
केंद्र सरकार के लेबर रिफॉर्म एजेंडे को लेकर संघ परिवार में मतभेद उभरकर सामने आए हैं क्योंकि RSS से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने लोकसभा द्वारा पारित तीन लेबर कोड बिलों का विरोध किया है. BMS के जोनल सेक्रेटरी पवन कुमार ने कहा, ‘जिस तरह से सरकार ने तीन लेबर कोड बिल पारित किए हैं, हम उसका विरोध करते हैं. सरकार ने लेबर कोड बिल जल्दबाजी में पारित कराएं, जो ठीक नहीं हैं. इस पर विस्तार से चर्चा नहीं हो पाई. सरकार ने हमारी महत्वपूर्ण मांगें नहीं मानी हैं. हमने मांग की थी कि सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था यूनिवर्सलाइज करनी चाहिए. यानी देश के हर मजदूर को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का फायदा मिलना चाहिए लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया.’
उन्होंने आगे कहा, ‘हमने सरकार से ये भी मांग की थी कि कोड ऑन ऑक्यूपेशनल सेफ्टी में जो सुरक्षा के प्रावधान हैं, वर्करों के लिए उसे भी यूनिवर्सलाइज किया जाए लेकिन जो बिल पारित हुआ है उसमें हजार्ड इंडस्ट्री में सुरक्षा सिर्फ उन मजदूरों को दी जाएगी, जो उन निकायों में काम करते हैं, जहां 10 या 10 से ज्यादा मजदूर काम करते हैं.’
पवन कुमार ने आगे कहा, ‘इसको लेकर भारतीय मजदूर संघ का एक बड़ा विरोध सरकार के सामने है. हमारी इस बात पर कड़ी आपत्ति है कि सोशल सिक्योरिटी कोड बिल में ESIC और EPFO यानी भविष्य निधि से जुड़ी सुविधाएं देश के हर वर्कर को मिलनी चाहिए. सरकार ने हमारी इस मांग को बिल में शामिल नहीं किया है. भारतीय मजदूर संघ की 2 से 4 अक्टूबर के बीच 3 दिनों की एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें 3000 डेलिगेट्स भाग लेंगे. इस बैठक में हम इस मसले पर अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे.’
बता दें कि कोरोना संकट की वजह से करीब पांच महीने बाद 14 सितंबर से संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ था. यह सत्र 18 दिनों का था. इसे 1 अक्टूबर को खत्म होना था लेकिन कोरोना काल में मुसीबतें कम नहीं हुईं, लिहाजा आज (बुधवार) मानसून सत्र खत्म हो सकता है. सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया जा सकता है. विपक्ष ने किसान बिलों को लेकर दोनों सदनों की कार्यवाही का बॉयकॉट किया है.
PM-CARES फंड ट्रस्ट तब से विवादों में रहा है, जब से इसे बनाया गया था, और इसकी पारदर्शिता के मुद्दे को लेकर कई बार रडार के तहत आया है. शनिवार को लोकसभा में मोदी सरकार और विपक्षी दलों के बीच प्रधानमंत्री की नागरिक सहायता और आपात स्थिति राहत कोष (PM- CARES फंड) में पारदर्शिता की कमी पर चर्चा हुई।
कांग्रेस, DMK और TMC जैसी विपक्षी पार्टियों ने COVID -19 के लिए PM- CARES फंड की स्थापना का विरोध करते हुए इसे “ब्लैक होल” करार दिया और इसके लिए दान के लिए दिए गए टैक्स ब्रेक और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) टैग पर सवाल उठाया।
विपक्ष ने कहा कि फंड में पारदर्शिता का अभाव है जो जूनियर फाइनेंस मिनिस्टर अनुराग ठाकुर ने खारिज कर दिया। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि नेहरू के समय के प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) के तहत आपातकाल के लिए किए गए दान का कांग्रेस के गांधी परिवार ने दुरुपयोग किया था.
गरमा-गरम बहस तब हुई जब लोकसभा कराधान और अन्य कानूनों (Relaxation and Amendment of Certain Provisions) विधेयक- 2020 पर चर्चा कर रही थी, जो कि कर दाताओं को कर देने में राहत की पेशकश करना चाहती थी,
जो कि धारा 80 (जी) के तहत पीएम केयर्स फंड में किए गए दान के लिए कटौती प्रदान करता है, फंड की आय में छूट की रिपोर्ट न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने दी थी। इस बिल को अब पारित कर दिया गया है।
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RRSP) के एन. के. प्रेमचंद्रन ने कहा कि उन्हें अलग कोष बनाने के पीछे का तर्क समझ नही आया, जबकि प्रधानमंत्री का राष्ट्रीय राहत कोष पहले से ही मौजूद है,
और इसी का उपयोग आपात की स्थिति के समय उपयोग करने के लिए है। प्रेमचंद्रन ने द टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (Relaxation and Amendment of Certain Provisions) बिल-2020 पर बहस की थी।
प्रेमचंद्रन ने मीडिया के हवाले से कहा कि PM CARES फंड में पारदर्शिता का अभाव है, क्योंकि इसका नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा ऑडिट नहीं किया जाता है। इसके अलावा इसके ऊपर RTI भी लागू नहीं है। इस फंड में पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल मुख्य मुद्दा है, जिसे मैं उजागर करना चाहता हूं.