इंदौर के विश्राम बाग में आयरन वेस्ट से अयोध्या में आकार ले रहे राम मंदिर की प्रतिकृति बनाई जा रही है। प्रतिकृति बनाने में नगर निगम के पुराने वाहनों के चेसिस, स्ट्रीट लाइट्स के पुराने खंभे, खराब हो चुके झूले, टूटी हुई फिसल पट्टियों, पुराने वाहनों की बॉडी, गियर पार्ट्स, नट-बोल्ट के साथ पार्कों की टूटी-फूटी ग्रिल और गेट्स के पुराने लोहे का उपयोग किया गया है। संभवत: श्री राम मंदिर, अयोध्या की यह देश में वेस्ट आयरन से बनी पहली प्रतिकृति है। इसमें दिल्ली के मुस्लिम कारीगरों ने भी अपनी अद्भुत कला का जलवा बिखेरा है।
इस वेस्ट मटेरियल से राम मंदिर अयोध्या की प्रतिकृति को बनाने का काम पिछले 65 दिन से लगातार जारी है। लगभग 15 से 20 कलाकारों की टीम इसे तैयार करने में जुटी है। इसमें अब तक लगभग 21 टन लोहे का उपयोग हो चुका है। प्रतिकृति की 27 फीट ऊंची, 26 फीट चौड़ी और 40 फीट लंबी बनाई जा रही है।

प्रतिकृति तैयार करने में मुख्य चुनौती यह आ रही है कि अभी अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण पूर्ण नहीं हुआ है। ऐसे में उसकी प्रतिकृति कैसे जल्द पूरी की जाए। हालांकि देश में संभवत: यह पहली श्री राम मंदिर, अयोध्या की प्रतिकृति है जिसे वेस्ट आयरन से बनाया गया है। लोहे से बनी इतनी बड़ी प्रतिकृति पूरे भारत में पहली ही होगी। इस प्रतिकृति को बनाने में आर्टिस्ट उज्जवल सिंह सोलंकी, लोकेश राठौर और वेल्डर आसिफ खान की टीम काम कर रही है।
हालांकि अभी इसमें कुछ काम और बाकी है। खास बात यह कि इसमें मप्र के कलाकारों के अलावा दिल्ली मुस्लिम कारीगरों ने भी सहभागिता निभाई है। मंदिर के मूल स्ट्रक्चर को बनाने में इन मुस्लिम कारीगरों ने लोहे के छोटे-छोटे टुकड़ों को वेल्डिंग कर जोड़ा है और डिजाइन का रूप देकर सुंदरता दी है।
ऐसे आया मन में श्रीराम मंदिर अयोध्या का आइडिया
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि एक ओर अयोध्या में श्री राम मंदिर का भव्य मंदिर निर्माण हो रहा है, जिसका लोकार्पण 22 जनवरी को होना है। इसे लेकर मन में यह विचार आया कि इंदौर ने अपनी आदत के अनुसार वेस्ट से आर्ट बनाने का काम किया है। भगवान श्रीराम का संदेश इंदौर के माध्यम से दुनिया में जाए जिसे देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता है। दिल्ली में वहां के कारीगरों के द्वारा अलग-अलग स्थानों पर किए गए कामों को देखा तो मन में आइडिया आया कि क्यों न इंदौर में अयोध्या के श्रीराम मंदिर के पहले ही इसकी प्रतिकृति बनाई जाए। दूसरा यह कि विधानसभा-4 को भी अयोध्या कहा जाता है। बस इसी विचार ने गति दी और साढ़े तीन माह पहले काम शुरू किया गया। इसमें अब तक 21 टन वेस्ट आयरन का इस्तेमाल किया जिसमें आयरन की छोटे से लेकर कई बड़ी सामग्रियां हैं।
प्रतिकृति बनाने में इन वेस्ट आयरन का हुआ उपयोग
विश्राम बाग में बन रहे राम मंदिर प्रतिकृति की ऊंचाई 21 फीट रखी गई है, वहीं इसे 1100 वर्गफीट में बनाया जा रहा है है। मंदिर बनाने में नगर निगम के पुराने वाहनों के चेचिस, स्ट्रीट लाइट्स के पुराने खंभे, बगीचों के पुराने खराब झूले, टूटी फिसलपट्टियां, पुराने वाहनों का लोहा, गाड़ियों के गियर्स, पार्ट्स, नट बोल्ट्स, बगीचों की टूटी फूटी ग्रिल, गेट्स आदि उपयोग किया गया है।
इन कलाकारों ने मंदिर की प्रतिकृति को तराशा

प्रतिकृति को बनाने में धार के कलाकार उज्जवल सिंह सोलंकी, लोकेश राठौर व उनकी टीम के अलावा दिल्ली के कारीगरों की भी टीम साथ काम कर रही है। इसमें दिल्ली के मुस्लिम कारीगर आसिफ खान व उनके साथियों की भी टीम ने लगातार तीन महीने रोजान काम कर इस प्रतिकृति का निर्माण किया है। इस टीम ने वेल्डिंग से मंदिर का स्ट्रक्चर और ख़ूबसूरती देने का काम किया है। इसे बनाने के लिए 15 कारीगरों की टीम रोज 12 घंटे काम कर ही है।
रात में लाइटिंग से निखरती है मंदिर की भव्यता

विश्राम बाग जहां श्रीराम मंदिर अयोध्या की प्रतिकृति बनाई जा रही है उसके ठीक नीचे वाटर बॉडी है। अब यहां प्रतिकृति बनने के बाद नीचे पानी से लेकर मंदिर के प्रतिकृति के गुम्बद तक का नजारा बहुत ही खूबसूरत दिखाई देता है। रात को लाइटिंग में इसकी भव्यता, दिव्यता और सुंदरता देखते ही बनती है। यहां रात का दृश्य तो काफी मनोरम है। इस विश्राम बाग का लोकार्पण आचार संहिता के पहले मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान कर चुके हैं।
वाटर बॉडी पर बनाया है मंदिर
विश्राम बाग इंदौर का एक बहुत ही अच्छा बगीचा है। इसमें जहां श्रीराम मंदिर, अयोध्या मंदिर बनाया है उसे नीचे वाटर बॉडी है। अब यहां प्रतिकृति बनने के बाद नीचे पानी से लेकर मंदिर के प्रतिकृति के गुम्बद तक का नजारा बहुत ही खूबसूरत दिखाई देता है। रात को लाइटिंग में इसकी भव्यता, दिव्यता और सुंदरता देखते ही बनती है। यहां रात का दृश्य तो काफी मनोरम है। इस विश्राम बाग का लोकार्पण आचार संहिता के पहले मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान कर चुके हैं।
कलाकारों को करेंगे सम्मानित
मेयर पुष्यमित्र भार्गव के मुताबिक अभी करीब 20-25 दिनों का काम बाकी है जिसमें लाइटिंग, कलर, फिनिशंग आदि शामिल है। मंदिर की प्रतिकृति देखने पर पता ही नहीं चलता कि उसे स्क्रैप से बनाया गया है। इसका रंग रोगन ब्राउन कलर से किया जाएगा। आचार संहिता के बाद इसे जनता के लिए खोला जाएगा और भव्य तरीके से लोकार्पण भी होगा। हम प्रतिकृति बनाने वाली टीम के कलाकारों का सम्मान भी करेंगे।