
क्रिप्टो करेंसी में निवेश करने वाले इंदौर सहित देशभर के लोगों के 1900 करोड़ रुपए साइबर अटैक से अन्य देश में किसी हैकर के यहां ट्रांसफर हो गए हैं। इस मामले में निवेशकों ने इंदौर स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में अर्जी दायर की है। बुधवार को एनसीएलटी ने इस मामले की सुनवाई की। निवेशकों ने इस मामले में केंद्रीय वित्त मंत्रालय, ट्रेडिंग इन्वेस्टिंग एक्सचेंज फर्म वजीर एक्स सहित अन्य को पक्षकार बनाया है।
याचिकाकर्ता गौरांश व्यास की ओर से अधिवक्ता वरुण रावल, प्रवीण पांचाल ने याचिका दायर की है। याचिका में उल्लेख किया है कि जिस ट्रेडिंग फर्म में निवेशकों ने निवेश किया था, उसका संचालन झन्माई लैब्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जाता है। इस कंपनी के डायरेक्टर ने पिछले दिनों सोशल मीडिया पर निवेशकों के लिए संदेश जारी किया था कि निवेशकों का पैसा जो जमा था, वह साइबर अटैक से चोरी
हो गया है। निवेशक ही सलाह दें कि अब क्या किया जाए। निवेशकों को उल्टी सलाह ये भी दी गई कि वह अपना पैसा हासिल करने के लिए कोर्ट में नहीं जाएं। इसमें लंबा समय लगेगा। कंपनी अन्य तरीकों से पैसा लौटा देगी।
3 दिन तक निवेशकों को धोखे में रखा
वकील रावल ने याचिका में उल्लेख किया कि जिस फर्म के खाते में निवेशकों का रुपया जमा रहता था, वह तकनीकी रूप से इतना मजबूत है कि बिना संचालकों के हस्ताक्षर के ट्रांसफर हो ही नहीं सकता। खास बात यह है कि पैसा साइबर अटैक से ट्रांसफर होने के बाद भी 3 दिन तक लोगों से निवेश करवाया जाता रहा। एनसीएलटी से मांग की गई है कि कंपनी के लेनदेन पर अंतरिम रोक लगाई जाए। वहीं निवेशकों के पैसे लौटाने के लिए फर्म के संचालकों पर कार्रवाई की जाए। इस साइबर अटैक की हाई लेवल जांच कराई जाए।
ज्यूरीडिक्शन को लेकर फंसा पेंच
वकील रावल ने बताया कि बुधवार को सुनवाई के दौरान ज्यूरीडिक्शन को लेकर बहस हुई। ट्रिब्यूनल का कहना है कि कंपनी का ऑफिस मुंबई में है। मामला उनके ज्यूरीडिक्शन का है ये साबित करें। मामले में अगली सुनवाई सितंबर में होगी।