्षा कहती हैं, ’कविता में ‘कांवड़’ शब्द जरूर आया था, लेकिन सर का मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। कुछ लोगों ने इसे नेगेटिव ले लिया। सरकार को एक नियम बनाना चाहिए कि 18 साल की उम्र के बाद ही लोगों को कांवड़ लाने की परमिशन दी जाए, इससे उनकी पढ़ाई बाधित नहीं होगी।’
आखिर कविता क्यों सुनानी पड़ी? इस सवाल पर स्कूल के इंग्लिश टीचर रामनाथ ने बताया कि सावन के महीने में बहेड़ी और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग कांवड़ लेने जाते हैं। इसमें कम उम्र के बच्चे भी होते हैं। लिहाजा स्कूल में पढ़ने आने वाले बच्चों की संख्या कम हो जाती है।
हम लोगों पर दबाव भी होता है कि स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ाई जाए क्योंकि रजनीश सर अच्छे वक्ता हैं, इसलिए उन्होंने बच्चों को स्कूल आने और पढ़ाई के लिए प्रेरित करने को लेकर ये कविता सुनाई थी। इसके बाद ही विवाद हो गया।’

हिंदू संगठन बोले- टीचर जिहादी सोच वाला, हिंदू बच्चों को भड़का रहा कविता वायरल होने के बाद 14 जुलाई को पुलिस ने रजनीश के खिलाफ BNS की धारा 353 में मुकदमा दर्ज किया। ये कार्रवाई लोकल BJP नेता राहुल गुप्ता और महाकाल सेवा समिति की शिकायत पर हुई थी।
FIR दर्ज होने के बाद 15 जुलाई को स्कूल के प्रिंसिपल अशोक कुमार को दिए स्पष्टीकरण में रजनीश ने बताया कि क्लास में विद्यार्थियों की अटेंडेंस लगातार कम हो रही थी। दूसरे स्टूडेंट्स से इस बारे में पूछने पर पता चला कि ज्यादातर बच्चे कांवड़ लेने गए हैं इसलिए स्कूल नहीं आ रहे। ऐसी आदत बच्चों में न बढ़ें इसलिए कविता सुनाई।
विवाद तब बढ़ गया जब हिंदू संगठनों ने रजनीश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हिंदू महासभा ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। हिंदू महासभा के मंडल अध्यक्ष पंकज पाठक ने टीचर रजनीश को जिहादी सोच वाला व्यक्ति बताया और हिंदू बच्चों को उनके धर्म के प्रति भड़काने का आरोप लगाया।
बहेड़ी की महाकाल सेवा समिति के लोगों ने रजनीश के खिलाफ पुलिस को दी गई तहरीर में लिखा- कॉलेज के छात्र-छात्राओं को इकट्ठा कर कांवड़ यात्रा के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। इससे शिव भक्त कांवड़ियों की भावनाएं आहत हुई हैं।

हमने रजनीश के खिलाफ तहरीर देने वाले BJP नेता राहुल गुप्ता से बात की। वो कहते हैं, ‘अगर कोई व्यक्ति 250 किलोमीटर तक भारी-भरकम कांवड़ लेकर चल रहा है, तो निश्चित रूप से भगवान शिव की शक्ति उसके साथ है। अगर उस तथाकथित टीचर को ये ढोंग लग रहा है, तो वो इसे खुद करके देखे। वो 5 किलो वाली फल की थैली 2 किलोमीटर भी लेकर नहीं चल सकता।‘
‘मास्टर साहब खुद के बचाव में ये कह रहे हैं कि उन्हें सोशल मीडिया पर जानलेवा धमकियां मिल रही हैं। ये सिर्फ खुद को लाइमलाइट में लाने के लिए उनका स्टंट है। हम लोग कानून को मानने वाले लोग हैं, हमें पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर भरोसा है।‘

कविता के वायरल होने पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने X पर लिखा- ‘जो मानवता के मार्ग पर ले जाए, वही सबसे बड़ा धर्म है। टीचर पर केस दर्ज होने के बाद उन्होंने दोबारा ट्वीट किया कि शिक्षक पर FIR और शिक्षालय बंद हो रहे हैं। BJP के लिए क्या यही अमृतकाल है?‘
बरेली पुलिस क्या कह रही… CO बहेड़ी बोले: केस लीगल ओपिनियन के लिए हेडक्वार्टर भेजा गया कांवड़ यात्रा के मद्देनजर केस की संवेदनशीलता को देखते हुए बरेली पुलिस ने संबंधित टीचर को दोबारा ऐसी टिप्पणी न करने के लिए कहा है। साथ ही कस्बे में कांवड़ रूट पर सख्त निगरानी हो रही है। हमने मामले को लेकर बहेड़ी सर्किल ऑफिसर अरुण कुमार सिंह से बात की।
वे कहते हैं, ‘एमजीएम इंटर कॉलेज के टीचर रजनीश गंगवार की कविता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के संबंध में हमें तहरीर मिली थी। जांच के आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।’
रजनीश ने सोशल मीडिया पर धमकियां मिलने की बात कही है। उनकी सुरक्षा को लेकर पुलिस क्या कर रही? इस पर अरुण कहते हैं- हमने दोनों पक्षों की बातें सुनी हैं। केस में जांच जारी है।

क्या इस मामले में शिक्षक रजनीश की गिरफ्तारी हो सकती है? इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट के वकील शाश्वत आनंद कहते हैं, ‘सरकारी स्कूल के टीचर रजनीश गंगवार के खिलाफ बरेली पुलिस ने अभी BNS की धारा 353 के तहत FIR दर्ज की है। ये धारा तब लागू होती है जब किसी व्यक्ति ने ऐसा बयान दिया हो, जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने या फिर दंगा होने की संभावना हो।
इसमें अपराध साबित होने पर आरोपी को 3 से 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। हालांकि सजा का प्रावधान होने के बावजूद शिक्षक के पास जमानत के अधिकार भी हैं।
