सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग में अश्व पर सवार होकर आई है मां-नवरात्रि के नौ दिन माँ को अलग-अलग भोग लगाएं और अलग – महा वरदान पाएं  – पण्डित राजेश शर्मा

     

? सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग में अश्व पर सवार होकर आई है मां ?

नवरात्रि में दुर्गा माता की नौ दिनों में 9 स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। आश्विन मास के नवरात्र शारदीय नवरात्र भी कहलाते हैं ।
पौराणिक मान्यताएं है कि भगवान राम ने शारदीय नवरात्र की परंपरा की शुरुआत समुद्र के किनारे भगवती की 9 दिवसीय उपासना करते हुए प्रारंभ की थी।
परंतु शारदीय नवरात्रि का महत्व केवल राम द्वारा पूजित होने से नहीं है बल्कि इसके पूर्व में भी देवी पूजा का विधान रहा है। ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार समय-समय पर आश्विन मास में देवों ने भी देवी की पूजा की थी तथा भगवान राम ने इसी क्रम को आगे बढ़ाया था।
शरद ऋतु देवताओं की रात्रि मानी गई है तथा यह काल भगवती का शयन काल है। अतः शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार शरद काल में देवी का बोधन करते हुए पूजन किया जाता है।
आश्विन मास की प्रतिपदा में कुंभ स्थापना एवं देवी स्थापना के पश्चात जप, स्त्रोत रत्नावली, दुर्गा सप्तशती पाठ नित्य किया जाना चाहिए। इन नवरात्रों में सप्तमी, अष्टमी, नवमी एवं दशमी का विशेष पूजन क्रम, पत्रिका पूजन, शमी पूजन इत्यादि समस्त विधाओं से करना चाहिए, तभी नवरात्र व्रत संपूर्ण एवं पूर्ण फलदाई, कल्याणकारी और मंगलकारी जाते हैं।

?️ शुभ संयोगों में माँ का आगमन

भगवती दुर्गा का वाहन सिंह माना गया है लेकिन नवरात्र के समय तिथि के अनुसार मां भगवती अलग-अलग वाहनों में सवार होकर आती हैं। नवरात्रि के बाद उनका गमन भी अलग सवारी पर होता है। बाजारों में रौनक बढ़ेगी, बैंकों की उदारता से बाज़ार में पैसा आएगा, रियल एस्टेट में भी उछाल आयेगा।
इस वर्ष शनिवार से नवरात्र का प्रारंभ होने की वजह से मां दुर्गा का वाहन घोड़ा है इस नवरात्रि में देवी का आगमन घोड़े से ही हुआ है ।
प्रतिवर्ष नवरात्र पर देवी अलग-अलग वाहन से धरती पर आती हैं। नवरात्रि का पहला दिन शनिवार होने के कारण मां दुर्गा घोड़े की सवारी करते हुए पृथ्वी पर अाई है, जब मां दुर्गा की सवारी घोड़ा रहता है ऐसी स्तिथि में पड़ोसी देशों से युद्ध, गृह युद्ध,अराजकता, आमजन में सरकार के प्रति भारी असंतोष और रोष देखने को मिल सकता है। आंधी-तूफान और सत्ता में भारी उथल-पुथल एवम उठा – पटक जैसी गतिविधियां बढ़ने की आशंका है। पेट्रोलियम उत्पादों एवम सोना चांदी के दामों में भी उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। राजनीति दलों में पाला बदलने का रिवाज जोरों पर होगा। कुछ दिग्गज दल के बड़े नेता घर बैठ जाएंगे। मायानगरी में बड़ी मछलियां भी फसेंगी। मायानगरी, राजनीति और खेल जगत में नामी -गिरामी के निधन की खबरें मिल सकती हैं। साथ ही नवरात्र का आखिरी दिन रविवार होने से देवी भैंसे पर सवार होकर जाएंगी, इसके अशुभ फल के अनुसार देश में क्लेश और शोक बढ़ने की आशंका रहेगी। कुल मिलाकर आने वाले कुछ महीने देश के लिए कुछ ठीक नहीं है ऐसे संकेत दिखाई दे रहे हैं।

पण्डित राजेश शर्मा, इंदौर।

 

 

? नवरात्रि के नौ दिन माँ को अलग-अलग भोग लगाएं और अलग – महा वरदान पाएं?
?️ प्रथम नवरात्रि पर मां को गाय का शुद्ध घी या फिर सफेद मिठाई अर्पित की जाती है।

?️ दूसरे नवरात्रि के दिन मां को शक्कर का भोग लगाएं और भोग लगाने के बाद इसे घर में सभी सदस्यों को दें इससे उम्र में वृद्धि होती है।

?️ तृतीय नवरात्रि के दिन दूध या दूध से बनी मिठाई, खीर का भोग मां को लगाएं एवं इसे ब्राह्मण को दान करें इससे दुखों से मुक्ति होकर परम आनंद की प्राप्ति होती है।

?️ चतुर्थ नवरात्र पर मां भगवती को मालपुए का भोग लगाएं और ब्राह्मण को दान दें इससे प्रखर बुद्धि का विकास होने के साथ निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है।

?️नवरात्रि के पांचवें दिन मां को केले का नैवेद्य अर्पित करने से शरीर स्वस्थ बना रहता है।

?️नवरात्रि के छठे दिन मां को शहद का भोग लगाएं, इससे आकर्षण शक्ति में वृद्धि होती है।

?️ सप्तमी पर मां को गुड़ का नैवेद्य अर्पित करने और इसे ब्राह्मण को दान करने से शोक से मुक्ति मिलती है एवं अचानक आने वाले संकटों /मुसीबतों से रक्षा भी होती है।

?️अष्टमी व नवमी पर मां को नारियल का भोग लगाएं और नारियल का दान करें इससे संतान संबंधी तमाम परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

पण्डित राजेश शर्मा, इंदौर।

 

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *