धन तेरस पर्व

?प्राचीन हनुमान मंदिर मुकेरिपुरा इंदौर? पं बद्री प्रसाद पुजारी ज्योतिष संस्थान✍ ।संस्थापक स्व पं राधेश्याम जी शर्मा

???दीपमालिका महापर्व ?????

?कार्तिक मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी–धन तेरस पर्व 12-11-20 गुरूवार———

?त्रयोदशी तिथि प्रारंभ 12-11-20 गुरूवार रात्रि
9-30;मिनट से —

?त्रयोदशी तिथी पूर्ण—- 13-11- 20 शुक्रवार शाम 5-58 ।

?इस वर्ष धनतेरस को लेकर दीपमालिका पर्व की तिथि की ऐसी स्थिति बनी है जिससे आम जन भ्रम की स्थिति में है ।

?”””पहले यह समझे की धनतेरस व धनंवतरी जयंती , शिव जी का प्रदोष व्रत यम दीप दान यह सभी अलग अलग विषय है -यह सभी कर्म त्रयोदशी तिथि के पर — जो कर्म जिस काल तिथि का हे हमे वह कर्म उस कर्म काल तिथि मे करना चाहिए।

“”” ?दीप मालिका पर्व–‘ प्रदोष काल मे होता है । दीपमालिका पर्व मे त्रिरात्रि व्रत व पूजा —तेरस चतुर्दशी अमावस्या पर होती है । दीपमालिका पर्व रात्रि कालीन तिथि का पर्व है इसमे मुख्यत — रात्रि मे पूर्ण तिथि की प्रधानता देखनी चहिए।

इस वर्ष 12 को प्रदोष काल मे त्रयोदशी तिथि नही है । 13: को प्रदोष काल मे त्रिमुहूर्त त्रयोदशी तिथि नही है । वरन जब त्रयोदशीतिथी दोनो ही दिन पूर्ण व्याप्ति न हो प्रथम ही दिन दीप मालिका पर्व प्रदोष काल मे करना है ।

?चतुर्दशी तिथि प्रदोष काल मे है । 14 को अमावस्या तिथि प्रदोष काल मे है ।

“””?”कालरात्रिर्महारात्रिर्मोहारात्रिश्च दारूणा””?”””

?शाक्त ग्रंथो मे — त्रिरात्रि– त्रयोदशी- चतुर्दशी-अमावस्या यह तीन रात्रि मे अखंड दीपक लगाकर महाकाली महालक्ष्मी महा सरस्वती त्रिगुणात्मिका की उपासना व शक्ति की पूजा की जाती है । काल दर्श मे काल को प्रसन्न करने हेतु धनतेरस से अमावस्या की रात्रि तक अखंड दीपक लगाकर उपासना पूजा का विधान है ।

?यह तीनो रात्रि मे — – त्रयोदशी — चतुर्दशी –अमावस्या का योग होने से त्रिरात्रि व्रत पूजा–12-13-14 को ही होगी । कभी भी दो दिवस त्रिरात्रि व्रत नही होता हे अगर त्रयोदशी तिथि क्षय हो जाये तो सभी विचार करे पर्व तो द्वादशी तिथि मे ही होगा । इस वर्ष तो त्रयोदशी तिथि पंचांग मत भेद से रात्रि में 9-30 पर लग रही है ।

☝️सिर्फ पंचांग देखकर पर्व व्रत का निर्णय नही होता शास्त्रो के गूढ अध्ययन से ही व्रत पर्व महोत्सव का निर्णय संभव है ।

?सभी लोग धन तेरस के दीप मालिका का पर्व– 12-11-20 गुरूवार को करे । इसमें प्रदोष तिथि नही प्रदोष काल ( समय ) का वर्णन है । सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल शुरू हो जाता है जो — 2 घटे 24 मिनट का होता है ।

?त्रयोदशी तिथी रात्रि 9-30 पर लग रही है ओर त्रिरात्रि व्रत के नियम प्रात काल सूर्योदय से प्रारंभ हो जायेगा ।

? धनतेरस की पूजा व अखंड दीपक — 12-11-20 गुरूवार को सायं काल के समय से प्रारंभ हो जायेगा व दीपावली की रात्रि 14 /15 -11-20 तक रहेगा ।

?””””प्रदोष समय राजन कर्तव्या दीप मालिका “”?””

?प्रदोष काल मे दीप मालिका का पूजन व दीप दान त्रिरात्रि मे करना यह हमारा कर्तव्य है ।

?12-11-20 शुक्रवार को ही दीप मालिका उत्सव करके प्रदोष काल मे व रात्रि मे कुबेर जी लक्ष्मी जी की ,
माता की शक्ति पूजा अभिषेक उपासना करना है ।

☝️13-11-20 शुक्रवार को — त्रयोदशी व चतुर्दशी तिथि के कर्म काल तिथि के पर्व – व्रत – पूजा

?धनंवतरी जयंती,, प्रदोष व्रत , त्रयोदशी के हेतु यम दीप दान मासिक शिवरात्रि व्रत, कार्तिक मास कृष्ण पक्ष चतुर्दशी हनुमान जी का जन्मोत्सव का पर्व करना है । पितरो को दक्षिण दिशा मे मशाल दिखना यह समस्त कर्म- 13-11-20 को होगे ।

?त्रिरात्रि पूजा उपासना के अन्तर्गत– 13-11-20 को शाम प्रदोष काल मे दीप मालिका दीपदान करना है । यह द्वितिय दिवस के दीप दान होगे । व प्रदोष काल मे रात्रि मे माता की पूजा उपासना करना है ।

?इसलिए आप भ्रमित न हो जो कर्म जिस कर्म काल तिथि मे है वह करे । इस वर्ष तिथियों का असमंजस होने से कर्म काल पर्व व दीप दान त्रिरात्रि व्रत मे अंतर है ।

?त्रिरात्रि– पूजा दीप दान को ही शास्त्र प्रमाण मानकर 12-13 -14 नंवम्बर को दीपमालिका पर्व करे ।

12-11-20 त्रिरात्रि व्रत प्रारंभ पर — मंगल मुहूर्त

☝️ गादी बिछाने का मुहूर्त– 12-11-20 गुरूवार–

चौघडिया – प्रात– 6-39 से 8-02 मिनट शुभ का ।

प्रदोष काल – प्रारंभ 5-42 से 8-06 मिनट तक मे
– दीप मालिका पूजा करके कुबेर जी लक्ष्मी जी की पूजा करे ।

नित्यं प्रबद्ध धन धान्य कलत्र पुत्र
सौभाग्य संपद अधिकारस्त इहैव लोके ”

— जो लोग प्रदोष काल मे अनन्य भक्ति से लक्ष्मी जी के चरण कमलों का पूजन करते है उन्हे इस लोक मे धन धान्य कलत्र पुत्र सौभाग्य एवं संपत्ती की प्राप्ति होती है ..

?आपको धन त्रयोदशी की मंगलमय शुभकामनाएं ।

?मंदिर पुजारी पं राजाराम शर्मा 9826057023

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