बीजेपी विधायक जज्जी को कोर्ट से बड़ी राहत !

ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने अशोकनगर के BJP विधायक जजपाल सिंह उर्फ जज्‍जी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने विधायक के जाति प्रमाण पत्र को सही मानते हुए जज्जी को राहत दी है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब विधायक जजपाल उर्फ जज्जी की विधायकी बरकरार रहेगी। इस फैसले के बाद विधायक के समर्थकों में खुशी की लहर है।

बता दें कि बीते साल 12 दिसंबर 2022 को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने बीजेपी विधायक जज्जी के अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र को अवैध मानते हुए उनकी विधायकी को शून्य घोषित करते हुए FIR के आदेश दिए थे। विधायक जज्जी ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ डबल बेंच में अपील की थी, जिसके बाद उन्हें सिंगल बेंच के आदेश पर फौरी तौर पर स्टे मिल गया था। इस मामले में ऑर्डर रिजर्व किया गया था, लेकिन अब इस मामले में फैसला आ गया है। जिसके तहत विधायक जज्जी को बड़ी राहत मिली है। इस फैसले से ना केवल उनकी विधायकी पर मंडरा रहा खतरा टल गया है। बल्कि उनके जाति प्रमाण पत्र पर उठ रहे सवालों पर भी कोर्ट के फैसले के बाद विराम लग गया है।


ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच का फैसला जजपाल सिंह जज्जी के पक्ष में आया है।

जाति प्रमाण पत्र को सही बताया है

विधायक जजपाल सिंह जज्जी के वकील एसएस गौतम के मुताबिक फैसला विधायक जज्जी के पक्ष में आया है और उनके जाति प्रमाण पत्र को वैध ठहराया है। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा जज्जी को जारी किए गए अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र को भी वैध माना है। एडवोकेट गौतम ने बताया है कि डबल बेंच ने हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के फैसले पर भी टिप्पणी है। आपको बता दें कि जज्जी के खिलाफ चुनाव लड़े भाजपा के ही लड्डूराम कोरी ने हाईकोर्ट ग्वालियर की सिंगल बेंच में जजपाल सिंह जज्जी की जाति प्रमाण पत्र को अवैध घोषित करने के लिए अपील की थी। सिंगल बेंच ने लड्डू राम कोरी के पक्ष में फैसला भी दिया था। मगर डबल बेंच ने इस फैसले को बदल दिया है। ग्वालियर हाई कोर्ट की डबल बेंच ने जजपाल सिंह जज्जी की नट जाति के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को लेकर भी उल्लेखनीय बातें अपने फैसले में कही है। साथ ही समिति के द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्र को सही माना है। इसके अलावा पंजाब से यहां माइग्रेशन वाले मामले को भी जज्जी के पक्ष में माना है।
कानूनी मंथन चल रहा है

खास बात यह है कि करीब 100 साल पहले पंजाब से जजपाल सिंह जज्जी के पूर्वज मध्य प्रदेश में आकर बस गए थे और उनकी नट जाति मध्य प्रदेश की अनुसूचित जाति वर्ग में आती है। जज्जी के पक्ष में आए इस फैसले पर याचिकाकर्ता लड्डूराम के वकील का कहना है कि फैसले पर मंथन चल रहा है। याचिकाकर्ता से चर्चा के बाद हाईकोर्ट की डबल बेंच के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर विचार किया जाएगा।

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