ब्राजील वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी है स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सिन, ICMR-NIV की अध्ययन में किया दावा

भारत में कोरोनावायरस के खात्मे को लेकर दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है. कई बार वैक्सीन के प्रभाव को लेकर सवाल खड़े किए गए, लेकिन इस बीच एक नए अध्ययन में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के वैज्ञानिकों ने पाया है कि कोवैक्सिन कोरोना के ब्राजील वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी है. वैज्ञानिकों ने यह दावा तब किया है जब उन्‍होंने कुछ दिन पहले ही कहा था कि भारत बायोटेक की कोवैक्सिन ब्रिटेन वैरिएंट और भारत के डबल म्‍यूटेंट पर भी प्रभावी है.

इस समय देश में चल रहे टीकाकरण अभियान के तहत भारत बायोटेक की कोवैक्सिन और सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्‍ड का इस्‍तेमाल हो रहा है. लोगों को यही दो वैक्‍सीन लगाई जा रही हैं.

30 अप्रैल को bioRxiv प्री प्रिंट में प्रकाशित अध्‍ययन में बताया गया है कि कोवैक्सिन कोरोना वायरस के ब्राजीलियाई वैरिएंट के खिलाफ प्रभावी है. इसमें कहा गया है कि कोवैक्सिन के दो डोज लेने के बाद शरीर में एंटीबॉडी बूस्‍ट होते हैं, जो ब्राजील वैरिएंट के खिलाफ प्रभावी हैं.

वैज्ञानिकों ने यह अध्‍ययन कोविड 19 से ठीक हो चुके लोगों पर किया है. इनमें ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील वैरिएंट से संक्रमित हुए लोग भी शामिल थे. इनमें वैक्‍सीन ले चुके लोग भी शामिल किए गए थे. जिन लोगों को कोवैक्सिन का टीका लगा था, शोध में उनमें बेहतर प्रतिक्रिया दिखाई दी.

बता दें कि कुछ दिन पहले एक अध्‍ययन में दावा किया गया था कि ब्राजील से निकले कोरोना वायरस के पी.1 स्वरूप के सार्स-सीओवी-2 के अन्य स्वरूपों की तुलना में अधिक संक्रामक होने की संभावना है और यह वायरस से पूर्व में हुए संक्रमण से हासिल प्रतिरोधक क्षमता से बचने में सक्षम हो सकता है. साइंस जर्नल में प्रकाशित शोध में पी .1 की विशेषता और उसके गुणों को जानने के लिये ब्राजील के मनौस शहर से आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है. इसमें जेनेटिक सीक्वेंसिंग डेटा के 184 नमूनों को भी शामिल किया गया है.

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