छेड़छाड़ के मामले दिल्ली हाईकोर्ट का अनोखा फैसला, आरोपियों को 50-50 नीम के पौधे लगाने का दिया आदेश; जानिए वजह

नई दिल्‍ली । दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने छेड़छाड़ के एक मामले में आरोपियों (Accused) को अनोखी सजा सुनाई है कोर्ट ने महिला रिश्तेदार से छेड़छाड़ और उसे चोट पहुंचाने के आरोपी एक व्यक्ति और उसके दो बेटों के खिलाफ दर्ज एफआईआर खारिज कर उन्हें 50-50 नीम के पौधे (Neem Plants) लगाने का निर्देश दिया। दोनों पक्षों से बातचीत करने के बाद अदालत ने कहा कि उन्होंने पुष्टि की है कि बिना किसी धमकी, दबाव या जबरदस्ती के उनके बीच मामला सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया है। ऐसे में अगर प्राथमिकी खारिज कर दी जाती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

क्यों दिया ऐसा फैसला

जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता की अध्यक्षता वाली कोर्ट ने हर एक आरोपी को समझौते के तहत 50 नीम के पौधे लगाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह फैसला तब सुनाया जब अदालत को सूचित किया गया कि विवाद, जिसमें छेड़छाड़, चोट पहुंचाना, चोरी और गलत तरीके से रोकने के आरोप शामिल थे, को मध्यस्थता के जरिए सुलझा लिया गया है। यह मामला 2015 का है। शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों ही रिश्तेदार हैं और उन्होंने मामले को खत्म करने और आगे नहीं बढ़ने की इच्छा जाहिर की है।

पौधे लगाने के बाद तस्वीरें सबमिट करें

जस्टिस मेंदीरत्ता ने पारिवारिक विवाद के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर देते हुए कहा, ‘तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, याचिकाकर्ताओं पर जुर्माना लगाने के बजाय, उन्हें निर्देश दिया जाता है कि वे 50-50 नीम के पौधे लगाएं।’ यह पौधारोपण छावला पुलिस स्टेशन में, उपयुक्त बागवानी अधिकारियों की देखरेख में किया जाना चाहिए। कोर्ट ने आदेश दिया कि लगाए गए पौधों की तस्वीरें, पुलिस रिपोर्ट के साथ, आठ हफ्ते के अंदर पेश की जानी चाहिए। इसके अलावा, पौधों के रखरखाव की देखरेख अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए, ताकि पर्यावरण पहल की सफलता सुनिश्चित हो सके।

61 साल के आरोपी को मिली 30 पौधे लगाने की सजा

इससे पहले दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला से छेड़छाड़ करने वाले एक 61 साल के आरोपी शख्स को 30 पौधे लगाने की सजा सुनाई थी। यह सजा देने के बाद अदालत ने केस को बंद कर दिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मामले को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया है। दरअसल धारा 354 के तहत व्यक्ति के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी। जिसपर जस्टिस ने कहा कि दोनों पार्टियों ने मामले को सुलझा लिया है, ऐसे में इसे लंबित रखने का कोई लाभ नहीं है।

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